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: शिक्षा और किताबों के बाजार में पारदर्शिता की आवश्यकता:__ गजेन्द्र सिंह सोलंकी बडनगर

Barkat Qureshi / Wed, Apr 2, 2025 / Post views : 197

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शिक्षा और किताबों के बाजार में पारदर्शिता की आवश्यकता:__ गजेन्द्र सिंह सोलंकी बडनगर प्रदेश महा सचिव, किसान कांग्रेस एवं जिला महामंत्री खंडवा ग्रामीण गजेन्द्र सिंह सोलंकी ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही अभिभावकों पर अपने बच्चों के लिए किताबें, कॉपी और ड्रेस खरीदने का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है, उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि निजी स्कूलों द्वारा मनमानी फीस बढ़ोतरी और बुक डिपो में मनमर्जी से वसूली जाने वाली कीमतों के कारण अभिभावकों को अनावश्यक वित्तीय दबाव झेलना पड़ रहा है। पुस्तक मेले की मांग सोलंकी ने सुझाव दिया कि मध्य प्रदेश के हर जिले में अभिभावकों को राहत देने के लिए पुस्तक मेले का आयोजन किया जाना चाहिए। इस मेले में बड़े प्रकाशकों को शामिल किया जाए, ताकि किताबें उचित मूल्य पर उपलब्ध हो सकें और कॉपी-पुस्तकों पर विशेष छूट दी जा सके। पुरानी किताबों के पुनः उपयोग पर जोर उन्होंने यह भी कहा कि कुछ स्कूल अब पुराने किताबों को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, जबकि पहले सीनियर बैच के छात्र जूनियर छात्रों को अपनी पुरानी किताबें देते थे। यह परंपरा अब खत्म होती जा रही है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ बढ़ गया है। उन्होंने आग्रह किया कि स्कूल प्रबंधन को पुरानी किताबों के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित करना चाहिए। शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता आवश्यक गजेन्द्र सिंह सोलंकी ने कहा कि हमारी शिक्षा व्यवस्था का मूल उद्देश्य बच्चों को सस्ती, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना होना चाहिए, न कि अभिभावकों पर आर्थिक दबाव डालना। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि किताबों के बाजार में पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि प्रत्येक छात्र को समान अवसर मिल सके और वे एक सशक्त नागरिक बनकर देश के विकास में योगदान दे सकें। निष्कर्ष सोलंकी ने सरकार से अपील की कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। पुस्तक मेले का आयोजन, पुरानी किताबों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देना, और किताबों की कीमतों पर नियंत्रण रखना इस दिशा में सहायक सिद्ध हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान देना नहीं, बल्कि उसे सुलभ और सस्ता बनाना भी होना चाहिए।

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