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: धूमधाम,श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया सुहागिनों का गणगौर पर्व, नम आखो से दी माता को विदाई

Barkat Qureshi / Thu, Apr 3, 2025 / Post views : 194

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धूमधाम,श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया सुहागिनों का गणगौर पर्व, नम आखो से दी माता को विदाई निमाड में गणगौर का पर्व बडे श्रद्धा और उत्साह से मनाया जा रहा है। इस मौके पर घरों और मंदिरों में महिलाए ने गणगौर और ईसरजी की प्रतिमाओं की पूजा कर रही है साथ ही गणगौर माता को मेहंदी, हल्दी, ज्वारे चुनरी भेंट कर मैदा आटे के बने मीठे तीखे गुणे का भोग लगाया जा रहा है । श्रृंगार के प्रतीक इस त्यौहार पर महिलाओं ने समूह बनाकर गणगौर माता के गीत भी गाए। हाथ में पूजा की थाली लिए और सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने गणगौर माता की पूजा अर्चना कर पति की लंबी उम्र और समृद्वि लिए प्रार्थना की। मूंदी में भी गणगौर पर्व बडे ही श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। मूंदी के समाजसेवी लक्ष्मीचंद बाराड द्वारा इस अवसर पर भागवत कथा का आयोजन किया। कलश य़ात्रा निकाली गयी ओर भागवत कथा के अंतिम दिन 2 अप्रेल को यजमान लक्ष्मीचंद बाराड की ओर से भण्डारा प्रसादी का आयोजन किया गया जिसमे लगभग 12000/—से अधिक हिन्दु, मुस्लिम श्रद्धालुओ ने भोजन प्रसादी का लाभ लिया। इस अवसर पर मुस्लिम समाज जन आसिफ मलिक, सलामू खतरी, अब्दुल कययुम,रियाज खतरी सहित ने लक्ष्मीचंद बारड के निवास स्थान पर पहुॅच कर बधाईया व शुभकामनाए प्रेषित की। मंगलवार को गणगोर रथो को गणगोर भक्त लक्षमीचंद बाराड एवं सामाजिक बंधुओ ने मानमनवार कर बडी ही श्रद्धा से अपने घर ले गये। बुधवार शाम को रथ बौड़ाने वाले भक्त लख्मीचंद गुर्जर के निवास से ढोल-ढमाके के साथ रथों का काफिला 12 हजार भक्तों के साथ गणगौर चौक पहुंचा। माता की विदाई में झालरिया गीतों पर मातृ शक्ति ने गरबा किया और बच्चे जमकर झूमे। ओर नम आखो माता के जवारों को गले लगाकर मढ़ी में विसर्जन किया। इस अवसर पर पंडित श्री पंकज मामा डोगरे, अंटु शर्मा,दिनेश मालवीय ने बताया कि गणगौर देवी, देवियों की महादेवी है। वह समग्र लोक की भक्ति को आलोकित करने वाली परम शक्ति है। गणगौर माता लौकिक के साथ साथ अलौकिक देवी भी है। सम्पूर्ण निमाड़ में गणगौर माता को सर्वोच्च सम्मान और प्रतिष्ठा प्राप्त है। निमाड़ में माता का अनुष्ठान पर्व नौ-दस दिनों तक उमंग और हर्सौल्लास से मनाया जाता है। शिक्षक सीताराम मालाकर, समाज सेवी नाहरू पटेल ने बताया कि पौराणिक कथाओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तप किया था। उनके कठोर तप से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया। यह पर्व माता गौरी की उसी कठोर साधना और उनके सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए इस दिन महिलाएं विशेष रूप से मां गौरी की पूजा करके अपने पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। सांसद प्रतिनिधि चंद्र मोहन राठौर ने गणगौर पर्व के समापन पर अच्छी व्यवस्था के लिए सीएमओ संजय जैन व उनकी टीम, पुलिस प्रशासन एवं नगर वासियों का आभार व्यक्त किया।

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