: खंडवा के सामाजिक कार्यकर्ता अय्यूब लाला ने दाधीच पार्क तोड़ने पर जताया कड़ा विरोध, कलेक्टर से की न्याय की मांग
Barkat Qureshi / Tue, May 13, 2025 / Post views : 288
खंडवा के सामाजिक कार्यकर्ता अय्यूब लाला ने दाधीच पार्क तोड़ने पर जताया कड़ा विरोध, कलेक्टर से की न्याय की मांग
संवाददाता – इस्हाक गौरी, मूंदी
खंडवा। शहर की आत्मा कहे जाने वाले दाधीच पार्क को लेकर विवादों की चिंगारी अब शोला बनती जा रही है। नगर निगम द्वारा पार्क को अवैध रूप से तोड़ने और सार्वजनिक भावनाओं की उपेक्षा करने पर जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अय्यूब लाला ने मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई।
लाला ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और जनहित में संवाद किए बिना पार्क को मिट्टी में मिला दिया। यह वही दाधीच पार्क है, जहाँ कभी बच्चों की हँसी गूंजती थी, बुजुर्गों की परछाइयाँ छाँव में टिकती थीं, और शहर की संस्कृति साँस लेती थी।
शिकायत में कहा गया है कि निगम ने 2015 की यातायात सुरक्षा समिति के निर्णय की आड़ लेकर मल्टीलेवल पार्किंग की योजना दर्शाई, लेकिन आज तक वहाँ अवैध अतिक्रमण बना हुआ है, जिसे हटाने की कोई ईमानदार कोशिश नहीं हुई।
अय्यूब लाला ने कहा कि बगीचा हटाकर अस्थायी पार्किंग बना दी गई, पर उससे होने वाली आय भी निगम कोष में जमा नहीं की गई, जिससे न सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार की बू आती है, बल्कि जनता के अधिकारों की सीधी अनदेखी भी स्पष्ट होती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह भूमि ग्रीन बेल्ट में आती है — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, न भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई, न ही पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि पार्क से हटाई गई मूर्तियाँ, लोहे की जालियाँ और भंगार की वस्तुएँ कहाँ गईं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह सार्वजनिक संपत्ति की खुली लूट जैसा प्रतीत होता है।
लाला ने पीड़ा भरे स्वर में कहा कि जिस मूर्ति को कभी खंडवा के लोकप्रिय जनसेवक स्वर्गीय रायचंद नागड़ा जी ने स्थापित कराया था, उसे हटाकर उनका अपमान किया गया है। यह सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि पूरे शहर की स्मृति और आत्मा का अपमान है।
अंत में अय्यूब लाला ने प्रशासन से तीन प्रमुख माँगें रखीं:
1. दाधीच पार्क की भूमि से अवैध अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए,
2. आर्थिक क्षति और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
3. और इस ऐतिहासिक स्थल को पुनः हराभरा एवं सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देकर, एक सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए।
उन्होंने इस मुद्दे पर प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की है
संवाददाता – इस्हाक गौरी, मूंदी
खंडवा। शहर की आत्मा कहे जाने वाले दाधीच पार्क को लेकर विवादों की चिंगारी अब शोला बनती जा रही है। नगर निगम द्वारा पार्क को अवैध रूप से तोड़ने और सार्वजनिक भावनाओं की उपेक्षा करने पर जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता अय्यूब लाला ने मंगलवार को जनसुनवाई में कलेक्टर के समक्ष गंभीर आरोपों के साथ शिकायत दर्ज कराई।
लाला ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि नगर निगम ने बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया और जनहित में संवाद किए बिना पार्क को मिट्टी में मिला दिया। यह वही दाधीच पार्क है, जहाँ कभी बच्चों की हँसी गूंजती थी, बुजुर्गों की परछाइयाँ छाँव में टिकती थीं, और शहर की संस्कृति साँस लेती थी।
शिकायत में कहा गया है कि निगम ने 2015 की यातायात सुरक्षा समिति के निर्णय की आड़ लेकर मल्टीलेवल पार्किंग की योजना दर्शाई, लेकिन आज तक वहाँ अवैध अतिक्रमण बना हुआ है, जिसे हटाने की कोई ईमानदार कोशिश नहीं हुई।
अय्यूब लाला ने कहा कि बगीचा हटाकर अस्थायी पार्किंग बना दी गई, पर उससे होने वाली आय भी निगम कोष में जमा नहीं की गई, जिससे न सिर्फ आर्थिक भ्रष्टाचार की बू आती है, बल्कि जनता के अधिकारों की सीधी अनदेखी भी स्पष्ट होती है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह भूमि ग्रीन बेल्ट में आती है — एक ऐसा क्षेत्र जहाँ निर्माण पूरी तरह प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, न भूमि उपयोग परिवर्तन की अनुमति ली गई, न ही पर्यावरणीय प्रभाव का मूल्यांकन किया गया।
उन्होंने यह भी बताया कि पार्क से हटाई गई मूर्तियाँ, लोहे की जालियाँ और भंगार की वस्तुएँ कहाँ गईं, इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। यह सार्वजनिक संपत्ति की खुली लूट जैसा प्रतीत होता है।
लाला ने पीड़ा भरे स्वर में कहा कि जिस मूर्ति को कभी खंडवा के लोकप्रिय जनसेवक स्वर्गीय रायचंद नागड़ा जी ने स्थापित कराया था, उसे हटाकर उनका अपमान किया गया है। यह सिर्फ मूर्ति नहीं, बल्कि पूरे शहर की स्मृति और आत्मा का अपमान है।
अंत में अय्यूब लाला ने प्रशासन से तीन प्रमुख माँगें रखीं:
1. दाधीच पार्क की भूमि से अवैध अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए,
2. आर्थिक क्षति और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए,
3. और इस ऐतिहासिक स्थल को पुनः हराभरा एवं सौंदर्यपूर्ण स्वरूप देकर, एक सांस्कृतिक विरासत स्थल के रूप में पुनर्स्थापित किया जाए।
उन्होंने इस मुद्दे पर प्रशासन ने शीघ्र कार्रवाई की मांग की हैविज्ञापन
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