: रेगिस्तान में मोहब्बत की बूंद ~
Barkat Qureshi / Thu, Apr 17, 2025 / Post views : 266
रेगिस्तान में मोहब्बत की बूंद ~
कोटा में दो परिवारों ने मिलकर रच दिया इंसानियत का एक अनमोल अध्याय
संवाददाता इस्हाक़ गौरी मुंदी
जब दुनिया मज़हब के नाम पर बँट रही हो, तब कहीं से कोई ख़बर ऐसी आती है जो दिल को सुकून देती है, और यक़ीन दिलाती है कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है।
राजस्थान का शहर कोटा इन दिनों सिर्फ़ इंजीनियरिंग और मेडिकल कोचिंग का हब नहीं,
बल्कि एक नई सामाजिक जागृति का केंद्र बन गया है।
यहाँ दो दोस्त — अब्दुल रऊफ अंसारी और विश्वजीत चक्रवर्ती —
ने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में तब्दील कर
मोहब्बत, सौहार्द और भाईचारे की एक मिसाल पेश की है।
इन दोनों परिवारों ने अपने बेटों की शादियाँ —
एक साथ, एक ही पंडाल में, एक ही कार्ड पर आयोजित करने का फ़ैसला लिया है।
युनूस अंसारी का निकाह फ़रहीन अंसारी से 17 अप्रैल को होगा,
जबकि सौरभ चक्रवर्ती का विवाह श्रेष्टा राय से 18 अप्रैल को संपन्न होगा।
दोनों परिवार मिलकर 19 अप्रैल को एक साझा रिसेप्शन —
‘उत्सव-ए-शादी’ — का आयोजन करने जा रहे हैं।
मगर जो बात इस आयोजन को ख़ास बनाती है, वो है भावना।
सौरभ के बारातियों का स्वागत अब्दुल रऊफ करेंगे,
और युनूस के मेहमानों की मेज़बानी विश्वजीत बाबू खुद संभालेंगे।
जब समाज में मज़हब की दीवारें ऊँची की जा रही हों,
तब कोटा से उठी यह ख़बर एक प्यासी रेत पर बरसी उम्मीद की बूंद की तरह है।
यह कहानी बताती है कि
त्योहार, रिवाज़, और शादियाँ —
अगर दिलों को जोड़ने लगें,
तो हर धर्म सिर्फ़ इंसानियत का रास्ता बन जाता है।
इस आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी ख़ासी उत्सुकता और खुशी है।
मोहल्ले से लेकर सोशल मीडिया तक,
हर जगह बस एक ही बात —
"काश, हर शहर कोटा जैसा हो जाए।"
‘उत्सव-ए-शादी’ अब सिर्फ़ एक समारोह नहीं,
बल्कि एक आंदोलन बन चुका है —
जो बिना भाषण दिए,
सिर्फ़ मोहब्बत से यह कह रहा है:
“चलो ऐसा कुछ करें कि मिसाल बन जाए,
मोहब्बत ज़िंदा रहे और नफ़रत हार जाए।”
संवाददाता इस्हाक़ गौरी मुंदी
जब दुनिया मज़हब के नाम पर बँट रही हो, तब कहीं से कोई ख़बर ऐसी आती है जो दिल को सुकून देती है, और यक़ीन दिलाती है कि इंसानियत अब भी ज़िंदा है।
राजस्थान का शहर कोटा इन दिनों सिर्फ़ इंजीनियरिंग और मेडिकल कोचिंग का हब नहीं,
बल्कि एक नई सामाजिक जागृति का केंद्र बन गया है।
यहाँ दो दोस्त — अब्दुल रऊफ अंसारी और विश्वजीत चक्रवर्ती —
ने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में तब्दील कर
मोहब्बत, सौहार्द और भाईचारे की एक मिसाल पेश की है।
इन दोनों परिवारों ने अपने बेटों की शादियाँ —
एक साथ, एक ही पंडाल में, एक ही कार्ड पर आयोजित करने का फ़ैसला लिया है।
युनूस अंसारी का निकाह फ़रहीन अंसारी से 17 अप्रैल को होगा,
जबकि सौरभ चक्रवर्ती का विवाह श्रेष्टा राय से 18 अप्रैल को संपन्न होगा।
दोनों परिवार मिलकर 19 अप्रैल को एक साझा रिसेप्शन —
‘उत्सव-ए-शादी’ — का आयोजन करने जा रहे हैं।
मगर जो बात इस आयोजन को ख़ास बनाती है, वो है भावना।
सौरभ के बारातियों का स्वागत अब्दुल रऊफ करेंगे,
और युनूस के मेहमानों की मेज़बानी विश्वजीत बाबू खुद संभालेंगे।
जब समाज में मज़हब की दीवारें ऊँची की जा रही हों,
तब कोटा से उठी यह ख़बर एक प्यासी रेत पर बरसी उम्मीद की बूंद की तरह है।
यह कहानी बताती है कि
त्योहार, रिवाज़, और शादियाँ —
अगर दिलों को जोड़ने लगें,
तो हर धर्म सिर्फ़ इंसानियत का रास्ता बन जाता है।
इस आयोजन को लेकर स्थानीय लोगों में भी ख़ासी उत्सुकता और खुशी है।
मोहल्ले से लेकर सोशल मीडिया तक,
हर जगह बस एक ही बात —
"काश, हर शहर कोटा जैसा हो जाए।"
‘उत्सव-ए-शादी’ अब सिर्फ़ एक समारोह नहीं,
बल्कि एक आंदोलन बन चुका है —
जो बिना भाषण दिए,
सिर्फ़ मोहब्बत से यह कह रहा है:
“चलो ऐसा कुछ करें कि मिसाल बन जाए,
मोहब्बत ज़िंदा रहे और नफ़रत हार जाए।”विज्ञापन
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