: सुनो छपरियों.....समरस है होली......
Barkat Qureshi / Tue, Mar 11, 2025 / Post views : 363
सुनो छपरियों.....समरस है होली......
भारत विविधताओं का देश है, जहाँ सालभर अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं। यह भूमि अनेक भाषाओं, जातियों, परंपराओं और धर्मों का संगम है। इन्हीं में से होली भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, जिसे न केवल देशभर में, बल्कि विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार रंगों, उमंग, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
होली को मनाने के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएँ हैं। होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ी है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम-लीला से प्रेरित होकर मथुरा और वृंदावन में इसे विशेष रूप से रंगों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में होली मनाने के अलग-अलग तरीके हैं। ब्रज में लट्ठमार होली, बंगाल में डोल पूर्णिमा, और पंजाब में होला मोहल्ला इसका अनूठा रूप प्रस्तुत करते हैं। इस दिन लोग रंग-गुलाल उड़ाते हैं, ढोल-नगाड़ों पर नाचते-गाते हैं और पारंपरिक पकवान जैसे गुजिया, मालपुआ, दही-वड़ा, कचौड़ी और ठंडाई का आनंद लेते हैं। हालाँकि, आजकल रासायनिक रंगों और अनुशासनहीनता के कारण होली की पवित्रता प्रभावित हो रही है। हमें इसे पारंपरिक, सुरक्षित, हर्षोल्लासपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए।
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भावना, सामाजिक समरसता और उल्लास का प्रतीक है। हमें इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाना चाहिए ताकि इसकी खूबसूरती और सांस्कृतिक महत्व बना रहे। इसलिए, आइए हम सब मिलकर इस पावन पर्व को प्रेम, आनंद और सादगी के साथ मनाएँ, ताकि यह हमारे जीवन में खुशियों के नए रंग भर सके। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि.....,
होली अब के बार की, ऐसी कर दे राम।
गलबहिंया डाले मिलें, ग़ालिब अरु घनश्याम.....
प्रियंका दुबे प्रदेश प्रवक्ता भाजपा
भारत विविधताओं का देश है, जहाँ सालभर अलग-अलग त्योहार मनाए जाते हैं। यह भूमि अनेक भाषाओं, जातियों, परंपराओं और धर्मों का संगम है। इन्हीं में से होली भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, जिसे न केवल देशभर में, बल्कि विदेशों में भी धूमधाम से मनाया जाता है। यह त्योहार रंगों, उमंग, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है और बसंत ऋतु के आगमन का संकेत देता है।
होली को मनाने के पीछे कई पौराणिक और ऐतिहासिक मान्यताएँ हैं। होलिका दहन की परंपरा भक्त प्रह्लाद और हिरण्यकश्यप की कथा से जुड़ी है, जो बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश देती है। वहीं, भगवान श्रीकृष्ण और राधा की प्रेम-लीला से प्रेरित होकर मथुरा और वृंदावन में इसे विशेष रूप से रंगों के उत्सव के रूप में मनाया जाता है।
भारत के अलग-अलग राज्यों में होली मनाने के अलग-अलग तरीके हैं। ब्रज में लट्ठमार होली, बंगाल में डोल पूर्णिमा, और पंजाब में होला मोहल्ला इसका अनूठा रूप प्रस्तुत करते हैं। इस दिन लोग रंग-गुलाल उड़ाते हैं, ढोल-नगाड़ों पर नाचते-गाते हैं और पारंपरिक पकवान जैसे गुजिया, मालपुआ, दही-वड़ा, कचौड़ी और ठंडाई का आनंद लेते हैं। हालाँकि, आजकल रासायनिक रंगों और अनुशासनहीनता के कारण होली की पवित्रता प्रभावित हो रही है। हमें इसे पारंपरिक, सुरक्षित, हर्षोल्लासपूर्ण और पर्यावरण के अनुकूल तरीके से मनाना चाहिए।
होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, सद्भावना, सामाजिक समरसता और उल्लास का प्रतीक है। हमें इसे सौहार्दपूर्ण ढंग से मनाना चाहिए ताकि इसकी खूबसूरती और सांस्कृतिक महत्व बना रहे। इसलिए, आइए हम सब मिलकर इस पावन पर्व को प्रेम, आनंद और सादगी के साथ मनाएँ, ताकि यह हमारे जीवन में खुशियों के नए रंग भर सके। ईश्वर से यही प्रार्थना है कि.....,
होली अब के बार की, ऐसी कर दे राम।
गलबहिंया डाले मिलें, ग़ालिब अरु घनश्याम.....
प्रियंका दुबे प्रदेश प्रवक्ता भाजपाविज्ञापन
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