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: मनरेगा में बड़ा घोटाला उजागर: सिहाड़ा पंचायत में फर्जी जॉबकार्ड का मामला, जनसुनवाई में दर्ज हुईं 72 शिकायतें, कलेक्टर सभाकक्ष बना न्याय का मंच

Barkat Qureshi / Tue, Apr 15, 2025 / Post views : 160

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मनरेगा में बड़ा घोटाला उजागर: सिहाड़ा पंचायत में फर्जी जॉबकार्ड का मामला, जनसुनवाई में दर्ज हुईं 72 शिकायतें, कलेक्टर सभाकक्ष बना न्याय का मंच मंगलवार, 15 अप्रैल 2025 को कलेक्टर कार्यालय सभाकक्ष में आयोजित जनसुनवाई कार्यक्रम एक बार फिर प्रशासनिक जवाबदेही और संवेदनशीलता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा। अपर कलेक्टर श्री के.आर. बड़ोले की अध्यक्षता में आयोजित इस जनमंच पर नागरिकों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार हुआ और कई मामलों में मौके पर ही कार्रवाई के निर्देश दिए गए।   सिहाड़ा पंचायत में मनरेगा घोटाले की गूंज जनसुनवाई के दौरान उस समय सन्नाटा छा गया, जब खंडवा निवासी अय्यूब लाला ने ग्राम पंचायत सिहाड़ा में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत फर्जी जॉबकार्ड बनाए जाने और योजनाबद्ध ढंग से सरकारी राशि के गबन का आरोप लगाया। इस आरोप ने कार्यक्रम की दिशा ही बदल दी। अपर कलेक्टर श्री बड़ोले ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को तत्काल प्राथमिकता पर जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने दो टूक कहा, "शासन की योजनाओं में इस प्रकार की अनियमितताओं को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" सीमांकन, कब्जा और मुआवज़ा – जमीन से जुड़ी समस्याओं का बोलबाला ग्राम बेड़ाढाना दोगालिया निवासी मंशाराम ने अपनी कृषि भूमि के संयुक्त सीमांकन की मांग की, जिस पर तहसीलदार खालवा को स्थल निरीक्षण कर शीघ्र आवश्यक कार्रवाई के आदेश दिए गए। वहीं ग्राम चिचली खुर्द के मांगीलाल ने भूमि पर जबरन कब्जे की शिकायत की। इस पर मूंदी तहसीलदार को जांच कर न्यायोचित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।   आर्थिक त्रासदी की पुकार ने भिगोईं आंखें ग्राम चमाटी की सोनीबाई सैन ने जनसुनवाई में भावुक होते हुए बताया कि कैसे उनके पति की गंभीर बीमारी के इलाज के दौरान मृत्यु हो गई और अब परिवार आर्थिक संकट से जूझ रहा है। इस पर श्रम विभाग को संबल योजना के तहत पात्रता परीक्षण कर सहायता उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए। ग्राम अमलपुरा की सीमाबाई ने अपने पति की करंट लगने से हुई दुखद मृत्यु के बाद मुआवज़े की मांग की। इस पर एमपीईबी को तत्काल जांच कर सहायता प्रदान करने का निर्देश दिया गया।   72 प्रकरणों पर सुनवाई, जनता को मिली राहत की उम्मीद इस दिन कुल 72 आवेदनों पर सुनवाई की गई, जिनमें से अनेक मामलों में त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए। कार्यक्रम में संयुक्त कलेक्टर, एसडीएम, जनपद सीईओ सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।   निष्कर्ष: इस जनसुनवाई ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि जनता अपनी बात कहने का साहस रखे और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभाए, तो व्यवस्था में पारदर्शिता और न्याय की उम्मीद जिंदा रखी जा सकती है।

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