: कांग्रेसीयों ने धूमधाम से मनाई डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती
Barkat Qureshi / Mon, Apr 14, 2025 / Post views : 282
कांग्रेसीयों ने धूमधाम से मनाई डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर जयंती
जय भीम के नारों से गूंजा मुंदी, विचारों के प्रति जताई प्रतिबद्धता
मुंदी। संविधान निर्माता, सामाजिक समता के प्रतीक और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती सोमवार को मुंदी में कांग्रेसजनों ने गरिमापूर्ण और जोशपूर्ण माहौल में मनाई। कार्यक्रम ने न केवल श्रद्धांजलि का रूप लिया, बल्कि बाबासाहेब के विचारों को पुनः जागृत करने का संकल्प भी बना।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। 'जय भीम' के गगनभेदी नारों ने वातावरण को ऊर्जा और सम्मान से भर दिया। यह आयोजन मात्र परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर मान्धाता विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर उत्तमपाल सिंह, नगर परिषद मुंदी के पूर्व अध्यक्ष लछमन, लोकेश राठौर, मनोहर पटेल, मितेश देसाई, राजू कानूगो,संदीप जैन, सेवक पटेल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने डॉ. आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल संविधान का निर्माण किया, बल्कि वंचितों, शोषितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आवाज़ दी। उन्होंने भारत को आत्म-सम्मान, अधिकार और न्याय का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर का यह ऐतिहासिक संदेश —
“मैं मूर्ति में नहीं, किताबों में हूँ; मुझे पूजने की नहीं, पढ़ने की जरूरत है” —
सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र बना। वक्ताओं ने इसे आज के दौर में और भी ज्यादा प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम के समापन पर 'बाबासाहेब अमर रहें', 'संविधान जिंदाबाद' और 'जय भीम' के नारों से पूरा मुंदी गूंज उठा।
लछमन पटेल ने कहा कि यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि यह संकल्प भी कि हम बाबासाहेब के विचारों को जीवन में उतारेंगे और उनके सपनों का समतामूलक भारत बनाएं
मुंदी। संविधान निर्माता, सामाजिक समता के प्रतीक और भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर की जयंती सोमवार को मुंदी में कांग्रेसजनों ने गरिमापूर्ण और जोशपूर्ण माहौल में मनाई। कार्यक्रम ने न केवल श्रद्धांजलि का रूप लिया, बल्कि बाबासाहेब के विचारों को पुनः जागृत करने का संकल्प भी बना।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबासाहेब की तस्वीर पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुई। 'जय भीम' के गगनभेदी नारों ने वातावरण को ऊर्जा और सम्मान से भर दिया। यह आयोजन मात्र परंपरा नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और वैचारिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया।
इस अवसर पर मान्धाता विधानसभा से कांग्रेस प्रत्याशी कुंवर उत्तमपाल सिंह, नगर परिषद मुंदी के पूर्व अध्यक्ष लछमन, लोकेश राठौर, मनोहर पटेल, मितेश देसाई, राजू कानूगो,संदीप जैन, सेवक पटेल सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, उपस्थित रहे।
वक्ताओं ने डॉ. आंबेडकर के योगदान को याद करते हुए कहा कि उन्होंने न केवल संविधान का निर्माण किया, बल्कि वंचितों, शोषितों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी आवाज़ दी। उन्होंने भारत को आत्म-सम्मान, अधिकार और न्याय का मार्ग दिखाया।
कार्यक्रम में डॉ. अंबेडकर का यह ऐतिहासिक संदेश —
“मैं मूर्ति में नहीं, किताबों में हूँ; मुझे पूजने की नहीं, पढ़ने की जरूरत है” —
सभी के लिए प्रेरणा का केंद्र बना। वक्ताओं ने इसे आज के दौर में और भी ज्यादा प्रासंगिक बताया।
कार्यक्रम के समापन पर 'बाबासाहेब अमर रहें', 'संविधान जिंदाबाद' और 'जय भीम' के नारों से पूरा मुंदी गूंज उठा।
लछमन पटेल ने कहा कि यह आयोजन न केवल श्रद्धा का प्रतीक था, बल्कि यह संकल्प भी कि हम बाबासाहेब के विचारों को जीवन में उतारेंगे और उनके सपनों का समतामूलक भारत बनाएंविज्ञापन
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