Sat 13 Jun 2026
Logo
Breaking News Exclusive
104 में 104 छात्र पास, 73 ने प्रथम श्रेणी में मारी बाज़ी अम्बेडकर जयंती पर समाजकार्य स्नातक एवं स्नातकोत्तर के विद्यार्थी ने रखें अपने विचार अवैध हथियारों के साथ युवक गिरफ्तार, कोतवाली पुलिस ने दो देशी पिस्टल किए बरामद कोतवाली पुलिस की बड़ी कार्रवाई: 29 धारदार तलवारों के साथ हरियाणा का युवक गिरफ्तार संकल्प से समाधान” अभियान के तहत नागरिकों के आवेदनों का किया जा रहा है निराकरण सरयूपारिण ब्राह्मण महिला मंडल का पारंपरिक हल्दी कुमकुम कार्यक्रम संपन् विशेष संवाददाता लोकेंद्र तिरोले विशेष संवाददाता लोकेंद्र तिरोले विशेष संवाददाता लोकेंद्र तिरोले संवाददाता लोकेंद्र तिरोले

: राम का वनवास समाप्त – उजाले की ओर एक नई शुरुआत  एक प्रेरणादायक सामाजिक सरोकार की सच्ची कहानी

Barkat Qureshi / Tue, Jul 29, 2025 / Post views : 665

Share:

राम का वनवास समाप्त – उजाले की ओर एक नई शुरुआत

 एक प्रेरणादायक सामाजिक सरोकार की सच्ची कहानी

जब मासूमियत गुम हो जाती है...

विशेष संवाददाता लोकेंद्र तिरोले

खंडवा/यह कहानी उन चार मासूम बच्चों की है, जिनके नन्हे कदम बचपन में ही भिक्षावृत्ति की अंधेरी गलियों में खो गए थे। अज्ञात, असहाय और समाज की नज़रों से ओझल ये बच्चे ओंकारेश्वर की पवित्र परंतु व्यथित भूमि पर भटक रहे थे। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न — ये नाम तो बाद में मिले, पर जीवन की शुरुआत एक गहरी पीड़ा के साथ हुई।   भूख, डर और अकेलेपन के साए में बचपन इन बच्चों ने उस उम्र में भूख, डर और अकेलापन झेला, जब बाकी बच्चे ममता की छांव में खेलते हैं। यह वो जीवन था, जो किसी मासूम को नहीं मिलना चाहिए। मगर किस्मत ने जब अंधेरे लिखे, तो इंसानियत ने रौशनी बनने का काम किया।   एक उम्मीद बनी – न्यायपीठ बाल कल्याण समिति खंडवा स्थित न्यायपीठ बाल कल्याण समिति ने इन बच्चों की स्थिति को गंभीरता से लिया। समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा, एक संवेदनशील शिक्षाविद और समाजसेवी, ने इस मामले को सिर्फ एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि भावनात्मक जिम्मेदारी समझा।   नेतृत्व जब संवेदना से जुड़ता है प्रवीण शर्मा और उनकी टीम – मोहन मालवीय, रुचि पाटिल, कविता पटेल और स्वप्निल जैन– ने मिलकर इन बच्चों के जीवन को दिशा देने की ठानी। बिना नाम के इन मासूमों को सबसे पहले नाम दिए गए — *राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न* ये नाम सिर्फ पहचान नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और पुनर्जीवन का प्रतीक बन गए।   बीमार राम के लिए पूरा प्रशासन बना परिवार राम की तबीयत बिगड़ने पर उसे खंडवा में तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और विभागीय अधिकारी – रत्ना शर्मा (डीपीओ), अजय गुप्ता (सहायक संचालक), टीका सिंह बिल्लौरे (बाल संरक्षण अधिकारी), पूजा राठौर और अन्य अधिकारी – सभी ने मिलकर इस बच्चे की देखभाल को एक मानवीय कर्तव्य माना।   पुनर्मिलन की ओर एक भावनात्मक कदम जब राम की तबीयत में सुधार आया, तो उसे इंदौर की बाल कल्याण समिति को स्थानांतरित किया गया, जहाँ वह अब *श्रद्धानंद आश्रम बाल गृह* में अपने तीनों भाइयों के साथ है। यह सिर्फ एक स्थानांतरण नहीं था — यह नए जीवन की शुरुआत थी।   यह केवल पुनर्वास नहीं… यह पुनर्जन्म है यह कहानी सिर्फ चार बच्चों की नहीं है, यह एक पूरे तंत्र की है – जब नेतृत्व संवेदनशील हो, प्रशासन सजग हो और समाज सहयोगी। ऐसे में कोई भी “राम” अपने अंधेरे वनवास से निकलकर अपने अयोध्या की ओर लौट सकता है।   हर राम को उसका अयोध्या मिल सकता है – अगर हम चाहें तो यह प्रेरक घटना हमें याद दिलाती है कि एक संवेदनशील समाज और उत्तरदायी व्यवस्था मिलकर वह बदलाव ला सकती है, जिसकी ज़रूरत आज हर ‘गुमनाम बचपन’ को है।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें