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: हरदा में मुस्लिम तेली 53 गौत्र समाज की पहली इज्तेमाई शादी

Barkat Qureshi / Fri, May 30, 2025 / Post views : 242

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हरदा में मुस्लिम तेली 53 गौत्र समाज की पहली इज्तेमाई शादी 9 जोड़ों ने सादगी से कबूल किया निकाह, सामाजिक एकता और तहज़ीब की बनी मिसाल   संवाददाता: इम्तियाज़ गौरी, हरसूद हरदा में 25 मई शनिवार की शाम एक ऐतिहासिक लम्हा दर्ज हुआ — जब मुस्लिम तेली 53 गौत्र समाज की पहली इज्तेमाई शादी का आयोजन BRL अहद भाई गार्डन में निहायत सादगी, तहज़ीब और इत्तेहाद के साथ सम्पन्न हुआ। खेडा बस्ती और नवजवान कमेटी की सराहनीय पहल पर हुए इस आयोजन में समाज के 9 जोड़ों ने मग़रिब की नमाज़ के बाद इस्लामी रीति से निकाह कबूल किया।     ---   2,500 से अधिक समाजजन बने गवाह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, गुजरात सहित देश के विभिन्न कोनों से करीब 2,500 समाजबंधु इस पवित्र निकाह सम्मेलन में शामिल हुए। समारोह में मौजूद हर व्यक्ति की आंखों में खुशी और दिलों में दुआएं थीं।       समाज का उद्देश्य: फिजूलखर्ची नहीं, भाईचारा चाहिए सम्मेलन समिति के सदस्य इखलाख चौहान, हाजी रजाक चौहान, सरवर चौहान, अकरम चौहान, हाजी आजम चौहान, बिलाल गौरी, सिद्दीक़ गौरी समेत कई अन्य पदाधिकारियों ने बताया कि— “इस आयोजन का मूल उद्देश्य है फिजूलखर्ची पर रोक, दहेज प्रथा को खत्म करना और अमीरी-गरीबी का भेद मिटाकर सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना।”     ---   सम्मेलन में देशभर के गणमान्य समाजसेवी हुए शामिल इंदौर, खंडवा, बड़वानी, अहमदाबाद, काटकूट, मूंदी, खार आदि स्थानों से पधारे प्रमुख मेहमानों में मोहम्मद हनीफ पवार पटेल, हाजी सलीम जिन्द्ररान, हाजी नूर खत्री, इसराइल जाटू, फारूक तंवर, उमर फारूक, हाजी इकबाल सीगड़, हाजी शकूर स्टार, हाजी रफीक भाया जैसे प्रख्यात समाजसेवी प्रमुख रूप से शामिल रहे।     ---   अल्फ़ाज़ जो दिल में उतर गए   युसुफ बाबा चौहान (इंदौर): “यह सिर्फ़ शादी नहीं, इंसानियत और तहज़ीब की तस्वीर है — जहाँ दिखावा नहीं, सिर्फ़ दुआएं हैं।”   इसराइल जाटू (अहमदाबाद): “रिश्ते दौलत से नहीं, मोहब्बत से पलते हैं। बेटियाँ दहेज से नहीं, दुआओं से रुख़्सत होती हैं।”   हाजी रफीक भाया (खंडवा): “जहाँ बेटियों को इज्ज़त से विदा किया जाता है, वहाँ रहमतें बरसती हैं।”   गब्बर खत्री और इकबाल सीगड़: “आज जब शादियाँ दिखावे की दौड़ बन गई हैं, यह सादा तक़रीब एक इंकलाब है — जहाँ सिर्फ़ इज्ज़त की सौग़ात दी गई।”   हाजी सलीम निर्बान: “सामूहिक विवाह समाज में समरसता और पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक है।”       ---   व्यवस्थाएं रहीं उम्दा, हर पहलू में सराहना ख़्वातीन के लिए अलग हॉल, बेहतर खानपान, स्वच्छता, पार्किंग और मेहमानों के लिए विशेष प्रबंध किये गए। सभी नवविवाहित जोड़ों को एक जैसे गृह-उपयोगी सामान भी प्रदान किए गए, ताकि उनके नए जीवन की शुरुआत सम्मान और सुविधा के साथ हो।     ---   क़ाज़ी साहब ने पढ़ाया निकाह, बनी सामाजिक जागरूकता की मिसाल निकाह सम्मेलन न केवल धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि समाज में एक नयी सोच और मिसाल बनकर उभरा। बुज़ुर्गों की निगरानी और नवजवानों की मेहनत ने इसे एक यादगार आयोजन बना दिया।     ---   आयोजकों को सलाम, नवविवाहितों को दुआएं समापन पर सलामुद्दीन और यूसुफ खत्री (मूंदी) ने आयोजकों का शुक्रिया अदा करते हुए कहा — “हरदा खेडा के लोगों ने सिर्फ़ शादी नहीं कराई, बल्कि बेटियों को तहज़ीब, दुआओं और इज़्ज़त के साथ उनकी नयी दुनिया की ओर रवाना किया। यह सम्मेलन आने वाले वर्षों के लिए प्रेरणा रहेगा।”     ---   युवाओं से अपील: दहेज के खिलाफ आवाज़ उठाएं, सादगी को अपनाएं।

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