: "मूंदी ने खोया एक दीपक, जो वर्षों तक समाज को रोशनी देता रहा – पूर्व पार्षद बानो बी अब हमारे बीच नहीं रहीं
Barkat Qureshi / Fri, Apr 18, 2025 / Post views : 342
"मूंदी ने खोया एक दीपक, जो वर्षों तक समाज को रोशनी देता रहा – पूर्व पार्षद बानो बी अब हमारे बीच नहीं रहीं"
रिपोर्ट – ईस्हाक गौरी, मूंदी
शुक्रवार की सुबह मूंदी की फिज़ाओं में एक अदृश्य सन्नाटा पसरा हुआ था। ऐसा लगा मानो समय ठहर गया हो। क्योंकि आज, इस नगर ने अपनी एक अनमोल विभूति को खो दिया।
वार्ड क्रमांक 04 की पूर्व पार्षद और वर्तमान कांग्रेस पार्षद शेख नसीम आरा की पूज्य माता, श्रीमती बानो बी (84 वर्ष) का निधन हो गया।
वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। पर उनके जाने की खबर ने जो सन्नाटा फैलाया, वह केवल बीमारी का नहीं, बल्कि एक युग का अंत था।
हर गली, हर घर, हर दिल ने उन्हें याद किया – किसी ने उन्हें ‘मां’ कहा, किसी ने ‘आपा’, और किसी ने ‘अपनी बानो बी’।
उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ यह सिद्ध कर रही थी कि उन्होंने केवल वोट नहीं जीते थे – उन्होंने दिलों में जगह बनाई थी।
उनकी अंतिम विदाई, जुमे की नमाज़ के पश्चात, मूंदी के कब्रिस्तान में हुई। वहाँ मौजूद सैकड़ों लोगों की आँखों में आंसू थे – और होंठों पर दुआ।
हिंदू-मुस्लिम एक साथ खड़े होकर, इंसानियत के उस प्रतीक को आख़िरी सलाम कह रहे थे, जो धर्म से ऊपर उठकर जीती थीं।
"वो सिर्फ़ पार्षद नहीं थीं, वो उम्मीद थीं।
उनकी एक आवाज़, वार्ड के लोगों के लिए भरोसे की गूंज थी।
वो समस्या का हल नहीं पूछती थीं, वो ख़ुद हल बनकर सामने खड़ी होती थीं।"
– ये शब्द थे वरिष्ठ शिक्षक सीताराम मालाकार, लोकेश राठौर, गोलू राठौर, के, जिनकी आँखों में उनके लिए गहरा सम्मान था।
बानो बी का जीवन त्याग, सेवा और धर्मनिष्ठता की मिसाल था।
उन्होंने राजनीति को मंच नहीं, सेवा का माध्यम माना। वे महिलाओं के लिए शक्ति थीं, बुजुर्गों के लिए सहारा और बच्चों के लिए ममता की मूर्ति।
सांसद प्रतिनिधि चन्द्रमोहन राठौर और लायन्स कॉलेज मूंदी के प्राचार्य डॉ. जालम सिंह डोडे ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा –
"बानो बी का जाना केवल एक जीवन का अंत नहीं है, बल्कि मूंदी की आत्मा के एक पवित्र अध्याय का विराम है। उनके जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं।"
समाज के सभी वर्गों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मूंदी के मुस्लिम समुदाय ने कहा –
"मरहूमा बानो बी ने ताउम्र सबकी मदद की, हर दिल को जोड़ा, और हर मौके पर इंसानियत का झंडा ऊँचा रखा।
हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए, और उनके परिवार को सब्र दे।"
यह सिर्फ़ एक समाचार नहीं था, यह एक युग की समाप्ति थी।
मूंदी आज एक मां को खो बैठा, पर उनका नाम, उनकी सेवा, और उनकी मोहब्बत हमेशा अमर रहेगी।
रिपोर्ट – ईस्हाक गौरी, मूंदी
शुक्रवार की सुबह मूंदी की फिज़ाओं में एक अदृश्य सन्नाटा पसरा हुआ था। ऐसा लगा मानो समय ठहर गया हो। क्योंकि आज, इस नगर ने अपनी एक अनमोल विभूति को खो दिया।
वार्ड क्रमांक 04 की पूर्व पार्षद और वर्तमान कांग्रेस पार्षद शेख नसीम आरा की पूज्य माता, श्रीमती बानो बी (84 वर्ष) का निधन हो गया।
वे पिछले कुछ समय से अस्वस्थ थीं। पर उनके जाने की खबर ने जो सन्नाटा फैलाया, वह केवल बीमारी का नहीं, बल्कि एक युग का अंत था।
हर गली, हर घर, हर दिल ने उन्हें याद किया – किसी ने उन्हें ‘मां’ कहा, किसी ने ‘आपा’, और किसी ने ‘अपनी बानो बी’।
उनके अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़ यह सिद्ध कर रही थी कि उन्होंने केवल वोट नहीं जीते थे – उन्होंने दिलों में जगह बनाई थी।
उनकी अंतिम विदाई, जुमे की नमाज़ के पश्चात, मूंदी के कब्रिस्तान में हुई। वहाँ मौजूद सैकड़ों लोगों की आँखों में आंसू थे – और होंठों पर दुआ।
हिंदू-मुस्लिम एक साथ खड़े होकर, इंसानियत के उस प्रतीक को आख़िरी सलाम कह रहे थे, जो धर्म से ऊपर उठकर जीती थीं।
"वो सिर्फ़ पार्षद नहीं थीं, वो उम्मीद थीं।
उनकी एक आवाज़, वार्ड के लोगों के लिए भरोसे की गूंज थी।
वो समस्या का हल नहीं पूछती थीं, वो ख़ुद हल बनकर सामने खड़ी होती थीं।"
– ये शब्द थे वरिष्ठ शिक्षक सीताराम मालाकार, लोकेश राठौर, गोलू राठौर, के, जिनकी आँखों में उनके लिए गहरा सम्मान था।
बानो बी का जीवन त्याग, सेवा और धर्मनिष्ठता की मिसाल था।
उन्होंने राजनीति को मंच नहीं, सेवा का माध्यम माना। वे महिलाओं के लिए शक्ति थीं, बुजुर्गों के लिए सहारा और बच्चों के लिए ममता की मूर्ति।
सांसद प्रतिनिधि चन्द्रमोहन राठौर और लायन्स कॉलेज मूंदी के प्राचार्य डॉ. जालम सिंह डोडे ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा –
"बानो बी का जाना केवल एक जीवन का अंत नहीं है, बल्कि मूंदी की आत्मा के एक पवित्र अध्याय का विराम है। उनके जैसे व्यक्तित्व सदियों में एक बार जन्म लेते हैं।"
समाज के सभी वर्गों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
मूंदी के मुस्लिम समुदाय ने कहा –
"मरहूमा बानो बी ने ताउम्र सबकी मदद की, हर दिल को जोड़ा, और हर मौके पर इंसानियत का झंडा ऊँचा रखा।
हम दुआ करते हैं कि अल्लाह उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में आला मुक़ाम अता फरमाए, और उनके परिवार को सब्र दे।"
यह सिर्फ़ एक समाचार नहीं था, यह एक युग की समाप्ति थी।
मूंदी आज एक मां को खो बैठा, पर उनका नाम, उनकी सेवा, और उनकी मोहब्बत हमेशा अमर रहेगी।विज्ञापन
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