: किसान कांग्रेस ने खाद संकट पर सरकार को घेरा, दी आंदोलन की चेतावनी
Barkat Qureshi / Sun, Jun 29, 2025 / Post views : 423
किसान कांग्रेस ने खाद संकट पर सरकार को घेरा, दी आंदोलन की चेतावनी
संवाददाता ईस्हाक गौरी मूंदी
ग्रीष्मकालीन फसल के बाद अब खरीफ सीजन की बुआई का समय आ चुका है। इस मौसम में कपास, मिर्च जैसी नकदी फसलें किसानों के लिए लाभदायक होती हैं, लेकिन इस बार प्राकृतिक चुनौतियों के साथ खाद की भारी कमी किसानों की बड़ी चिंता बन गई है।
इसी गंभीर समस्या को लेकर किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस ग्रामीण खंडवा के महामंत्री गजेंद्र सिंह सोलंकी ने सरकार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
खाद की भारी कमी, समितियों के चक्कर काटते किसान
श्री सोलंकी ने कहा कि इस समय किसानों को DAP और यूरिया खाद की बेहद ज़रूरत है, लेकिन सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है।
“किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही, वे सहकारी समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे बुआई लेट हो रही है, और फसल पर सीधा असर पड़ेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं और चना की खरीदी के दौरान वसूली तो की गई, लेकिन अब उन्हें खाद समय पर नहीं दी जा रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि"यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो किसान कांग्रेस किसानों के साथ सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर होगी,"
अमेरिका से संभावित व्यापार समझौते (FTA) पर जताई चिंता
गजेंद्र सिंह सोलंकी ने सरकार द्वारा अमेरिका से संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि:
"देश में पहले से ही अनाज की पर्याप्त उपलब्धता है, फिर भी अगर अमेरिका से अनाज आयात किया गया, तो भारतीय किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा।"
उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसे नुकसानदेह समझौते को रोके और पुराने व्यापार समझौतों की समीक्षा करके किसानों के हित में निर्णय ले।
श्री सोलंकी की प्रमुख मांगें:
✅ किसानों को खाद की तत्काल आपूर्ति
✅ पूर्व वसूली के अनुसार खाद वितरण में प्राथमिकता
✅ अमेरिका के साथ FTA पर रोक
✅ कृषि से जुड़े निर्णयों में किसानों की भागीदारी
✅ पुराने व्यापार समझौतों की समीक्षा
📢 किसान कांग्रेस ने चेताया है कि यदि खाद की व्यवस्था तुरंत नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में ज़ोरदार आंदोलन होगा।
सरकार अब भी समय रहते चेते — यही किसान की पुकार है।
संवाददाता ईस्हाक गौरी मूंदी
ग्रीष्मकालीन फसल के बाद अब खरीफ सीजन की बुआई का समय आ चुका है। इस मौसम में कपास, मिर्च जैसी नकदी फसलें किसानों के लिए लाभदायक होती हैं, लेकिन इस बार प्राकृतिक चुनौतियों के साथ खाद की भारी कमी किसानों की बड़ी चिंता बन गई है।
इसी गंभीर समस्या को लेकर किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस ग्रामीण खंडवा के महामंत्री गजेंद्र सिंह सोलंकी ने सरकार को पत्र लिखकर तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
खाद की भारी कमी, समितियों के चक्कर काटते किसान
श्री सोलंकी ने कहा कि इस समय किसानों को DAP और यूरिया खाद की बेहद ज़रूरत है, लेकिन सहकारी समितियों में पर्याप्त मात्रा में खाद उपलब्ध नहीं है।
“किसानों को समय पर खाद नहीं मिल रही, वे सहकारी समितियों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। इससे बुआई लेट हो रही है, और फसल पर सीधा असर पड़ेगा।”
उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं और चना की खरीदी के दौरान वसूली तो की गई, लेकिन अब उन्हें खाद समय पर नहीं दी जा रही है।
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि"यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो किसान कांग्रेस किसानों के साथ सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर होगी,"
अमेरिका से संभावित व्यापार समझौते (FTA) पर जताई चिंता
गजेंद्र सिंह सोलंकी ने सरकार द्वारा अमेरिका से संभावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) पर भी कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना है कि:
"देश में पहले से ही अनाज की पर्याप्त उपलब्धता है, फिर भी अगर अमेरिका से अनाज आयात किया गया, तो भारतीय किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य नहीं मिलेगा।"
उन्होंने मांग की कि सरकार ऐसे नुकसानदेह समझौते को रोके और पुराने व्यापार समझौतों की समीक्षा करके किसानों के हित में निर्णय ले।
श्री सोलंकी की प्रमुख मांगें:
✅ किसानों को खाद की तत्काल आपूर्ति
✅ पूर्व वसूली के अनुसार खाद वितरण में प्राथमिकता
✅ अमेरिका के साथ FTA पर रोक
✅ कृषि से जुड़े निर्णयों में किसानों की भागीदारी
✅ पुराने व्यापार समझौतों की समीक्षा
📢 किसान कांग्रेस ने चेताया है कि यदि खाद की व्यवस्था तुरंत नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में ज़ोरदार आंदोलन होगा।
सरकार अब भी समय रहते चेते — यही किसान की पुकार है।विज्ञापन
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