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: बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर आत्मिक यात्रा

Barkat Qureshi / Sat, May 24, 2025 / Post views : 304

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ब्रह्माकुमारी समर कैंप: बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ओर आत्मिक यात्रा जहाँ संस्कारों की छांव है, वहाँ आत्मबल का सूरज उगता है संवाददाता: इस्हाक़ गौरी | मूंदी गर्मी की तपती दोपहरें जब बच्चों की रचनात्मकता को सुस्त करने लगती हैं, तब प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, मूंदी की ओर से एक प्रेरणास्पद प्रयास सामने आया है — तीन दिवसीय नि:शुल्क समर कैंप, जो बच्चों को केवल खेलों में नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों और आत्मिक ऊर्जा में भी सशक्त बनाने का कार्य करेगा।   24 मई (शनिवार) से 26 मई (सोमवार) तक प्रातः 8:00 से 10:00 बजे तक स्थान: पुराने थाने के सामने, वॉलीबॉल ग्राउंड, मूंदी कक्षा: 5वीं से 10वीं तक के विद्यार्थियों के लिए   “यह शिविर नहीं, एक आत्मिक पाठशाला है” बच्चों को यहाँ खेल, चित्रकला, नृत्य, कविता और कहानी लेखन जैसी रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। साथ ही उन्हें राजयोग ध्यान, आत्म-संयम, प्रार्थना और नैतिक मूल्यों की शिक्षा भी दी जाएगी – जिससे वे जीवन भर के लिए प्रेरणा पा सकें।   बीके दीदियाँ बच्चों को कमेंट्री योग के माध्यम से यह सिखाएँगी कि कैसे परमात्मा शिव से आत्मा का संबंध जोड़ा जा सकता है। उन्हें बताया जाएगा कि सच्ची शक्ति मोबाइल में नहीं, मौन में है; और सच्चा ज्ञान मशीन में नहीं, आत्मा में है।   “अब बच्चों को केवल किताबी नहीं, आत्मिक ज्ञान की ज़रूरत है” – लोकेश राठौर   समाजसेवी लोकेश राठौर ने इस शिविर की सराहना करते हुए कहा – "आज के समय में बच्चों को केवल स्कूल की शिक्षा नहीं, जीवन की दिशा चाहिए। यह शिविर एक वरदान है, जो बच्चों को भीतर से सशक्त और तनावमुक्त बनाता है।" उन्होंने और दीदियों ने अभिभावकों से अपील करते हुए कहा – "यह शिविर केवल समय बिताने का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा को निखारने और जीवन को संवारने की एक आध्यात्मिक यात्रा है। तीन दिन बच्चों की सोच और जीवन की दिशा दोनों बदल सकते हैं।" “हमारा लक्ष्य है श्रीकृष्ण और श्रीराधा जैसे गुणवान बनाना” – बीके दीदी   संस्था प्रभारी बीके दीदी ने कहा – "स्कूल जहाँ डॉक्टर और इंजीनियर बनाते हैं, वहीं ब्रह्माकुमारी विश्वविद्यालय आत्मा को दिव्य बनाता है। हम बच्चों को श्रीकृष्ण जैसे दैवीय गुणों से सुसज्जित करने का प्रयास करते हैं। यही इस शिविर का मुख्य उद्देश्य है।"   उन्होंने कहा – "जैसे पौधे को उसकी कोमल अवस्था में जिस दिशा में मोड़ते हैं, वह उसी दिशा में बढ़ता है; वैसे ही बच्चों को आज जो ऊर्जा, वातावरण और संस्कार दिए जाएँगे, वही उनके जीवन की दिशा तय करेंगे।"     ---   एक संस्कारी बालक ही, एक सशक्त समाज की नींव होता है   इसलिए सभी अभिभावकों से करबद्ध निवेदन है – अपने बच्चों को इस दिव्य अवसर से वंचित न करें। यह केवल तीन दिन नहीं, बल्कि एक जीवन बदल देने वाला अनुभव है।

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