: मूंदी के रोमन कैथोलिक चर्च में गूंजा श्रद्धा का सन्नाटा, गुड फ्रायडे पर प्रेम और बलिदान के स्वरूप को समर्पित हुआ मौन
Barkat Qureshi / Sat, Apr 19, 2025 / Post views : 277
मूंदी के रोमन कैथोलिक चर्च में गूंजा श्रद्धा का सन्नाटा, गुड फ्रायडे पर प्रेम और बलिदान के स्वरूप को समर्पित हुआ मौन
रिपोर्ट: ईस्हाक गौरी, मूंदी
18 अप्रैल, शुक्रवार। एक दिन जब समय कुछ पल के लिए ठहर-सा गया, जब पूरी दुनिया के साथ मूंदी नगर भी एक गहन मौन में डूब गया। गुड फ्रायडे — वह पुण्य शुक्रवार, जब प्रेम ने क्रूस को अपनाया, और एक करुणामयी आत्मा ने संपूर्ण मानवता के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिए।
सुबह होते ही मूंदी के रोमन कैथोलिक चर्च का प्रांगण एक पवित्र शांति से भर गया था। चर्च की घंटियाँ जैसे किसी दिव्य धुन में हर दिल को पुकार रही थीं — चलो, उस क्षण को याद करें जब प्रभु यीशु ने अपने कंधों पर संसार के पाप उठाकर, प्रेम की पराकाष्ठा को जी लिया।
यह दिन कोई पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को झकझोर देने वाला एक तप है। एक ऐसा दिन, जब हर सांस, हर प्रार्थना, और हर मौन — प्रेम, क्षमा और बलिदान की परिभाषा बन जाता है।
चर्च में विशेष प्रार्थनाएँ हुईं। बाइबिल की वाणी जब गुंजायमान हुई, तो मानो हर शब्द आत्मा के भीतर उतरने लगा। प्रभु यीशु के वे अंतिम वचन — "हे प्रभु, इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं" — जैसे हवा में तैरते रहे, और हर आंख में नमी बनकर उतर आए।
शाम तीन बजे, जैसे ही उस क्षण की स्मृति आई जब प्रभु ने अंतिम सांस ली, चर्च की मोमबत्तियाँ एक-एक कर बुझा दी गईं। चारों ओर पसरा वह सन्नाटा, शब्दों से परे था — वह एक ऐसी पुकार थी, जो सीधे आत्मा से संवाद करती थी।
डॉ. डेविड तिर्की ने इस अवसर पर कहा, “गुड फ्रायडे कोई धर्म विशेष का दिन नहीं है — यह समूचे मानव समाज के लिए एक संदेश है। एक ऐसा सन्देश, जिसमें प्रेम, करुणा और क्षमा की शक्ति हर अंधकार को परास्त कर सकती है। प्रभु यीशु ने यही सिखाया कि सत्य का मार्ग चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, वह सबसे उज्ज्वल होता है।”
और इस दिन उपवास रखा गया। मीठी रोटियाँ बनीं — जिनकी मिठास केवल स्वाद में नहीं, बल्कि स्मृति में थी। स्मृति उस प्रेम की, जो ईश्वर ने हमें निःस्वार्थ दिया।
चर्च के हर कोने में मौन, हर मोमबत्ती की लौ में संकल्प था — कि हम भी अपने जीवन में उस प्रकाश की ओर चलें, जो प्रेम, क्षमा और बलिदान से जन्म लेता है।
गुड फ्रायडे, भले ही एक शोक का दिन हो, पर इसकी छांव में वह रौशनी छिपी है, जो पुनरुत्थान की ओर ले जाती है। जब प्रभु मृत्यु पर विजय पाकर लौटे, तो साथ में लाए थे एक अमर संदेश — कि प्रेम कभी हारता नहीं। यही गुड फ्रायडे की आत्मा है। और यही आत्मा आज मूंदी की हर धड़कन में महसूस कर रही है
रिपोर्ट: ईस्हाक गौरी, मूंदी
18 अप्रैल, शुक्रवार। एक दिन जब समय कुछ पल के लिए ठहर-सा गया, जब पूरी दुनिया के साथ मूंदी नगर भी एक गहन मौन में डूब गया। गुड फ्रायडे — वह पुण्य शुक्रवार, जब प्रेम ने क्रूस को अपनाया, और एक करुणामयी आत्मा ने संपूर्ण मानवता के लिए अपने प्राण अर्पित कर दिए।
सुबह होते ही मूंदी के रोमन कैथोलिक चर्च का प्रांगण एक पवित्र शांति से भर गया था। चर्च की घंटियाँ जैसे किसी दिव्य धुन में हर दिल को पुकार रही थीं — चलो, उस क्षण को याद करें जब प्रभु यीशु ने अपने कंधों पर संसार के पाप उठाकर, प्रेम की पराकाष्ठा को जी लिया।
यह दिन कोई पर्व नहीं, बल्कि आत्मा को झकझोर देने वाला एक तप है। एक ऐसा दिन, जब हर सांस, हर प्रार्थना, और हर मौन — प्रेम, क्षमा और बलिदान की परिभाषा बन जाता है।
चर्च में विशेष प्रार्थनाएँ हुईं। बाइबिल की वाणी जब गुंजायमान हुई, तो मानो हर शब्द आत्मा के भीतर उतरने लगा। प्रभु यीशु के वे अंतिम वचन — "हे प्रभु, इन्हें क्षमा करना, क्योंकि ये नहीं जानते ये क्या कर रहे हैं" — जैसे हवा में तैरते रहे, और हर आंख में नमी बनकर उतर आए।
शाम तीन बजे, जैसे ही उस क्षण की स्मृति आई जब प्रभु ने अंतिम सांस ली, चर्च की मोमबत्तियाँ एक-एक कर बुझा दी गईं। चारों ओर पसरा वह सन्नाटा, शब्दों से परे था — वह एक ऐसी पुकार थी, जो सीधे आत्मा से संवाद करती थी।
डॉ. डेविड तिर्की ने इस अवसर पर कहा, “गुड फ्रायडे कोई धर्म विशेष का दिन नहीं है — यह समूचे मानव समाज के लिए एक संदेश है। एक ऐसा सन्देश, जिसमें प्रेम, करुणा और क्षमा की शक्ति हर अंधकार को परास्त कर सकती है। प्रभु यीशु ने यही सिखाया कि सत्य का मार्ग चाहे कितना भी कठिन क्यों न हो, वह सबसे उज्ज्वल होता है।”
और इस दिन उपवास रखा गया। मीठी रोटियाँ बनीं — जिनकी मिठास केवल स्वाद में नहीं, बल्कि स्मृति में थी। स्मृति उस प्रेम की, जो ईश्वर ने हमें निःस्वार्थ दिया।
चर्च के हर कोने में मौन, हर मोमबत्ती की लौ में संकल्प था — कि हम भी अपने जीवन में उस प्रकाश की ओर चलें, जो प्रेम, क्षमा और बलिदान से जन्म लेता है।
गुड फ्रायडे, भले ही एक शोक का दिन हो, पर इसकी छांव में वह रौशनी छिपी है, जो पुनरुत्थान की ओर ले जाती है। जब प्रभु मृत्यु पर विजय पाकर लौटे, तो साथ में लाए थे एक अमर संदेश — कि प्रेम कभी हारता नहीं। यही गुड फ्रायडे की आत्मा है। और यही आत्मा आज मूंदी की हर धड़कन में महसूस कर रही हैविज्ञापन
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