: विलेश खराड़ी पर रासुका की अवधि बढ़ाने के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
Barkat Qureshi / Thu, Jun 26, 2025 / Post views : 248
विलेश खराड़ी पर रासुका की अवधि बढ़ाने के विरोध में राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
हरदा से ब्यूरो प्रमुख गोपाल शुक्ला
जयस छात्र संगठन हरदा द्वारा टिमरनी व जिला कलेक्टर कार्यालय पर जताया गया विरोध जयस छात्र संगठन (JCS) हरदा द्वारा बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन भील जनजाति के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर विलेश खराड़ी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) की अवधि को तीन माह और बढ़ाए जाने के विरोध में सौंपा गया। यह प्रदर्शन न केवल हरदा जिले तक सीमित था, बल्कि पूरे प्रदेश स्तर पर 25 जून को ज्ञापन दिवस के रूप में यह कार्यक्रम जयस व जयस छात्र संगठन के नेतृत्व में संगठित ढंग से आयोजित किया गया।
ज्ञापन में यह बताया गया कि विलेश खराड़ी के खिलाफ पूर्व में की गई कार्यवाहियां पूर्णतः राजनैतिक प्रेरणा से संचालित थीं, जिनमें से अधिकांश मामलों में वे पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। फिर भी उन्हें NSA के अंतर्गत बीते 6 महीनों से जेल में रखा गया है और अब बिना किसी वैध कारण के इस अवधि को तीन महीने बढ़ा दिया गया है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 — जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है।
ज्ञापन में कहा गया कि खराड़ी द्वारा आदिवासियों की जमीन, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का शांतिपूर्ण विरोध किया गया था। उन्होंने भील समाज की पारंपरिक “मत्थामणा” व्यवस्था के तहत मुआवजा माँगा, जिसे गलत समझते हुए प्रशासन ने अवैध वसूली की संज्ञा दे दी और झूठी FIR दर्ज कर दी। यह न केवल आदिवासी परंपराओं का अपमान है, बल्कि शासन के न्यायबोध पर भी सवाल खड़े करता है।
ज्ञापन में यह भी जोर दिया गया कि अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत CRPC जैसे कानूनों की पूर्णतः वैधता नहीं है। इसके बावजूद आदिवासी व्यक्ति पर NSA जैसे कठोर कानूनों का प्रयोग करना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अनेक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि NSA का प्रयोग सिर्फ असाधारण स्थितियों में ही किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में।
ज्ञापन सौंपने से लगभग दो घंटे पूर्व ही टिमरनी तहसील के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) श्री महेश बडोले जी को भी संगठन द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था। इस तरह, तहसील से लेकर जिला स्तर तक एक ही दिन में विरोध दर्ज कराया गया, जो संगठन की एकजुटता और संवैधानिक चेतना का प्रतीक है।
जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस छात्र संगठन हरदा के जिलाध्यक्ष अतुल पवार कोरकू, जिला प्रभारी अंकित धुर्वे, नारी शक्ति जिला प्रभारी जयश्री कवरे, जिला उपाध्यक्ष सतीश सोलंकी, जिला सचिव दीपक धुर्वे सहित हंडिया तहसील कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ज्ञापन के अंत में मांग की गई कि इंजीनियर विलेश खराड़ी को अविलंब रिहा किया जाए, उन पर लगाए गए सभी राजनीतिक और असंवैधानिक मुकदमे समाप्त किए जाएं। साथ ही, संगठन ने यह भी आग्रह किया कि मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर हो रहे लगातार अन्याय, शोषण और प्रशासनिक दमन को देखते हुए राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, ताकि आदिवासी समुदाय को न्याय मिल सके और संविधान का सम्मान बहाल हो।
हरदा से ब्यूरो प्रमुख गोपाल शुक्ला
जयस छात्र संगठन हरदा द्वारा टिमरनी व जिला कलेक्टर कार्यालय पर जताया गया विरोध जयस छात्र संगठन (JCS) हरदा द्वारा बुधवार को जिला कलेक्टर कार्यालय में महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन सौंपा गया। यह ज्ञापन भील जनजाति के सामाजिक कार्यकर्ता और इंजीनियर विलेश खराड़ी पर लगाए गए राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) की अवधि को तीन माह और बढ़ाए जाने के विरोध में सौंपा गया। यह प्रदर्शन न केवल हरदा जिले तक सीमित था, बल्कि पूरे प्रदेश स्तर पर 25 जून को ज्ञापन दिवस के रूप में यह कार्यक्रम जयस व जयस छात्र संगठन के नेतृत्व में संगठित ढंग से आयोजित किया गया।
ज्ञापन में यह बताया गया कि विलेश खराड़ी के खिलाफ पूर्व में की गई कार्यवाहियां पूर्णतः राजनैतिक प्रेरणा से संचालित थीं, जिनमें से अधिकांश मामलों में वे पहले ही दोषमुक्त हो चुके हैं। फिर भी उन्हें NSA के अंतर्गत बीते 6 महीनों से जेल में रखा गया है और अब बिना किसी वैध कारण के इस अवधि को तीन महीने बढ़ा दिया गया है। संगठन ने इसे संविधान के अनुच्छेद 21 — जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन बताया है।
ज्ञापन में कहा गया कि खराड़ी द्वारा आदिवासियों की जमीन, संस्कृति और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं का शांतिपूर्ण विरोध किया गया था। उन्होंने भील समाज की पारंपरिक “मत्थामणा” व्यवस्था के तहत मुआवजा माँगा, जिसे गलत समझते हुए प्रशासन ने अवैध वसूली की संज्ञा दे दी और झूठी FIR दर्ज कर दी। यह न केवल आदिवासी परंपराओं का अपमान है, बल्कि शासन के न्यायबोध पर भी सवाल खड़े करता है।
ज्ञापन में यह भी जोर दिया गया कि अनुसूचित क्षेत्रों में संविधान की 5वीं अनुसूची के अंतर्गत CRPC जैसे कानूनों की पूर्णतः वैधता नहीं है। इसके बावजूद आदिवासी व्यक्ति पर NSA जैसे कठोर कानूनों का प्रयोग करना संविधान की मूल भावना के विरुद्ध है। संगठन ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के अनेक निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि NSA का प्रयोग सिर्फ असाधारण स्थितियों में ही किया जाना चाहिए, न कि राजनीतिक दबाव में।
ज्ञापन सौंपने से लगभग दो घंटे पूर्व ही टिमरनी तहसील के अनुविभागीय अधिकारी (SDM) श्री महेश बडोले जी को भी संगठन द्वारा ज्ञापन सौंपा गया था। इस तरह, तहसील से लेकर जिला स्तर तक एक ही दिन में विरोध दर्ज कराया गया, जो संगठन की एकजुटता और संवैधानिक चेतना का प्रतीक है।
जिला कलेक्टर कार्यालय में ज्ञापन सौंपने के दौरान जयस छात्र संगठन हरदा के जिलाध्यक्ष अतुल पवार कोरकू, जिला प्रभारी अंकित धुर्वे, नारी शक्ति जिला प्रभारी जयश्री कवरे, जिला उपाध्यक्ष सतीश सोलंकी, जिला सचिव दीपक धुर्वे सहित हंडिया तहसील कार्यकारिणी के अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ज्ञापन के अंत में मांग की गई कि इंजीनियर विलेश खराड़ी को अविलंब रिहा किया जाए, उन पर लगाए गए सभी राजनीतिक और असंवैधानिक मुकदमे समाप्त किए जाएं। साथ ही, संगठन ने यह भी आग्रह किया कि मध्यप्रदेश में आदिवासियों पर हो रहे लगातार अन्याय, शोषण और प्रशासनिक दमन को देखते हुए राष्ट्रपति शासन लागू किया जाए, ताकि आदिवासी समुदाय को न्याय मिल सके और संविधान का सम्मान बहाल हो।विज्ञापन
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