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: आँखों के आंसू पानी के लिए निकल गये, थोड़ा सा पानी के लिए दम निकल गये   

Barkat Qureshi / Sun, May 18, 2025 / Post views : 298

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आँखों के आंसू पानी के लिए निकल गये, थोड़ा सा पानी के लिए दम निकल गये

  

हरदा से ब्यूरो चीफ गोपाल शुक्ला पानी के बिना जीवन की कल्पना करना असम्भव - नुक्क्ड़ नाटक "बस एक सावल" का प्रभावी मंचन जल है तो कल है, जल नहीं तो कल नहीं । जीवन और प्रकृति सम्पूर्ण रूप से पानी पर ही निर्भर है इसलिए जल को जीवन कहा गया है। पानी के बिना जीवन की कल्पना करना असम्भव है । पिछले कई वर्षों से पानी की कमी को निरंतर महसूस किया जा रहा है, जल संकट कल महासंकट न हो जाए, आज यह सोचने का वक्त आ गया है। इस विषय पर आधारित नुक्क्ड़ नाटक " बस एक सावल" का प्रभावी तोर पर प्रस्तुति दी गई। लोगो को जागरुकता हेतु भावपूर्ण चेतवानी का दर्पण देता नाटक ओर नाटक को जीवंत करते कलाकार वर्तमान ओर भविष्य की चिंता से रूबरू करता नाटक। नाटक में आँखों के आंसू पानी के लिए निकल गये, थोड़ा सा पानी के लिए दम निकल गये। का दृश्य लोगो को जागरूकता का संदेश देने में सफलतापूर्वक असर देता रहा। यह सत्य ही है कि पृथ्वी पर जल की उपलब्धता के कारण ही प्राणियों का अस्तित्व और पदार्थों में उपयोगिता का गुण कायम है, कहा भी जाता है- जल ही जीवन है। जल के बिना न तो मनुष्य का जीवन सम्भव है और न ही वह किसी कार्य को संचालित कर सकता है। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड हरदा द्वारा माननीय कलेक्टर महोदय के निर्देशानुसार एवं जिला समन्वयक संदीप गौहर, विकासखंड समन्वयक राकेश वर्मा के मार्गदर्शन में हरदा के परशुराम चौक,आई सी आई बैंक, शासकीय कॉलेज, बस स्टेण्ड, सहित नगर के मुख्य स्थानों पर जल गंगा संवर्धन अभियान के अंतर्गत जल संरक्षण को लेकर नुक्क्ड़ नाटक किया गया। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन परामर्शदाता सुरेंद्र सिंह चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर परामर्शदाता संजय ठाटे, जया साकल्ले, पारुल कशिव, दीनबंधु गौर, प्रहलाद नागवे, सीएमसीएलडीपी विधार्थी, नाटक कलाकार उपस्थित रहे। अंत में सभी को शपथ दिलाई गई।

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