: "20 फीट पर बनी सहमति, बारिश के बाद हटेगा पूरा अतिक्रमण"
Barkat Qureshi / Wed, Jun 18, 2025 / Post views : 354
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"20 फीट पर बनी सहमति, बारिश के बाद हटेगा पूरा अतिक्रमण"
वल्लभ नगर में प्रशासनिक कार्रवाई से मची हलचल, इंसानियत पर उठा सवाल

संवाददाता – ईस्हाक गौरी मूंदी
मूंदी नगर में बीते कुछ दिनों से अतिक्रमण को लेकर चर्चाएं तेज़ थीं। बुधवार सुबह जब नगर परिषद मूंदी की टीम वल्लभ नगर में मुआवना करने पहुँची, तो वहां केवल दीवारें नहीं हिलीं — ज़िंदगियों की बुनियादें भी डगमगा गईं।
पूर्व में जारी नोटिसों के बाद, रहवासियों ने मान्धाता विधायक नारायण पटेल से हस्तक्षेप की अपील की थी। इसके बाद विधायक स्वयं नगर परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि चंद्रमोहन राठौर, सीएमओ संजय जैन, थाना मूंदी और परिषद टीम के साथ मौके पर पहुँचे।
✋ “हम गरीब हैं!” — प्रशासन से टकराईं आवाज़ें
प्रशासनिक अमले के पहुंचते ही बुज़ुर्ग, महिलाएं और छोटे बच्चों को गोद में लिए माताएं सामने आ गईं। चिंता और असमंजस हर चेहरे पर साफ झलक रहा था। उनकी पुकार थी:
"हम मेहनतकश गरीब हैं। हमारे पास पट्टे हैं। खुद की मेहनत से यह घर खड़ा किया है। अब जब बारिश आने वाली है — हम बच्चों को लेकर कहाँ जाएं?"
📜 वैध पट्टे... फिर भी कार्रवाई?
रहवासियों का कहना है कि उनके घर वैध पट्टों के आधार पर बने हैं, और उन्होंने निर्माण तत्कालीन 10 फीट चौड़ी सड़क को ध्यान में रखकर किया था। अब जब सड़क 20 फीट चौड़ी हो गयी है, तो उन्हें अतिक्रमणकारी घोषित कर नोटिस जारी किए जा रहे हैं।

उनकी मांग थी कि नपती सड़क के बीच से हो, ताकि उनकी वैधता साबित हो सके। लेकिन प्रशासन ने यह स्पष्ट किया कि माप बाहरी सीमा से 20 फीट तक होगी और उसी के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
📏 चूने की रेखा — उम्मीदों पर खिंची सफेद लकीर
दोपहर लगभग 3 बजे, नगर परिषद की टीम ने जब चूने की रेखा खींची, तो वह कई घरों के 10 से 15 फीट भीतर तक पहुँच गई। किसी की रसोई, तो किसी की मुख्य दीवार इस रेखा के भीतर आ गई। रहवासियों की आंखों में आशियाना उजड़ने का डर साफ झलकने लगा।
🤝 समझौता: चार दिन की मोहलत, मानसून के बाद कार्रवाई
बातचीत के दौरान सामाजिक कार्यकर्ता नहरू पटेल और कांग्रेस पार्षद प्रतिनिधि गौलू राठौर ने प्रशासन से मानवीय दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।
अंततः यह सहमति बनी कि:
✅ रहवासी चार दिन में स्वयं 20 फीट तक का अतिक्रमण हटाएंगे।
✅ पूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई मानसून के बाद, यानी चार माह बाद की जाएगी।
✅ यदि तय सीमा में अतिक्रमण नहीं हटाया गया, तो उसे बुलडोज़र से हटाया जाएगा।
🧡 "छत ले जाओगे, लेकिन विकल्प दोगे क्या?"
एक विधवा महिला ने रोते हुए सवाल उठाया:
"पति इस दुनिया में नहीं हैं। मजदूरी कर बच्चों को पाल रही हूं। आप छत तो ले जा रहे हो... मगर इन मासूमों के सिर पर नई छत दोगे क्या?"
📌 निष्कर्ष: यह केवल ज़मीन नहीं, इंसानियत की भी नपती थी
वल्लभ नगर में जो हुआ, वह सिर्फ अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही नहीं थी — यह प्रशासन की संवेदनशीलता, जनप्रतिनिधियों की ज़िम्मेदारी, और शासन की नीतियों की असल परीक्षा भी थी।
अब जब चार महीने बाद पूर्ण कार्रवाई होगी, तो सबसे बड़ा सवाल यही रहेगा:
🔹 क्या पुनर्वास की कोई ठोस योजना होगी?
🔹 क्या गरीबों को उजाड़ने की बजाय उन्हें नई उम्मीद भी दी जाएगी?
🗣️ “गरीबों को मत हटाओ, गरीबी हटाओ!”
यही आवाज़ आज वल्लभ नगर की गलियों से निकली — उम्मीद है, यह कहीं नीतियों के गलियारों तक भी पहुंचेगी।
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