: संन्टू दादा ने निभाई इंसानियत — हादसे में घायल दो लोगों की बचाई जान
Barkat Qureshi / Tue, Jun 10, 2025 / Post views : 425
संन्टू दादा ने निभाई इंसानियत — हादसे में घायल दो लोगों की बचाई जान
डंपर और माजदा की भिड़ंत में एक की मौत, दो गंभीर घायल
संवाददाता : इस्हाक़ गौरी मूंदी पुनासा
सोमवार रात करीब 11 बजे पुनासा क्षेत्र के गुर्जरखेड़ी के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा डंपर और माजदा वाहन की आमने-सामने की टक्कर से हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद घायल वाहन में फंसे रहे और दर्जनों वाहन वहाँ से गुज़रते रहे, लेकिन किसी ने भी रुककर मदद नहीं की। ज़ख़्मी मदद के लिए तड़पते रहे और भीड़ मूकदर्शक बनी रही।
इसी दौरान समाजसेवी दिग्विजय सिंह तोमर उर्फ़ संन्टू दादा को घटना की सूचना मिली। उन्होंने तत्काल अपनी गाड़ी से घटनास्थल का रुख किया और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला। एंबुलेंस उपलब्ध न होने पर संन्टू दादा ने घायलों को अपनी निजी गाड़ी से पुनासा अस्पताल पहुँचाया और उनके परिजनों को भी सूचित किया।
पुनासा अस्पताल के डॉक्टर नरेंद्र चौधरी ने बताया कि यदि घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जाता, तो उनकी जान बचा पाना कठिन होता। उन्होंने संन्टू दादा की मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया की प्रशंसा की।
दीपक राठौर (फ़ीफ़री माल) ने बताया कि “संन्टू दादा को जैसे ही जानकारी मिली, वे तुरंत घटनास्थल पहुँचे और पूरी ज़िम्मेदारी से घायलों की मदद की।”
गजेन्द्र सिंह (बड़नगर) ने कहा कि “संन्टू दादा पूर्व में भी कई सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को अपने वाहन से अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचा चुके हैं। वे हमेशा हर आपात स्थिति में सबसे पहले पहुँचने वालों में रहते हैं।”
संन्टू दादा के इस कार्य की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि जहाँ अधिकतर लोग हादसे का वीडियो बनाकर वायरल करने में लगे रहते हैं, वहाँ संन्टू दादा जैसे लोग वाकई समाज में इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं।
संवाददाता : इस्हाक़ गौरी मूंदी पुनासा
सोमवार रात करीब 11 बजे पुनासा क्षेत्र के गुर्जरखेड़ी के पास एक दर्दनाक सड़क हादसे में एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा डंपर और माजदा वाहन की आमने-सामने की टक्कर से हुआ।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हादसे के बाद घायल वाहन में फंसे रहे और दर्जनों वाहन वहाँ से गुज़रते रहे, लेकिन किसी ने भी रुककर मदद नहीं की। ज़ख़्मी मदद के लिए तड़पते रहे और भीड़ मूकदर्शक बनी रही।
इसी दौरान समाजसेवी दिग्विजय सिंह तोमर उर्फ़ संन्टू दादा को घटना की सूचना मिली। उन्होंने तत्काल अपनी गाड़ी से घटनास्थल का रुख किया और स्थानीय ग्रामीणों की मदद से घायलों को वाहन से बाहर निकाला। एंबुलेंस उपलब्ध न होने पर संन्टू दादा ने घायलों को अपनी निजी गाड़ी से पुनासा अस्पताल पहुँचाया और उनके परिजनों को भी सूचित किया।
पुनासा अस्पताल के डॉक्टर नरेंद्र चौधरी ने बताया कि यदि घायलों को समय पर अस्पताल नहीं पहुँचाया जाता, तो उनकी जान बचा पाना कठिन होता। उन्होंने संन्टू दादा की मानवीय संवेदनशीलता और त्वरित प्रतिक्रिया की प्रशंसा की।
दीपक राठौर (फ़ीफ़री माल) ने बताया कि “संन्टू दादा को जैसे ही जानकारी मिली, वे तुरंत घटनास्थल पहुँचे और पूरी ज़िम्मेदारी से घायलों की मदद की।”
गजेन्द्र सिंह (बड़नगर) ने कहा कि “संन्टू दादा पूर्व में भी कई सड़क दुर्घटनाओं में घायलों को अपने वाहन से अस्पताल पहुँचाकर उनकी जान बचा चुके हैं। वे हमेशा हर आपात स्थिति में सबसे पहले पहुँचने वालों में रहते हैं।”
संन्टू दादा के इस कार्य की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। लोगों का मानना है कि जहाँ अधिकतर लोग हादसे का वीडियो बनाकर वायरल करने में लगे रहते हैं, वहाँ संन्टू दादा जैसे लोग वाकई समाज में इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं।विज्ञापन
विज्ञापन