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: खंडवा की बेटी, भारत की ज्योति,— अमेरिका की प्रयोगशालाओं तक – प्रिया कुशराम की अद्वितीय उड़ान"

Barkat Qureshi / Fri, May 2, 2025 / Post views : 309

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खंडवा की बेटी, भारत की ज्योति,— अमेरिका की प्रयोगशालाओं तक – प्रिया कुशराम की अद्वितीय उड़ान" 25 लाख की अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप सहित तीन वैश्विक पुरस्कार प्राप्त, विज्ञान और देश का नाम रोशन किया संवाददाता: इस्हाक गौरी, मूंदी विशेष रिर्पोट कभी किसी ने खंडवा की गलियों में खेलती एक बालिका को देखा होगा — आँखों में अगाध विश्वास, हाथों में किताबें, और दिल में एक आग। आज वही बालिका अमेरिका की रिसर्च प्रयोगशालाओं में बैठी है — भारत की प्रतिष्ठा और विज्ञान की परिभाषा गढ़ते हुए। नाम है – प्रिया कुशराम। वाशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी, अमेरिका में पीएचडी कर रही प्रिया को वर्ष 2025-26 के लिए विश्वविद्यालय की सर्वोच्च रिसर्च फेलोशिप — “डिसटेंशन ईयर फेलोशिप” प्राप्त हुई है, जिसकी राशि है 30,000 अमेरिकी डॉलर (लगभग 25 लाख रुपये)। यह पुरस्कार नहीं, यह प्रमाण है — कि खंडवा की माटी में भी विश्वविजयी बीज पनपते हैं। प्रिया को एक साथ तीन अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए — उटस्टैंडिंग रिसर्च असिस्टेंट अवॉर्ड आउटस्टैंडिंग डिस्टिंक्शन अवॉर्ड डिसटेंशन ईयर फेलोशिप इन पुरस्कारों को प्राप्त करना, किसी साधारण उपलब्धि की बात नहीं। यह उस उत्कृष्टता का सम्मान है जो न केवल अकादमिक है, बल्कि मानवीय है। ये महज एक फेलोशीप नही बल्कि विश्व की उन स्त्रिीयो को दिया जाने वाला सलाम है जिनका शोध मानवता के भविष्य को आकार देता है। उनका शोध क्षेत्र — बोन टिशू इंजीनियरिंग, 3डी प्रिंटिंग, और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग — एक ऐसी दिशा है जहाँ विज्ञान, चिकित्सा और मानव कल्याण एकाकार होते हैं। प्रिया का उद्देश्य है — ऐसे जैव-संगत इम्प्लांट्स विकसित करना जो हड्डियों की मरम्मत को सहज, सुलभ और सुरक्षित बना सकें। इस अनुसंधान के पीछे खडी है दो वैश्विक वेज्ञानिक हस्तिया प्रो. सुष्मिता बोस और प्रो. अमित बंद्योपाध्याय प्रिया इन्ही के निर्देशन में कर रही हैं। खंडवा से अमेरिका तक की यह यात्रा संघर्ष की सीढ़ियों से बनी है — स्कूली शिक्षा खंडवा से बीटेक आईआईटी कानपुर से और अब विश्व स्तर पर डॉक्टोरल शोध में उत्कर्ष प्रिया के पिता, श्री के.एस. कुशराम, श्री सिंगाजी ताप विद्युत परियोजना, दोगालिया में वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी हैं। बेटी की उपलब्धि पर उनकी आखे नम है लेकिन सीना गर्व से तना हुआ है उन्होने भावुक होकर गर्व से कहा कि — "हमारी बेटी ने यह सिद्ध कर दिया कि सच्ची लगन और समर्पण से सीमाएँ नहीं, सेतु बनते हैं।" ओर उसकी तपस्या आज रंग लायी है। बेटी प्रिया ने दिखा दिया है कि सीमाओ से बडी होती है लगन ओर साधनो से बडा होता है आत्मविश्वास माँ, श्रीमती राधा कुशराम कहा कि — "प्रिया ने हमें नहीं, पूरे भारत को गौरवान्वित किया है। हर बेटी में यह शक्ति है, बस विश्वास और अवसर चाहिए।" प्रिया अब हमारी नही भारत की बेटी हो गयी। आज पूरा खंडवा आज दीपों से दहक रहा है — बधाइयाँ, शुभकामनाएँ, और प्रेरणादायक उदाहरण बन चुकी हैं प्रिया। मुख्य अभियंता एस.के. मालवीय, जूनियाल साहब, और अहिरवाल सर सहित समस्त अधिकारीगण ने शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए कहा कि प्रिया किताबो को अपनी दोस्त मानती थी आज वही बच्ची प्रिया कुशराम अमेरिका की धरती पर विज्ञान की दुनिया में भारत का नाम स्वर्ण अक्षरो में लिख रही है।   प्रिया स्वयं कहती हैं — "यह सम्मान सिर्फ मेरा नहीं — यह खंडवा की हर बच्ची, हर गुरु, हर माँ-पिता का है, जिन्होंने मुझे सपनों को छूने का साहस दिया।" यह खबर नहीं, यह खबर नही बल्कि एक युग का प्रारम्भ है— खंडवा की एक बेटी आज विज्ञान की दुनिया में देश का परचम लहरा रही है — और बता रही है कि भारत की प्रतिभा को कोई सरहद नहीं रोक सकती। प्रिया कुशराम — वो नाम, जो अब प्रेरणा बन चुका है। ओर उनका कथन अब एक आदर्श बन चुका है कि रास्ता जितना कठिन होगा मंजिल की उतनी ही शानदार होगी।

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