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: सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना करना पड़ा भारी, ग्राम पंचायत कपासी के 2 सचिवों पर हुआ 25 - 25 हजार का जुर्माना

Barkat Qureshi / Wed, Jun 25, 2025 / Post views : 245

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सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना करना पड़ा भारी, ग्राम पंचायत कपासी के 2 सचिवों पर हुआ 25 - 25 हजार का जुर्माना हरदा से ब्यूरो चीफ गोपाल शुक्ला हरदा टिमरनी सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना करने वाले सचिव पर गिरी गाज सूचना आयुक्त के द्वारा लापरवाही करने वाले 2 ग्राम पंचायत सचिवों पर जुर्माने की कार्यवाही की हैं। सूचना का अधिकार के तहत जानकारी को 30 दिन में नहीं देने पर और प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेश की अवहेलना करने पर तथा राज्य सूचना आयोग के द्वारा सचिवों को अपना पक्ष रखने के लिए बार बार मौका दिया गया जिसमें वह उपस्थित नहीं हुए राज्य सूचना आयोग के आदेशों की भी अवहेलना करने पर जुर्माने की कार्रवाई की गई है सूचना आयुक्त के द्वारा भरपूर समय भी दिया गया था लेकिन वर्तमान के लोक सूचना अधिकारी परमेंद्र सिंह राजपूत के द्वारा सूचना आयुक्त के आदेशों की बार-बार अवहेलना की जा रही थी सूचना आयुक्त के द्वारा जमानती वारंट का भी नोटिस जारी किया गया था उसे पर भी ग्राम पंचायत कपासी के सचिव परमेंद्र सिंह राजपूत के द्वारा आयुक्त के आदेशों की अभिन्न की गई इसे पहले पदस्थ सचिव महेश जाट के द्वारा भी इस प्रकार से ही आयुक्त के आदेशों की बार-बार भेजने की जा रही थी इस कारण से दोनों सचिवों पर 25-25 हजार के जुर्माने की कार्रवाई की गई है यह राशि 30 दिन के अंदर जमा करने का जनपद सीईओ को भी आदेश दिया गया नहीं तो ग्राम पंचायत सचिवों के वेतन में से कटकर यह राशि मध्य प्रदेश सूचना आयोग में जमा करने का आदेश जारी किया गया है  आरटीआई के तहत मांगी गई थी जानकारी अपीलार्थी गोविन्द सकतपुरिया के द्वारा दिनांक 19/10/ 2022 को लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को दायर कर निम्न अनुसार जानकारी चाहिए गई थी। ग्राम पंचायत कपासी में टेमागांव वरुण घाट मुख्य मार्ग से पंडा बाबा गंजाल नदी की ओर सीसी रोड की जानकारियां 07 बिंदुओं में मांगी गई थी। सूचना आयोग में अपील का आधार अपीलार्थी गोविंद सकतपुरिया के आवेदन दिनांक 19/10/2022 के मुताबिक लोक सूचना अधिकारी के द्वारा समय सीमा 30 दिन में जानकारियां उपलब्ध नहीं करा गई थीं। इस हेतु अपीलार्थी गोविंद सकतपुरिया द्वारा प्रथम अपील दिनांक 28/11/2022 को दायर की गई थी प्रथम अपीलीय अधिकारी के द्वारा पारित आदेश दिनांक 29/3/2023 से लोक सूचना अधिकारी को 15 दिवस के भीतर निशुल्क जानकारी उपलब्ध करने हेतु निर्देशित किया गया इसके बावजूद भी लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं करने के कारण अपीलार्थी गोविंद सकतपुरिया द्वारा द्वितीय अपील दिनांक 29/3/2023 को दायर की गई थी।  राज्य सूचना आयोग ने इस तथ्य पर कि कार्यवाही 1)प्रकरण में दिनांक 06/06/2025 को नियत एससीएन सुनवाई में महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत देवतालाब विकासखंड हरदा जिला हरदा मध्य प्रदेश जवाब अप्राप्त रहा। 2) प्रकरण में दिनांक 06/06/2025 को नियत एस.सी. एन. सुनवाई में परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा मध्य प्रदेश जवाब अप्राप्त रहा  राज्य सूचना आयोग का मत प्रकरण में महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सचिव ग्राम पंचायत देव तालाब विकासखंड हरदा जिला हरदा की भूमिका प्रकरण में दस्तावेजों का अवलोकन उपरांत स्पष्ट है कि अभिलार्थी गोविन्द सकतपुरिया द्वारा दिनांक 19/10/2022 को आरटीआई आवेदन कार्यालय ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा मध्य प्रदेश को प्रेषित किया गया था उक्त आवेदन पर लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी द्वारा कोई कार्रवाई न करने पर अपीलार्थी द्वारा प्रथम अपील अधिकारी को दिनांक 28/11/2022 को कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को दायर की गई उक्त अपील पर प्रथम प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दिनांक 17/01/2023 को आदेश पारित करते हुए 15 दिवस के भीतर निशुल्क जानकारी आवेदक को उपलब्ध कराने हेतु आदेश किया गया इसके बावजूद भी जानकारी उपलब्ध न करने के लिए अपीलार्थी द्वारा आयोग के समक्ष दिनांक 29/03/2025 को द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई। आयोग के आदेश की लगातार अवहेलना से स्पष्ट है कि लोक सूचना अधिकारी की नियत जानकारी को जानबूझकर रोकने की है सुन भाई के दौरान आयोग के समक्ष स्पष्ट है कि महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सचिव ग्राम पंचायत देवतालाब विकासखंड हरदा द्वारा आवेदक कोच्चि गई जानकारी 30 दिवस के भीतर उपलब्ध नहीं कराई गई महेश जाट द्वारा आरटीआई आवेदन दिनांक 19/10/2022 में वांछित जानकारी को 30 दिन की समय सीमा में उपलब्ध न कर कर धारा 7(1) का उल्लंघन किया गया है लोक सूचना अधिकारी द्वारा धारा 7(1) का उल्लंघन एवं अपील प्रथम अपील अपील अधिकारी के आदेश की अवहेलना करते हुए अपील आरती द्वारा चलाई गई जानकारी असदभावपूर्वक, जानबूझकर जानकारी को अवरुद्ध किया गया लोक सूचना अधिकारी की लापरवाही के चलते जो जानकारी 30 दिन की अवधि में उपलब्ध कराने की अभिलारती को जानकारी आयोग के आदेश उपरांत भी उपलब्ध नहीं कराई गई। महेश जाट द्वारा आयोग के समक्ष सुनवाई में ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण पेश नहीं किया गया जिससे यह माना जा सके की अपीलार्थी को जानकारी प्रदान करने का कोई भी प्रयास युक्तियुक्त रूप से तत्परता पूर्वक उनके द्वारा किया गया हो। चाही गई जानकारी पूरी तरह से सामान्य और सहज रूप से प्रदान की जा सकती थी। पर ऐसा न करते हुए महेश जाट ने सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में शिथिलता पूर्वक रवैया आयोग के समक्ष दर्शाया है। धारा 20 में स्पष्ट है कि प्रकरण में यदि लोग सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई या आवेदन का निराकरण विधि संबंध किया गया है तो उसके उसे साबित करने का भर स्वयं लोक सूचना अधिकारी पर ही है। अतः आयोग प्रकरण में महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सचिव ग्राम पंचायत देव तालाब विकासखंड हरदा को भविष्य के लिए सचेत करता है कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदनों का निराकरण विधि अनुरूप करे। आयोग के समक्ष स्पष्ट है कि महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सचिव ग्राम पंचायत देवतालाब विकासखंड हरदा द्वारा निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई इस बाबत सूचना के अधिकार अधिनियम में अगर चाहे गई जानकारी बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कर्म से उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो आयोग द्वारा प्रकरण की विशिष्ट परिस्थितियों में अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन 250 रुपए के मन से अधिकतम 25 000 रुपए का जुर्माना व्यक्तिगत रूप से आरोपित करता है। प्रकरण में परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा की भूमिका प्रकरण में दस्तावेजों के अवलोकन उपरांत स्पष्ट है कि अपीलार्थी द्वारा दिनांक 19/10/ 2022 को आरटीआई आवेदन कार्यालय ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को प्रेषित किया गया था उक्त आवेदन पर लोक सूचना अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही ना करने पर अपीलार्थी द्वारा प्रथम अपील दिनांक 28/11/ 2022 को कार्यालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को दायर की गई उक्त अपील पर प्रथम अपीलीय अधिकारी द्वारा दिनांक 17/01/2023 को आदेश पारित करते हुए 15 दिवस के भीतर निशुल्क जानकारी उपलब्ध ना कराने के लिए अपीलार्थी द्वारा आयोग के समक्ष दिनांक 29/03/2023 को द्वितीय अपील प्रस्तुत की गई। आयोग के समक्ष दस्तावेजों का अवलोकन उपरांत स्पष्ट है कि परमेन सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को आयोग द्वारा लगातार प्रकरण में जानकारी देने के आदेश एवं अपना पक्ष प्रस्तुत करने हेतु दिनांक 20/12/2024, 02/01/2025, 23/01/ 2025, 07/02/2025, 28/02/2025, 01/04/2025, 08/05/2025 एवं 06/06/2025 को दिये गए थे, लेकिन इसके बावजूद परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी द्वारा इस प्रकरण में लापरवाही पूर्वक आयोग के आदेश की अवहेलना करते हुए जानकारी आयोग के समक्ष उपलब्ध नहीं कराई या स्पष्ट रूप से सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(7) का का उल्लंघन है जिसके तहत आयोग का आदेश संबंधित लोक प्राधिकारी पर आज्ञा प्रज्ञा है। आयोग के आदेश की लगातार अवहेलना से यह स्पष्ट है कि लोक सूचना अधिकारी की नियत जानकारी को जानबूझकर रोकने की है। आयोग के समक्ष स्पष्ट है कि आयोग के आदेश की 20/12/2024 की कंडिका 05 में परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी को आदेश प्राप्ति के 05 दिवस के भीतर वांछित जानकारी अपीलार्थी को निशुल्क पंजीकृत डाक से प्रदान करने हेतु आदेशित किया गया था किन्तु परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा द्वारा आयोग के आदेश की अवहेलना करते हुए जानबूझकर अपीलार्थी को जानकारी से वंचित रखा। इससे स्पष्ट है कि परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा द्वारा स्पष्ट रूप से सूचना का अधिकार अधिनियम की अवहेलना की गई है । आयोग इस पर अप्रसन्नता व्यक्त करता है । आयोग द्वारा परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा के प्रति सद्भावना रखते हुए कार्यवाही नहीं की गई थी उक्त प्रकरण में अधिनियम का उल्लंघन होना ज्ञात हुआ था। जबकि पूर्व में भी परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी के पास पर्याप्त समय था। वे जानकारी अपीलार्थी को उपलब्ध करा देते। परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी द्वारा जानबूझकर आयोग के आदेशों की अवहेलना की गई है इससे लोक सूचना अधिकारी की जानबूझकर जानकारी को छुपाने एवं आरटीआई आवेदक को जानकारी से दूर रखने की नियत परिलक्षित होती है। आयोग के आदेश की अवहेलना गंभीर विषय है। ऐसी अवहेलना से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत स्थापित व्यवस्था को विपरीत तौर पर प्रभावित करती है जिस पर आयोग अपने प्रसन्नता व्यक्त करता है। अधिनियम की धारा 19(7) के तहत आयोग का आदेश आज्ञाप्रज्ञा है। परमेंद्र सिंह राजपूत द्वारा आयोग के समक्ष सुनवाई में ऐसा कोई तथ्य या प्रमाण पेश नहीं किया गया जिससे यह माना जा सके की अपीलार्थी को जानकारी प्रदान करने का कोई भी प्रयास युक्तियुक्त रूप से तत्परता पूर्वक उनके द्वारा किया गया हो चाही गई जानकारी पूरी तरह से सामान्य और सहज रूप से प्रदान की जा सकती थी। पर ऐसा करते हुए परमेंद्र सिंह राजपूत ने सूचना का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों के तहत अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में शिथिलता पूर्वक रवैया आयोग के समक्ष दर्शाया है। धारा 20 में स्पष्ट है कि प्रकरण में यदि कोई लोक सूचना अधिकारी द्वारा आरटीआई आवेदन का निराकरण विधि सम्मत किया गया है तो उसे साबित करने का भार स्वयं लोक सूचना अधिकारी पर ही है। आयोग प्रकरण में परमेंद्र सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी को भविष्य के लिए सचेत करता है कि वह सूचना का अधिकार अधिनियम के आवेदनों का निराकरण विधि अनुरूप करें। आयोग के सक्षम स्पष्ट है कि प्रवीण सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद मंडी जिला हरदा द्वारा निर्धारित समय सीमा में जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई इस बाबत सूचना के अधिकार अधिनियम में अगर चाही गई जानकारी बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कारणों से उपलब्ध नहीं कराई जाती है तो आयोग द्वारा प्रकरण की विशिष्ट परिस्थितियों में अधिनियम की धारा 20(1) के तहत प्रतिदिन 250 रुपए के मन से अधिकतम 25000 का जुर्माना व्यक्तिगत रूप से आरोपित करता है। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग का आदेश दिनांक 06/ 06/2025 आयोग प्रकरण में कंडी का पांच आयोग के मत में पेज नंबर 5 से 9 में बने तथ्यों के आधार पर महेश जाट तत्कालीन लोक सूचना अधिकारी सचिव ग्राम पंचायत देव तालाब विकासखंड हरदा जिला हरदा को सूचना का अधिकार अधिनियम का उल्लंघन का दोषी पता है आयोग अभिलार्थी के आवेदन दिनांक 19 10 2022 से चली गई जानकारी को बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कर्म से उपलब्ध कराने के कारण प्रकरण की विशिष्ट परिस्थितियों में अधिनियम की धारा 201 के तहत प्रतिदिन 250 रुपए के मन से अधिकतम 25000 का जुर्माना आरोपित करता है आयोग कंडिका पांच आयोग के में पेज नंबर 4 से 7 में बनी तथ्यों के आधार पर प्रवीण सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा को सूचना का अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का दोषी पता है आयोग अपील आरती के आवेदन दिनांक 19 10 2022 से चलाई गई जानकारी को बिना किसी उचित एवं पर्याप्त कर्म के उपलब्ध कराने के करण प्रकरण की विशिष्ट परिस्थितियों में अधिनियम एवं की धारा 201 के तहत प्रतिदिन 250 रुपए के मन से अधिकतम 25000 का जुर्माना आरोपित करता है जमाने की राशि आदेश प्राप्ति के एक माह के में नगद या डीडी सचिव मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग भोपाल के माध्यम से आयोग कार्यालय में जमा कारण नियत अवधि में राशि जमा नहीं करने पर मध्य प्रदेश सूचना का अधिकार फीस तथा अपील नित 2005 की नित 8 नियम 8 6 के तहत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी अतः आयोग प्रवीण सिंह राजपूत वर्तमान लोक सूचना अधिकारी ग्राम पंचायत कपासी पंचायती करने को आदेशित करता है कि वह आदेश प्राप्ति के एक माह के भीतर आवेदक द्वारा आरटीआई आवेदन दिनांक 19 10 2022 में चाही गई जानकारी आवेदक को पंजीकरण डाक से निशुल्क उपलब्ध करावे अधिनियम की धारा 197 के तहत आयोग का आदेश बाधिकारी है आयोग के आदेश के बावजूद जानकारी प्राप्त रहने पर एवं आयोग के आदेश की अभिलाना की स्थिति में आवेदक द्वारा धारा 18 के तहत निशुल्क शिकायत आयोग के समक्ष दायर जानकारी प्राप्त करने एवं धारा 20 के तहत दोषी लोक सूचना अधिकारी के विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है आयोग सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(8)(a)के तहत लोक सूचना प्राधिकारी - मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत टिमरनी जिला हरदा एवं जिला कार्यालय से संबंधित लोक सूचना अधिकारियों की सेवा पुस्तिका संधारित की जाती हो को निर्देशित करता है कि वह इस द्वितीय प्रकरण में संबंधित लोक सूचना अधिकारी द्वारा मध्य प्रदेश सूचना का अधिकार फीस एवं अपील नियम 2005 की धारा 8(6)(1) के अनुसार आदेश प्राप्ति के 30 दिन के अंदर अधिरोपित शास्ति की राशि सूचना आयोग के कार्यालय में जमा न कराने पर उनकी सेवा पुस्तिका में टिप अंकित की जावे। एवं संवितरण अधिकारी भुगतान के समय उनके देयकों से यह राशि वसूल की जाकर शासकीय कोषालय में जमा करके आयोग को सूचित करें। कालांतर में उच्च न्यायालय से स्थगन प्राप्त किए जाने और आयोग का आदेश परिवर्तित हो जाने या शास्ति जमा करने संबंधित समस्त परिवर्तन भी संबंधित लोक सूचना अधिकारी की सेवा पुस्तिका में अंकित किए जाएं सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 19(7) फीस तथा अपील नित नियम अध्याय 4(8)4 के तहत राज्य सूचना आयोग का विनिश्चा अंतिम एवं बंधनकारी है

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