: तत्काल मूंग खरीदी की MSP पर घोषणा करे सरकार: किसान कांग्रेस
Barkat Qureshi / Mon, May 12, 2025 / Post views : 289
तत्काल मूंग खरीदी की MSP पर घोषणा करे सरकार: किसान कांग्रेस
संवाददाता – इस्हाक़ गौरी, मुंदी
पीली पड़ गई फसलें, बुझ गई उम्मीदें — किसान बेहाल, सरकार खामोश
इस बार खेतों में न हरियाली है, न खुशी। बेमौसम बारिश, तेज़ हवाओं और पीले मोजेक (पिला मो) बीमारी ने ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को तबाह कर दिया है। पीली पत्तियां और दानों से खाली फलियां किसान की मेहनत पर करारी चोट की तरह हैं। हालात ऐसे हैं कि खेत देखने जाते किसान की आंखें नम हो जाती हैं।
इस संकट के बीच अब तक सरकार की ओर से मूंग की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की घोषणा नहीं हुई है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
“अगर अब भी सरकार ने आंखें नहीं खोली, तो अगली फसल का बीज भी खेत में नहीं बोया जा सकेगा” — गजेंद्र सोलंकी
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस ग्रामीण खंडवा महामंत्री गजेंद्र सोलंकी ने मुंदी क्षेत्र में किसानों के साथ खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बीमारी के कारण फलियों में दाना ही नहीं बन पाया है। लागत निकलना तो दूर, अब तो खेतों में मेहनत भी राख हो चुकी है।
तीन प्रमुख माँगें सरकार से:
1. मूंग की खरीदी हेतु तत्काल MSP की घोषणा की जाए और पंजीयन शुरू किया जाए।
2. कृषि विभाग द्वारा पीले मोजेक से बचाव की दवा व सलाह किसानों को तुरंत दी जाए।
3. नुकसान झेल रहे किसानों को विशेष राहत पैकेज प्रदान किया जाए।
किसान की आंखों में आंसू, खेत में सूनी लकीरें
एक बुज़ुर्ग किसान ने बताया, “तीन महीने की मेहनत में कुछ नहीं निकला। बेटे की पढ़ाई और बेटी की शादी कैसे होगी?” वहीं एक महिला किसान ने कहा, “अब घर चलाना मुश्किल है, अगले सीजन के लिए खाद-बीज कहाँ से लाएं?”
ज्ञात हो कि मूंग इस क्षेत्र में सोयाबीन और गेहूं के बाद तीसरी सबसे प्रमुख नगदी फसल बन चुकी है। इस बार बड़े रकबे में इसकी बुआई हुई थी, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं ने सारे सपनों को मुरझा दिया।
किसान कांग्रेस ने सरकार से अपील की है कि वह इस संकट को गंभीरता से लेकर तुरंत ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों की मेहनत और भविष्य दोनों बचाए जा सकें।
संवाददाता – इस्हाक़ गौरी, मुंदी
पीली पड़ गई फसलें, बुझ गई उम्मीदें — किसान बेहाल, सरकार खामोश
इस बार खेतों में न हरियाली है, न खुशी। बेमौसम बारिश, तेज़ हवाओं और पीले मोजेक (पिला मो) बीमारी ने ग्रीष्मकालीन मूंग की फसल को तबाह कर दिया है। पीली पत्तियां और दानों से खाली फलियां किसान की मेहनत पर करारी चोट की तरह हैं। हालात ऐसे हैं कि खेत देखने जाते किसान की आंखें नम हो जाती हैं।
इस संकट के बीच अब तक सरकार की ओर से मूंग की समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीदी की घोषणा नहीं हुई है, जिससे किसानों में भारी आक्रोश है।
“अगर अब भी सरकार ने आंखें नहीं खोली, तो अगली फसल का बीज भी खेत में नहीं बोया जा सकेगा” — गजेंद्र सोलंकी
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस ग्रामीण खंडवा महामंत्री गजेंद्र सोलंकी ने मुंदी क्षेत्र में किसानों के साथ खेतों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि बीमारी के कारण फलियों में दाना ही नहीं बन पाया है। लागत निकलना तो दूर, अब तो खेतों में मेहनत भी राख हो चुकी है।
तीन प्रमुख माँगें सरकार से:
1. मूंग की खरीदी हेतु तत्काल MSP की घोषणा की जाए और पंजीयन शुरू किया जाए।
2. कृषि विभाग द्वारा पीले मोजेक से बचाव की दवा व सलाह किसानों को तुरंत दी जाए।
3. नुकसान झेल रहे किसानों को विशेष राहत पैकेज प्रदान किया जाए।
किसान की आंखों में आंसू, खेत में सूनी लकीरें
एक बुज़ुर्ग किसान ने बताया, “तीन महीने की मेहनत में कुछ नहीं निकला। बेटे की पढ़ाई और बेटी की शादी कैसे होगी?” वहीं एक महिला किसान ने कहा, “अब घर चलाना मुश्किल है, अगले सीजन के लिए खाद-बीज कहाँ से लाएं?”
ज्ञात हो कि मूंग इस क्षेत्र में सोयाबीन और गेहूं के बाद तीसरी सबसे प्रमुख नगदी फसल बन चुकी है। इस बार बड़े रकबे में इसकी बुआई हुई थी, लेकिन प्राकृतिक आपदाओं ने सारे सपनों को मुरझा दिया।
किसान कांग्रेस ने सरकार से अपील की है कि वह इस संकट को गंभीरता से लेकर तुरंत ठोस कदम उठाए, ताकि किसानों की मेहनत और भविष्य दोनों बचाए जा सकें।विज्ञापन
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