: कलेक्टर के तानाशाही रवैये से क्या हरदा में लोकतंत्र की हत्या हो रही है - न.पा.पार्षद
Barkat Qureshi / Sun, Feb 2, 2025 / Post views : 318
कलेक्टर के तानाशाही रवैये से क्या हरदा में लोकतंत्र की हत्या हो रही है - न.पा.पार्षद
हरदा -कलेक्टर का आदेश तानाशाही की ओर इशारा करता है!
हरदा - नगर पालिका हरदा के पार्षदों ने कलेक्टर द्वारा नगर पालिका के सफाई कार्यों में सीधा हस्तक्षेप करने और 35 वार्डों में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति को तानाशाही करार दिया है। यह आदेश न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को कुचलने का प्रयास है, बल्कि नगर पालिका की स्वायत्तता पर सीधा हमला भी है। यह साफ दर्शाता है कि हरदा में लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर करने और नौकरशाही की मनमानी को बढ़ावा देने की साजिश रची जा रही है।
क्या कलेक्टर का यह आदेश अवैध और अलोकतांत्रिक नहीं है?
हरदा नगर पालिका एक स्वायत्त संस्था है, जिसे नगर विकास, सफाई, जल आपूर्ति और अन्य मूलभूत सेवाओं को संचालित करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन कलेक्टर महोदय ने अपने पद की मर्यादा लांघते हुए नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप कर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश की है।
अगर प्रशासन को ही सफाई व्यवस्था देखनी थी, तो फिर जनता ने नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों को क्यों चुना? क्या जनता ने कलेक्टर को चुना था?
क्या कलेक्टर अपनी विफलता छिपाने के लिए नगर पालिका को टारगेट कर रहे हैं?
नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को वर्षों से पर्याप्त संसाधन नहीं मिले। कचरा प्रबंधन, जल निकासी और अन्य सुविधाओं के लिए बार-बार बजट मांगा गया, लेकिन प्रशासन ने केवल आश्वासन दिया। अब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नगर पालिका को टारगेट कर रहा है और सीधे तौर पर नगर पालिका की स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
क्या कलेक्टर महोदय का यह आदेश सिर्फ दिखावे के लिए है?
इस आदेश की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नियुक्त किए गए अधिकारी रिपोर्टिंग तो नगर पालिका के सीएमओ को ही करेंगे, यानी आदेश कलेक्टर का, मगर काम नगर पालिका को ही करना है!
तो फिर इन अधिकारियों की जरूरत क्या थी? क्या ये अधिकारी केवल नगर पालिका पर अंकुश रखने और प्रशासनिक
दबाव बनाने के लिए तैनात किए गए हैं?
क्या अब नगर पालिका को केवल एक 'रबर स्टैंप' बनाने की साजिश रची जा रही है?
अगर यह आदेश स्वीकार कर लिया गया, तो आने वाले समय में नगर पालिका की कोई जरूरत ही नहीं बचेगी। क्या अब सड़कें भी प्रशासनिक अधिकारी बनाएंगे? क्या जल आपूर्ति की जिम्मेदारी भी कलेक्टर अपने हाथ में लेंगे?
अगर ऐसा है, तो नगर पालिका को भंग कर देना चाहिए और जनता को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए कि अब उनके चुने हुए प्रतिनिधियों की कोई आवश्यकता नहीं है।
नगर पालिका अध्यक्ष का बयान:
"श्रीमान कलेक्टर महोदय द्वारा नगर पालिका के सफाई कार्यों में सीधा हस्तक्षेप कर वार्डों में सफाई प्रभारियों की नियुक्ति की गई, लेकिन इस पर हमसे कोई चर्चा नहीं की गई। यह न केवल हमारे अधिकारों का सीधा हनन है, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने का भी प्रयास है।
अगर कलेक्टर महोदय को लगता है कि हमारे अधिकार छीनकर और हमें दबाव में रखकर नगर पालिका चलाई जा सकती है, तो बेहतर होगा कि हम सभी पार्षद इस्तीफा दे दें और वे खुद प्रशासक बनकर नगर पालिका का संचालन करें। हम इस तानाशाही रवैये को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
पार्षदों की चेतावनी – नगर पालिका के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं!
हम, हरदा नगर पालिका के पार्षद, इस आदेश का कड़ा विरोध करते हैं। यह आदेश लोकतंत्र और निर्वाचित निकायों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है। यदि कलेक्टर को सफाई व्यवस्था सुधारनी ही थी, तो नगर पालिका को आवश्यक संसाधन और बजट देना चाहिए था, न कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपनाना चाहिए था।
हमारी मांगे:
1. कलेक्टर इस असंवैधानिक और तानाशाही आदेश को तत्काल रद्द करें।
2. नगर पालिका को उसके संवैधानिक अधिकारों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए।
3. यदि प्रशासन को सफाई सुधारनी है, तो नगर पालिका को आवश्यक संसाधन और फंड मुहैया कराया जाए, न कि अधिकारियों को नियुक्त कर राजनीतिक खेल खेला जाए।
जनांदोलन की चेतावनी!
ओमप्रकाश मोरछले ने कहा कि अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम कानूनी और जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। जनता के वोट से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस तरह दबाने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संयुक्त रूप से जारी:
मनोज मेलवार, बिंदु विनोद गुर्जर, अनीता अशोक राठोर ,प्रदीप सोनी, कुंवर सिंह सानिया ,रानी बघेल (नगर पालिका पार्षद, हरदा)
हरदा - नगर पालिका हरदा के पार्षदों ने कलेक्टर द्वारा नगर पालिका के सफाई कार्यों में सीधा हस्तक्षेप करने और 35 वार्डों में प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति को तानाशाही करार दिया है। यह आदेश न केवल निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के अधिकारों को कुचलने का प्रयास है, बल्कि नगर पालिका की स्वायत्तता पर सीधा हमला भी है। यह साफ दर्शाता है कि हरदा में लोकतांत्रिक प्रणाली को कमजोर करने और नौकरशाही की मनमानी को बढ़ावा देने की साजिश रची जा रही है।
क्या कलेक्टर का यह आदेश अवैध और अलोकतांत्रिक नहीं है?
हरदा नगर पालिका एक स्वायत्त संस्था है, जिसे नगर विकास, सफाई, जल आपूर्ति और अन्य मूलभूत सेवाओं को संचालित करने का संवैधानिक अधिकार प्राप्त है। लेकिन कलेक्टर महोदय ने अपने पद की मर्यादा लांघते हुए नगर पालिका के कामकाज में हस्तक्षेप कर जनप्रतिनिधियों की भूमिका को कमजोर करने की कोशिश की है।
अगर प्रशासन को ही सफाई व्यवस्था देखनी थी, तो फिर जनता ने नगर पालिका अध्यक्ष और पार्षदों को क्यों चुना? क्या जनता ने कलेक्टर को चुना था?
क्या कलेक्टर अपनी विफलता छिपाने के लिए नगर पालिका को टारगेट कर रहे हैं?
नगर पालिका के सफाई कर्मचारियों को वर्षों से पर्याप्त संसाधन नहीं मिले। कचरा प्रबंधन, जल निकासी और अन्य सुविधाओं के लिए बार-बार बजट मांगा गया, लेकिन प्रशासन ने केवल आश्वासन दिया। अब प्रशासन अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए नगर पालिका को टारगेट कर रहा है और सीधे तौर पर नगर पालिका की स्वायत्तता को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है।
क्या कलेक्टर महोदय का यह आदेश सिर्फ दिखावे के लिए है?
इस आदेश की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि नियुक्त किए गए अधिकारी रिपोर्टिंग तो नगर पालिका के सीएमओ को ही करेंगे, यानी आदेश कलेक्टर का, मगर काम नगर पालिका को ही करना है!
तो फिर इन अधिकारियों की जरूरत क्या थी? क्या ये अधिकारी केवल नगर पालिका पर अंकुश रखने और प्रशासनिक
दबाव बनाने के लिए तैनात किए गए हैं?
क्या अब नगर पालिका को केवल एक 'रबर स्टैंप' बनाने की साजिश रची जा रही है?
अगर यह आदेश स्वीकार कर लिया गया, तो आने वाले समय में नगर पालिका की कोई जरूरत ही नहीं बचेगी। क्या अब सड़कें भी प्रशासनिक अधिकारी बनाएंगे? क्या जल आपूर्ति की जिम्मेदारी भी कलेक्टर अपने हाथ में लेंगे?
अगर ऐसा है, तो नगर पालिका को भंग कर देना चाहिए और जनता को स्पष्ट रूप से बता देना चाहिए कि अब उनके चुने हुए प्रतिनिधियों की कोई आवश्यकता नहीं है।
नगर पालिका अध्यक्ष का बयान:
"श्रीमान कलेक्टर महोदय द्वारा नगर पालिका के सफाई कार्यों में सीधा हस्तक्षेप कर वार्डों में सफाई प्रभारियों की नियुक्ति की गई, लेकिन इस पर हमसे कोई चर्चा नहीं की गई। यह न केवल हमारे अधिकारों का सीधा हनन है, बल्कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को अपमानित करने का भी प्रयास है।
अगर कलेक्टर महोदय को लगता है कि हमारे अधिकार छीनकर और हमें दबाव में रखकर नगर पालिका चलाई जा सकती है, तो बेहतर होगा कि हम सभी पार्षद इस्तीफा दे दें और वे खुद प्रशासक बनकर नगर पालिका का संचालन करें। हम इस तानाशाही रवैये को बर्दाश्त नहीं करेंगे।"
पार्षदों की चेतावनी – नगर पालिका के अधिकारों पर हमला बर्दाश्त नहीं!
हम, हरदा नगर पालिका के पार्षद, इस आदेश का कड़ा विरोध करते हैं। यह आदेश लोकतंत्र और निर्वाचित निकायों के अधिकारों पर सीधा कुठाराघात है। यदि कलेक्टर को सफाई व्यवस्था सुधारनी ही थी, तो नगर पालिका को आवश्यक संसाधन और बजट देना चाहिए था, न कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को दरकिनार कर तानाशाही रवैया अपनाना चाहिए था।
हमारी मांगे:
1. कलेक्टर इस असंवैधानिक और तानाशाही आदेश को तत्काल रद्द करें।
2. नगर पालिका को उसके संवैधानिक अधिकारों के अनुसार स्वतंत्र रूप से कार्य करने दिया जाए।
3. यदि प्रशासन को सफाई सुधारनी है, तो नगर पालिका को आवश्यक संसाधन और फंड मुहैया कराया जाए, न कि अधिकारियों को नियुक्त कर राजनीतिक खेल खेला जाए।
जनांदोलन की चेतावनी!
ओमप्रकाश मोरछले ने कहा कि अगर हमारी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो हम कानूनी और जनआंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। जनता के वोट से निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को इस तरह दबाने की कोशिश किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
संयुक्त रूप से जारी:
मनोज मेलवार, बिंदु विनोद गुर्जर, अनीता अशोक राठोर ,प्रदीप सोनी, कुंवर सिंह सानिया ,रानी बघेल (नगर पालिका पार्षद, हरदा)विज्ञापन
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