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: नेशनल लोक अदालत में कुल 466 लंबित प्रकरणों का हुआ निराकरण कुल 996 पक्षकारगणों को मिला सीधा लाभ

Barkat Qureshi / Sat, May 10, 2025 / Post views : 268

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नेशनल लोक अदालत में कुल 466 लंबित प्रकरणों का हुआ निराकरण कुल 996 पक्षकारगणों को मिला सीधा लाभ  प्री-लिटिगेशन स्तर पर कुल 305 प्रकरणों में 6827217 रूपये के अवार्ड पारित किए गए हरदा से ब्यूरो चीफ गोपाल शुक्ला प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवं अध्यक्ष महोदया, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरदा श्रीमती तृप्ति शर्मा के कुशल मार्गदर्शन में जिला न्यायालय हरदा एवं व्यवहार न्यायालय खिरकिया तथा व्यवहार न्यायालय टिमरनी, जिला हरदा में शनिवार को नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया । लोक अदालत में जिले में कुल 14 खण्डपीठ बनाई थी जिसमें से 13 खण्डपीठ न्यायालयों की, 01 खण्डपीठ उपभोक्ता फोरम की बनाई गई थी। गठित खण्डपीठों द्वारा सुलह समझौते के आधार पर कुल 466 लंबित प्रकरणों का निराकरण किया गया तथा 5,73,24,718/- (पांच करोड़ तिहत्तर लाख चैबीस हजार सात सौ अट्ठारह रूपये) के अवार्ड पारित किए गए तथा कुल 996 लोगों को सीधा लाभांवित किया गया। इसी तरह प्री-लिटिगेशन स्तर पर कुल 305 प्रकरणों का निराकरण किया गया, जिसमे 6827217 रूपये के अवार्ड पारित किए गए तथा 345 लोगों को सीधा लाभांवित किया गया। आज दिनांक को आयोजित लोक अदालत में पक्षकारगणों को गठित खण्डपीठों द्वारा दी गई समझाईश के उपरांत पक्षकारगण अपने-अपने प्रकरणों को समाप्त करने के लिए राजी हुए। पक्षकारगणों को उनके राजीनामें करने पर प्रकरण समाप्त होने पर स्मृति स्वरूप फलदार वृक्ष भेंट किए गए तथा उन्हें उनके उज्जवल भविष्य की कामना के साथ विदा किया गया।   पति पत्नी के मतभेद हुए दूर, राजीनामे से समाप्त हुआ प्रकरण, दोनों खुशी-खुशी एकसाथ लौटे अपने घर इस नेशनल लोक अदालत में कुटुंब न्यायालय, हरदा के न्यायालय के प्रकरण क्रमांक आर.सी.एस.एच.एम./158/2024 मेें आवेदक पति द्वारा धारा 13(1) हिन्दू विवाह अधिनियम के तहत अपनी पत्नी विरूद्ध तलाक हेतु आवेदन न्यायालय मे प्रस्तुत किया था। आवेदक पति व अनावेदिका पत्नी का विवाह हिंदू रीति रिवाज के अनुसार मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के अंतर्गत ग्राम बिच्छापुर में दिनांक 26.01.2023 को हुआ था। इस विवाह से उभयपक्षों को कोई संतान नहीं थी। विवाह के उपरांत एक माह तक पति-पत्नि साथ में रहे। पत्नि द्वारा उसके पति और ससुराल वालोे के साथ झगड़ा किया जाने लगा। दिनांक 04.05.2023 से आवेदक की पत्नि मायके में ही रही। परिवार वालो के प्रयास के उपरांत भी पत्नी साथ रहने के लिए राजी नहीं हुई। पत्नी से पति के साथ रहने के लिए साफ इंकार कर दिया गया। प्रकरण में पति-पत्नी लगभग डेढ़ साल से अलग रह रहे थे। दिनांक 05.12.2024 को पति द्वारा अनावेदिका पत्नी से तलाक हेतु कुटुंब न्यायालय में आवेदन दिया गया। साथ ही पत्नी द्वारा भी भरण पोषण की राशि प्राप्ति हेतु कुटुंब न्यायालय में दावा प्रस्तुत किया गया था। न्यायालय में प्रकरण के विचारण के दौरान उपस्थित उभयपक्षों को माननीय न्यायालय श्री सुधीर कुमार चैधरी के द्वारा लोक अदालत में समझाईश के बाद, उनके मध्य आज लोक अदालत में राजीनामा कराकर, एक-दूसरे को माला पहनाकर, उन्हें साथ-साथ रहने हेतु एवं अपना दाम्पत्य जीवन सुखमय व्यतीत करने की सलाह देकर प्रकरण को समाप्त किया गया। साथ ही दोनों पक्षकारों को पौधे देकर, एक स्मृति के रूप में देकर न्यायालय से खुशी-खुशी विदा किया गया। इस प्रकार दोनों का निराकरण लोक अदालत के माध्यम से हुआ।

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