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: "तापी सेठ – नाम नहीं, अदब की मिसाल थे। वो चले गये पर मूंदी की रूह में बस गये वो सन्नाटा जो हर दिल की धडकन बन गया

Barkat Qureshi / Thu, Apr 10, 2025 / Post views : 279

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"तापी सेठ – नाम नहीं, अदब की मिसाल थे। वो चले गये पर मूंदी की रूह में बस गये वो सन्नाटा जो हर दिल की धडकन बन गया 09 अप्रैल 2025 — चार वर्ष बीत गए, पर उनकी मौजूदगी आज भी मूंदी की हर गली में धड़कनों की तरह जिंदा है। कुछ लोग वक़्त के साथ खो नहीं जाते… वो वक़्त का चेहरा बन जाते हैं। कुछ क़दम ज़मीन पर नहीं चलते — वो इंसानियत की पेशानी पर इज़्ज़त की लकीर बन जाते हैं। तापी सेठ, आप वही थे… आपने कभी भाषण नहीं दिए — आपका मौन ही नेतृत्व करता था। आप सत्ता के पीछे नहीं दौड़े — सत्ता खुद आपके चरणों में आदर से झुकी। जहाँ कुर्सियाँ सत्ता के लिए लड़ी जाती हैं, वहाँ आप सेवा की मिसाल बन कर बैठे रहे। "वॉलीबॉल उनका खेल नहीं, इबादत थी…" मूंदी के मैदान में आज भी गेंद से पहले एक नाम गूंजता है — "सेठ जी!" जब कोई खिलाड़ी सर्व करता है, तो उसकी रूह पहले पूछती है — > "क्या मैं खेल रहा हूँ उनके क़दमों की तरह?"   रॉयल वॉलीबॉल क्लब, मूंदी ने कहा: > "अब हर मैच एक जिम्मेदारी है — उनके ख्वाबों को ज़िंदा रखने की।"   "हाजी गनी साहब और तापी सेठ — वो दोस्ती जो मज़हबों से ऊपर थी…" इन दो दोस्तों की यारी, मूंदी के दिल की धड़कन थी। जब ये दोनों मिलते थे, तो लगता था जैसे दुआ और सेवा एक साथ चल रही हैं। इनका रिश्ता बता गया — "जहाँ 'हम' होता है, वहाँ ही इंसानियत होती है।" "तापी सेठ नहीं रहे — पर 'तापी' अब भी बहती है…" जब कोई बिना जात पूछे मदद करता है, तो लगता है, तापी सेठ यहीं कहीं हैं। यह श्रद्धांजलि नहीं… यह कसम है। हम उन्हें केवल याद नहीं करेंगे — हम उन्हें जिएँगे। उनकी सोच, उनकी भाषा, उनका प्यार — अब हर युवा के दिल में रास्ता और रोशनी बनकर बसेगा। श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में शामिल रहे: शेरा भैया (बुरहानपुर), गजेन्द्र सिंह सोलंकी (बड़नगर), सोनू पहलवान, मनोहर पटेल, पूर्व अध्यक्ष लक्ष्मण पटेल, धनसिंह दादा और मूंदी के सैकड़ों आम और खास जनो ने —अश्रुपूरित नेत्रों से उन्हें नमन किया। और अंत में, एक शेर तापी सेठ को समर्पित: > "कुछ लोग अल्फ़ाज़ नहीं छोड़ते पीछे, तापी सेठ जैसे लोग… खामोशियाँ छोड़ जाते हैं — जो हर वक़्त बोलती हैं।"

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