: मूंदी के कासिम गौरी ने रखा पहला रोजा
Barkat Qureshi / Mon, Mar 17, 2025 / Post views : 193
मूंदी के कासिम गौरी ने रखा पहला रोजा
रमज़ान के दौरान, नन्हे-मुन्ने बच्चे भी बड़ों की तरह रोजे रखने और इबादत करने में पीछे नहीं है.
रोजा हर मुसलमान आकिल व बालिग पर फर्ज है। माह- ए- रमजान में चांद नजर आते ही पूरी दुनिया का रंग बदलने लगता है और रहमतों की बारिश होने लगती है। ऐसे माहौल में बच्चे कहां पीछे रह सकते हैं। वह भी बड़ों की तरह रोजा रखते हैं। यहां बता दें कि रविवार को तेज गर्मी में बड़े तो बड़े, बच्चे भी अल्लाह के इस रहमत को पाने में पीछे नहीं हटे।
मूंदी के वार्ड क्रमांक 03 में रहने वाले सलीम गौरी के 6 वर्षीय बेटे कासिम गौरी ने पहला रोजा रखा
कासिम ने रोजा रखकर नमाज़े पढ़ी, कुरान की तिलावत की और देश में शांति और अमन के लिए दुआएँ मांगी.
इस दौरान मूंदी समाज के अध्यक्ष डां.वहीद कुरेशी व समाज के वरिष्ठजन आसिफ मलिक,सलामूं खत्री,सलीम धमाका,गब्बर खत्री ने कहा कि रमज़ान के दौरान बच्चों के रोजे रखने से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था की शिक्षाएं नई पीढ़ी में भी जीवित हैं.
कासिम गौरी के वालिद सलीम गौरी ने बताया कि कासिम रमजान माह के शुरूआत से रोजा रखने की जिद कर रहा था छोटा होने के कारण हम झिझक रहे थे लेकिन कल वह जिद पकड लिया कि वह रोजा रखेगा वरना दिन भर खाना नही खायेगा तो बच्चे की अल्लाह के प्रति जज्बा देखकर उसे सेहरी करवाई ओर रोजे की नियत बधवाई।
कासिम के रोजा रखने से कासिम के अभिभावकों ने कासिम गौरी को फूलो का माला पहनाकर उसकी हौसला अफजाई की,और रोजा रखने पर घर के बड़े-बुजुर्गों ने उन्हें रोजा खुलाई दिया। कासिम ने बताया कि रोजा खुलवाई के पेसो से वह कपडे लेगा। ओर पॉचो समय की नमाजो के बाद अपने नगर, मुल्क की तरक्की, खुशहाली व अमन माहौल के लिए दुआए मॉगी।
रमज़ान के दौरान, नन्हे-मुन्ने बच्चे भी बड़ों की तरह रोजे रखने और इबादत करने में पीछे नहीं है.
रोजा हर मुसलमान आकिल व बालिग पर फर्ज है। माह- ए- रमजान में चांद नजर आते ही पूरी दुनिया का रंग बदलने लगता है और रहमतों की बारिश होने लगती है। ऐसे माहौल में बच्चे कहां पीछे रह सकते हैं। वह भी बड़ों की तरह रोजा रखते हैं। यहां बता दें कि रविवार को तेज गर्मी में बड़े तो बड़े, बच्चे भी अल्लाह के इस रहमत को पाने में पीछे नहीं हटे।
मूंदी के वार्ड क्रमांक 03 में रहने वाले सलीम गौरी के 6 वर्षीय बेटे कासिम गौरी ने पहला रोजा रखा
कासिम ने रोजा रखकर नमाज़े पढ़ी, कुरान की तिलावत की और देश में शांति और अमन के लिए दुआएँ मांगी.
इस दौरान मूंदी समाज के अध्यक्ष डां.वहीद कुरेशी व समाज के वरिष्ठजन आसिफ मलिक,सलामूं खत्री,सलीम धमाका,गब्बर खत्री ने कहा कि रमज़ान के दौरान बच्चों के रोजे रखने से समाज में सकारात्मक संदेश जाता है और यह दर्शाता है कि धर्म और आस्था की शिक्षाएं नई पीढ़ी में भी जीवित हैं.
कासिम गौरी के वालिद सलीम गौरी ने बताया कि कासिम रमजान माह के शुरूआत से रोजा रखने की जिद कर रहा था छोटा होने के कारण हम झिझक रहे थे लेकिन कल वह जिद पकड लिया कि वह रोजा रखेगा वरना दिन भर खाना नही खायेगा तो बच्चे की अल्लाह के प्रति जज्बा देखकर उसे सेहरी करवाई ओर रोजे की नियत बधवाई।
कासिम के रोजा रखने से कासिम के अभिभावकों ने कासिम गौरी को फूलो का माला पहनाकर उसकी हौसला अफजाई की,और रोजा रखने पर घर के बड़े-बुजुर्गों ने उन्हें रोजा खुलाई दिया। कासिम ने बताया कि रोजा खुलवाई के पेसो से वह कपडे लेगा। ओर पॉचो समय की नमाजो के बाद अपने नगर, मुल्क की तरक्की, खुशहाली व अमन माहौल के लिए दुआए मॉगी।विज्ञापन
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