: मूंदी के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायी हाजी एम. आरिफ का इंतकाल
Barkat Qureshi / Sun, Apr 20, 2025 / Post views : 272
मूंदी के प्रतिष्ठित कपड़ा व्यवसायी हाजी एम. आरिफ का इंतकाल
क्षेत्र में शोक की लहर, हजारों नम आंखों ने दी अंतिम विदाई
रिपोर्ट: इस्हाक़ गौरी, मूंदी
मूंदी नगर ने आज एक ऐसे शख़्स को खो दिया, जिसने न सिर्फ़ व्यापार में बल्कि इंसानियत के हर मिज़ाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
हाजी आरिफ मजीद मलिक (उम्र 53 वर्ष), पुत्र स्व. हाजी मजीद मलिक उर्फ मजीद सेठ — का रविवार सुबह इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया।
शनिवार सुबह तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें तत्काल इंदौर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने ब्रेन स्ट्रोक व हेमरेज की पुष्टि की। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद, वे शाम होते-होते इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए
व्यवसाय, व्यवहार और समाजसेवा — तीनों में बेमिसाल थे हाजी आरिफ
हाजी आरिफ न केवल कपड़े के व्यवसाय में एक बड़ा नाम थे, बल्कि उनका मधुर स्वभाव, दरियादिली और सेवा-भावना उन्हें समाज में एक अलग मुक़ाम देता था।
वे हर वर्ग, हर धर्म के लोगों में समान रूप से लोकप्रिय थे। ज़रूरतमंदों की मदद करना, रिश्तों को निभाना और सादगी से जीवन जीना — यही उनके जीवन के मूल मंत्र थे।
उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे बिना किसी भेदभाव के सबके सुख-दुख में शामिल होते थे। समाजसेवा उनके लिए कोई अवसर नहीं, बल्कि स्वाभाविक जिम्मेदारी थी
जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब
रविवार दोपहर 2 बजे उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास से निकली। नगर के मुख्य मार्गों से होकर निकले जनाज़े में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
नगर कब्रिस्तान में उन्हें नम आंखों और दुआओं के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
मुस्लिम और हिन्दू समाज सहित हर वर्ग के लोग भारी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए उमड़े — जो उनकी सर्वधर्मीय सोच और मानवीय जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बना
नगर को एक अपूरणीय क्षति
नगर के वरिष्ठ समाजसेवियों, व्यापारियों, राजनेताओं और नागरिकों ने शोक जताते हुए कहा
> "हाजी आरिफ साहब एक नेकदिल, सच्चे समाजसेवी और मिलनसार इंसान थे।
उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
हम ऊपरवाले से दुआ करते हैं कि मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता हो और परिवार को यह भारी दुख सहने की ताक़त दे
हाजी आरिफ अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका मुस्कुराता चेहरा, सहयोगी स्वभाव और इंसानियत की महक — हमेशा इस नगर की रूह में जीवित रहेगी।
रिपोर्ट: इस्हाक़ गौरी, मूंदी
मूंदी नगर ने आज एक ऐसे शख़्स को खो दिया, जिसने न सिर्फ़ व्यापार में बल्कि इंसानियत के हर मिज़ाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी।
हाजी आरिफ मजीद मलिक (उम्र 53 वर्ष), पुत्र स्व. हाजी मजीद मलिक उर्फ मजीद सेठ — का रविवार सुबह इंदौर के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान दुखद निधन हो गया।
शनिवार सुबह तबीयत अचानक बिगड़ने पर उन्हें तत्काल इंदौर ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने ब्रेन स्ट्रोक व हेमरेज की पुष्टि की। तमाम चिकित्सकीय प्रयासों के बावजूद, वे शाम होते-होते इस फ़ानी दुनिया से रुख़्सत हो गए
व्यवसाय, व्यवहार और समाजसेवा — तीनों में बेमिसाल थे हाजी आरिफ
हाजी आरिफ न केवल कपड़े के व्यवसाय में एक बड़ा नाम थे, बल्कि उनका मधुर स्वभाव, दरियादिली और सेवा-भावना उन्हें समाज में एक अलग मुक़ाम देता था।
वे हर वर्ग, हर धर्म के लोगों में समान रूप से लोकप्रिय थे। ज़रूरतमंदों की मदद करना, रिश्तों को निभाना और सादगी से जीवन जीना — यही उनके जीवन के मूल मंत्र थे।
उनका व्यक्तित्व ऐसा था कि वे बिना किसी भेदभाव के सबके सुख-दुख में शामिल होते थे। समाजसेवा उनके लिए कोई अवसर नहीं, बल्कि स्वाभाविक जिम्मेदारी थी
जनाज़े में उमड़ा जनसैलाब
रविवार दोपहर 2 बजे उनकी अंतिम यात्रा उनके निवास से निकली। नगर के मुख्य मार्गों से होकर निकले जनाज़े में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
नगर कब्रिस्तान में उन्हें नम आंखों और दुआओं के साथ सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
मुस्लिम और हिन्दू समाज सहित हर वर्ग के लोग भारी संख्या में अंतिम दर्शन के लिए उमड़े — जो उनकी सर्वधर्मीय सोच और मानवीय जुड़ाव का जीवंत उदाहरण बना
नगर को एक अपूरणीय क्षति
नगर के वरिष्ठ समाजसेवियों, व्यापारियों, राजनेताओं और नागरिकों ने शोक जताते हुए कहा
> "हाजी आरिफ साहब एक नेकदिल, सच्चे समाजसेवी और मिलनसार इंसान थे।
उनके जाने से जो खालीपन आया है, उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता।
हम ऊपरवाले से दुआ करते हैं कि मरहूम को जन्नतुल फ़िरदौस में आला मक़ाम अता हो और परिवार को यह भारी दुख सहने की ताक़त दे
हाजी आरिफ अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका मुस्कुराता चेहरा, सहयोगी स्वभाव और इंसानियत की महक — हमेशा इस नगर की रूह में जीवित रहेगी।विज्ञापन
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