: "सोने से कीमती इंसानियत" मूंदी के अश्विन दलाल ने लौटाई एक लाख की सोने की पायली, महिला ने कहा – ये इंसान नहीं, भगवान के भेजे फरिश्ते हैं
Barkat Qureshi / Wed, Apr 16, 2025 / Post views : 226
"सोने से कीमती इंसानियत"
मूंदी के अश्विन दलाल ने लौटाई एक लाख की सोने की पायली, महिला ने कहा – ये इंसान नहीं, भगवान के भेजे फरिश्ते हैं
किसी ने सही कहा है — इंसानियत अगर दिल में हो, तो इंसान देवता बन जाता है।
ऐसी ही एक सच्ची और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है मध्यप्रदेश के छोटे से नगर मूंदी से, जहाँ नगर परिषद में कार्यरत एक ईमानदार कर्मचारी अश्विन दलाल ने इंसानियत की एक मिसाल कायम कर दी।
माँ रेणुका दरबार में रेणुका चौदस पर लगे विशाल मेले में, हजारों की भीड़ के बीच ज़मीन पर उन्हें एक सोने की कीमती पायली मिली। बाजार में इसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये आँकी गई। लेकिन अश्विन दलाल ने एक पल भी देर न करते हुए इसका मालिक खोजने की ठान ली।
उन्होंने न केवल मैदान में पूछताछ की, बल्कि माँ रेणुका समिति को सूचित किया, और लगातार कई दिनों तक आसपास के लोगों से संपर्क कर अपील करते रहे — "जिसकी भी ये पायली गुम हुई हो, वह मुझसे संपर्क करे।"
कुछ दिनों बाद उन्हें सूचना मिली कि यह पायली खंडवा जिले के ग्राम करोली निवासी श्री कोमल सिंह राजपूत की पत्नी गायत्री बाई राजपूत की थी। गायत्री देवी माँ रेणुका के दर्शन के लिए मेले में आई थीं और उसी दौरान पायली गुम हो गई थी।
जब गायत्री देवी ने अश्विन दलाल से संपर्क किया, तो उन्होंने उन्हें वह पायली लौटाते हुए एक सच्चे सेवक की तरह सिर झुकाकर कहा – "ये मेरा फर्ज़ था।"
अपनी पायली पाकर गायत्री देवी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा –
"ऐसे लोग अब भी ज़िंदा हैं, ये देख कर दिल भर आया। अश्विन दलाल हमारे लिए ईश्वर के भेजे हुए फरिश्ते हैं।"
इस नेक कार्य की सराहना माँ रेणुका समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने दिल खोलकर की है।
सांसद प्रतिनिधि चन्द्रमोहन राठौर ने कहा –
"अश्विन दलाल की ईमानदारी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। जब तक ऐसे लोग हैं, तब तक भरोसा भी ज़िंदा है।
ये खबर सिर्फ एक गुम हुई पायली की नहीं,
ये कहानी है उस विश्वास की –
जो आज भी कुछ लोगों की ईमानदारी में साँस ले रहा है।
किसी ने सही कहा है — इंसानियत अगर दिल में हो, तो इंसान देवता बन जाता है।
ऐसी ही एक सच्ची और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है मध्यप्रदेश के छोटे से नगर मूंदी से, जहाँ नगर परिषद में कार्यरत एक ईमानदार कर्मचारी अश्विन दलाल ने इंसानियत की एक मिसाल कायम कर दी।
माँ रेणुका दरबार में रेणुका चौदस पर लगे विशाल मेले में, हजारों की भीड़ के बीच ज़मीन पर उन्हें एक सोने की कीमती पायली मिली। बाजार में इसकी कीमत लगभग एक लाख रुपये आँकी गई। लेकिन अश्विन दलाल ने एक पल भी देर न करते हुए इसका मालिक खोजने की ठान ली।
उन्होंने न केवल मैदान में पूछताछ की, बल्कि माँ रेणुका समिति को सूचित किया, और लगातार कई दिनों तक आसपास के लोगों से संपर्क कर अपील करते रहे — "जिसकी भी ये पायली गुम हुई हो, वह मुझसे संपर्क करे।"
कुछ दिनों बाद उन्हें सूचना मिली कि यह पायली खंडवा जिले के ग्राम करोली निवासी श्री कोमल सिंह राजपूत की पत्नी गायत्री बाई राजपूत की थी। गायत्री देवी माँ रेणुका के दर्शन के लिए मेले में आई थीं और उसी दौरान पायली गुम हो गई थी।
जब गायत्री देवी ने अश्विन दलाल से संपर्क किया, तो उन्होंने उन्हें वह पायली लौटाते हुए एक सच्चे सेवक की तरह सिर झुकाकर कहा – "ये मेरा फर्ज़ था।"
अपनी पायली पाकर गायत्री देवी की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा –
"ऐसे लोग अब भी ज़िंदा हैं, ये देख कर दिल भर आया। अश्विन दलाल हमारे लिए ईश्वर के भेजे हुए फरिश्ते हैं।"
इस नेक कार्य की सराहना माँ रेणुका समिति, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और आम जनता ने दिल खोलकर की है।
सांसद प्रतिनिधि चन्द्रमोहन राठौर ने कहा –
"अश्विन दलाल की ईमानदारी समाज के लिए प्रेरणास्त्रोत है। जब तक ऐसे लोग हैं, तब तक भरोसा भी ज़िंदा है।
ये खबर सिर्फ एक गुम हुई पायली की नहीं,
ये कहानी है उस विश्वास की –
जो आज भी कुछ लोगों की ईमानदारी में साँस ले रहा है।विज्ञापन
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