: "मां का दिल, बेटे का नाम... और ठगों का छल – मूंदी में ममता को बना दिया निशाना"
Barkat Qureshi / Wed, Apr 30, 2025 / Post views : 375
"मां का दिल, बेटे का नाम... और ठगों का छल – मूंदी में ममता को बना दिया निशाना"
विशेष रिपोर्ट | संवाददाता: इस्हाक गौरी
मूंदी नगर की वो दोपहर आम नहीं थी। वार्ड नंबर 13 की संध्या चौहान लखेरा के मोबाइल पर एक कॉल आया—शब्दों ने जैसे उनके पैरों तले ज़मीन खींच ली।
फोन पर डराने वाली आवाज़ थी—
"आपके बेटे सागर को पुलिस ने केस में गिरफ्तार कर लिया है... अगर बदनामी से बचना है, तो 50 हज़ार भेज दो… वरना उसे जैल मे डाल देंगे।"
एक मां के लिए इससे बड़ा डर क्या हो सकता है?
संध्या जी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। दिल में तूफान था, आंखों में आंसू... और हाथ कांपते हुए उन्होंने 4000 रुपये बारकोड स्कैन कर भेज दिए।
लेकिन नियति ने जो दिखाया, वो और चौंकाने वाला था।
जिस बेटे को पुलिस हिरासत में बताया गया था — वो तो अपनी दुकान पर बैठा था, मुस्कराता हुआ… काम में व्यस्त।
सागर बताते हैं:
"मैं तो वहीं था... जब मम्मी की हालत देखी, तो समझ आया कि उन्हें डराकर ठगा गया है। वो महिला हैं, एक मां हैं — और इसी को ठगों ने हथियार बना लिया।"
ये ठगी नहीं थी, ये ममता की बेइज्जती थी।
ये वार सिर्फ़ जेब पर नहीं, दिल पर किया गया था।
आज के साइबर अपराधी फोन नहीं, अब भावनाओं की रगों से खेल रहे हैं।
मूंदी का ये मामला एक चेतावनी है — आपके घर में कोई भी मां, बहन, बुजुर्ग... किसी की मासूमियत अगला निशाना हो सकती है।
प्रशासन से गुहार है — ऐसी वारदातों को ‘केस नंबर’ नहीं, इंसाफ़ की आवाज़ बनाया जाए।
और जनता से अपील — किसी भी डराने वाली कॉल पर तुरंत सतर्क हो जाएं, जांच करें, और पुलिस को सूचित करें।
क्योंकि ठग अब सिर्फ़ पैसे नहीं चुरा रहे… भरोसा, ममता और इंसानियत भी लूट रहे हैं।
विशेष रिपोर्ट | संवाददाता: इस्हाक गौरी
मूंदी नगर की वो दोपहर आम नहीं थी। वार्ड नंबर 13 की संध्या चौहान लखेरा के मोबाइल पर एक कॉल आया—शब्दों ने जैसे उनके पैरों तले ज़मीन खींच ली।
फोन पर डराने वाली आवाज़ थी—
"आपके बेटे सागर को पुलिस ने केस में गिरफ्तार कर लिया है... अगर बदनामी से बचना है, तो 50 हज़ार भेज दो… वरना उसे जैल मे डाल देंगे।"
एक मां के लिए इससे बड़ा डर क्या हो सकता है?
संध्या जी का चेहरा सफ़ेद पड़ गया। दिल में तूफान था, आंखों में आंसू... और हाथ कांपते हुए उन्होंने 4000 रुपये बारकोड स्कैन कर भेज दिए।
लेकिन नियति ने जो दिखाया, वो और चौंकाने वाला था।
जिस बेटे को पुलिस हिरासत में बताया गया था — वो तो अपनी दुकान पर बैठा था, मुस्कराता हुआ… काम में व्यस्त।
सागर बताते हैं:
"मैं तो वहीं था... जब मम्मी की हालत देखी, तो समझ आया कि उन्हें डराकर ठगा गया है। वो महिला हैं, एक मां हैं — और इसी को ठगों ने हथियार बना लिया।"
ये ठगी नहीं थी, ये ममता की बेइज्जती थी।
ये वार सिर्फ़ जेब पर नहीं, दिल पर किया गया था।
आज के साइबर अपराधी फोन नहीं, अब भावनाओं की रगों से खेल रहे हैं।
मूंदी का ये मामला एक चेतावनी है — आपके घर में कोई भी मां, बहन, बुजुर्ग... किसी की मासूमियत अगला निशाना हो सकती है।
प्रशासन से गुहार है — ऐसी वारदातों को ‘केस नंबर’ नहीं, इंसाफ़ की आवाज़ बनाया जाए।
और जनता से अपील — किसी भी डराने वाली कॉल पर तुरंत सतर्क हो जाएं, जांच करें, और पुलिस को सूचित करें।
क्योंकि ठग अब सिर्फ़ पैसे नहीं चुरा रहे… भरोसा, ममता और इंसानियत भी लूट रहे हैं।विज्ञापन
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