: सात्विक गुण तमोगुणो को समाप्त कर देते है - दीदी चेतना भारतीजी
Barkat Qureshi / Mon, Feb 24, 2025 / Post views : 261
सात्विक गुण तमोगुणो को समाप्त कर देते है - दीदी चेतना भारतीजी
खंडवा / ग्राम कोहदर में चल रही परचरी पुराण के द्वितीय दिवस में मंडलेश्वर की सुविख्यात कथा प्रवक्ता दीदी श्री चेतना भारती ने कहा की मनुष्य मन, वचन और कर्म के द्वारा नित्य प्रतिदिन पापाचार करता ही है परंतु भजन नही करता है जिससे की अवगुणों की मात्रा मन और शरीर में बढ़ती रहती है। नित्य प्रतिदिन ईश्वरीय आराधना, भजन,साधना, नाम जप, ध्यान,सात्विक आहार विहार, वाणी रखने से ये सात्विक गुण तमोगुणो को दबा कर रखते है इसलिए भजन मार्ग से लगे रहना चाहिए। जैसे हम बिना भोजन, आहार, स्वास के नही रह सकते है ठीक वैसे ही भजन के बिना भी नही रहना चाहिए। वैसे तो स्वास स्वास में हरी स्मरण होना चाहिए परंतु इतना संभव ना हो तो तो 24 घंटे में से 1 घंटा तो प्रभु को तल्लीनता से देना ही चाहिए। इस एक घंटे में सांसारिक कार्यों को भूलकर, मात्र 1 घंटे के लिए वैराग्यवान होकर, संसार से विमुख होकर ईश्वर के सम्मुख हो जाना चाहिए तो भी साधना मार्ग में बहुत सहायता मिलेगी और सद्गुणों की मात्रा बढ़ जाएगी तथा धीरे धीरे भक्ति बढ़ेगी। सतोगुण ही हमे देवपुरुष बनाते है और जीवन को दिव्य बनाते है। दीदीश्री के द्वारा भजन मार्ग में उन्नति के लिए बहुमूल्य सूत्र कथा में बताए जा रहे है। धन्य है आयोजक ग्रामवासी जो तन मन धन से सेवा में लगा हुआ है,कथा श्रवण हेतु आसपास के भक्तजन आ रहे है दीदी श्री ने व्यासपीठ से सबको साधुवाद दिया।
खंडवा / ग्राम कोहदर में चल रही परचरी पुराण के द्वितीय दिवस में मंडलेश्वर की सुविख्यात कथा प्रवक्ता दीदी श्री चेतना भारती ने कहा की मनुष्य मन, वचन और कर्म के द्वारा नित्य प्रतिदिन पापाचार करता ही है परंतु भजन नही करता है जिससे की अवगुणों की मात्रा मन और शरीर में बढ़ती रहती है। नित्य प्रतिदिन ईश्वरीय आराधना, भजन,साधना, नाम जप, ध्यान,सात्विक आहार विहार, वाणी रखने से ये सात्विक गुण तमोगुणो को दबा कर रखते है इसलिए भजन मार्ग से लगे रहना चाहिए। जैसे हम बिना भोजन, आहार, स्वास के नही रह सकते है ठीक वैसे ही भजन के बिना भी नही रहना चाहिए। वैसे तो स्वास स्वास में हरी स्मरण होना चाहिए परंतु इतना संभव ना हो तो तो 24 घंटे में से 1 घंटा तो प्रभु को तल्लीनता से देना ही चाहिए। इस एक घंटे में सांसारिक कार्यों को भूलकर, मात्र 1 घंटे के लिए वैराग्यवान होकर, संसार से विमुख होकर ईश्वर के सम्मुख हो जाना चाहिए तो भी साधना मार्ग में बहुत सहायता मिलेगी और सद्गुणों की मात्रा बढ़ जाएगी तथा धीरे धीरे भक्ति बढ़ेगी। सतोगुण ही हमे देवपुरुष बनाते है और जीवन को दिव्य बनाते है। दीदीश्री के द्वारा भजन मार्ग में उन्नति के लिए बहुमूल्य सूत्र कथा में बताए जा रहे है। धन्य है आयोजक ग्रामवासी जो तन मन धन से सेवा में लगा हुआ है,कथा श्रवण हेतु आसपास के भक्तजन आ रहे है दीदी श्री ने व्यासपीठ से सबको साधुवाद दिया।विज्ञापन
विज्ञापन