: 25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित करने पर बवाल, सम्यक अभियान ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
Barkat Qureshi / Thu, Jun 26, 2025 / Post views : 952
25 जून को ‘संविधान हत्या दिवस’ घोषित करने पर बवाल, सम्यक अभियान ने हाईकोर्ट में दायर की याचिका
संवाददाता इस्हाक़ गौरी मुंदी
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 25 जून 1975 को संविधान की हत्या बताया जाना और उस दिन को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी किए जाने पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। यह अधिसूचना 11 जुलाई 2024 को भारत के राजपत्र (असाधारण) में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव जी. पार्थसारथी के हस्ताक्षर से प्रकाशित हुई थी।
अगले ही दिन केंद्रीय गृहमंत्री ने ट्वीट कर इस निर्णय की जानकारी देश को दी, जिसे प्रधानमंत्री ने रिट्वीट कर अपना समर्थन जताया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस समर्थित सम्यक अभियान के राष्ट्रीय प्रमुख, सुप्रसिद्ध लेखक भास्कर राव रोकड़े ने दिल्ली, नागपुर, भोपाल, मुंबई, लखनऊ और जयपुर में आयोजित पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से इस निर्णय को "संवैधानिक संकट उत्पन्न करने वाला" और "नासमझी से भरा" करार दिया।
🔹 रोकड़े ने दाखिल की याचिका
श्री रोकड़े ने इस फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसे “बड़ी भूल” बताया था और शीघ्र सुधार की अपील की थी।
🔹 "इंदिरा ज्योति अभियान" की शुरुआत
देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के विचारों और कार्यों को आम जन तक पहुंचाने हेतु श्री रोकड़े ने चार वर्षीय "इंदिरा ज्योति अभियान" भी प्रारंभ किया है।
🔹 खंडवा में गूंजा विरोध का स्वर
इस संबंध में जानकारी देते हुए सम्यक अभियान व इंदिरा ज्योति अभियान के खंडवा जिला समन्वयक एवं कांग्रेस नेता गजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि 1975 के आपातकाल को "संविधान की हत्या" कहना ऐतिहासिक तथ्यों से भटकाव है। उन्होंने कहा कि उस समय भारत विरोधी ताकतें देश में अस्थिरता फैलाना चाहती थीं, जिनके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति ने अनुमोदित किया।
🔹 कानून का दुरुपयोग या जरूरत?
सोलंकी ने स्पष्ट किया कि मीसा (MISA) और भारत रक्षा कानून (DIR) भारत-पाक युद्ध के समय लागू हुए थे, और जांच आयोगों—विशेषकर शाह आयोग—की रिपोर्टों में संविधान की हत्या जैसी कोई बात प्रमाणित नहीं हुई। केवल कुछ स्थानों पर कानून के दुरुपयोग की आशंका ज़रूर जताई गई थी, लेकिन वह भी निवारक निरोध अधिनियम 1948 के अंतर्गत की गई कार्रवाई थी।
🔹 संविधान बदलने की आशंका
सोलंकी ने आरोप लगाया कि संविधान हत्या दिवस घोषित कर सरकार नया संविधान लागू करने की भूमिका बना रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बीच यह आशंका फैल रही है कि डॉ. अंबेडकर के स्थान पर अब कोई दूसरा नाम संविधान निर्माता के रूप में स्थापित करने की तैयारी हो रही है।
🔹 "हिंदू राष्ट्र संविधान" की आशंका
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यह फैसला 25 धर्माचार्यों द्वारा तैयार 501 पृष्ठीय तथाकथित "हिंदू राष्ट्र संविधान" को लागू करने की योजना का एक हिस्सा हो सकता है।
🛑 सोलंकी ने सरकार को चेताया कि यदि इस निर्णय को शीघ्र वापस नहीं लिया गया, तो देशभर में जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।
संवाददाता इस्हाक़ गौरी मुंदी
भारत सरकार के गृह मंत्रालय द्वारा 25 जून 1975 को संविधान की हत्या बताया जाना और उस दिन को "संविधान हत्या दिवस" के रूप में घोषित करने की अधिसूचना जारी किए जाने पर देशभर में तीखी प्रतिक्रिया सामने आ रही है। यह अधिसूचना 11 जुलाई 2024 को भारत के राजपत्र (असाधारण) में गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव जी. पार्थसारथी के हस्ताक्षर से प्रकाशित हुई थी।
अगले ही दिन केंद्रीय गृहमंत्री ने ट्वीट कर इस निर्णय की जानकारी देश को दी, जिसे प्रधानमंत्री ने रिट्वीट कर अपना समर्थन जताया। इसके तुरंत बाद कांग्रेस समर्थित सम्यक अभियान के राष्ट्रीय प्रमुख, सुप्रसिद्ध लेखक भास्कर राव रोकड़े ने दिल्ली, नागपुर, भोपाल, मुंबई, लखनऊ और जयपुर में आयोजित पत्रकार वार्ताओं के माध्यम से इस निर्णय को "संवैधानिक संकट उत्पन्न करने वाला" और "नासमझी से भरा" करार दिया।
🔹 रोकड़े ने दाखिल की याचिका
श्री रोकड़े ने इस फैसले के खिलाफ मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में याचिका दायर कर इस अधिसूचना पर रोक लगाने की मांग की है। साथ ही उन्होंने जुलाई 2024 में प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर इसे “बड़ी भूल” बताया था और शीघ्र सुधार की अपील की थी।
🔹 "इंदिरा ज्योति अभियान" की शुरुआत
देश की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी के विचारों और कार्यों को आम जन तक पहुंचाने हेतु श्री रोकड़े ने चार वर्षीय "इंदिरा ज्योति अभियान" भी प्रारंभ किया है।
🔹 खंडवा में गूंजा विरोध का स्वर
इस संबंध में जानकारी देते हुए सम्यक अभियान व इंदिरा ज्योति अभियान के खंडवा जिला समन्वयक एवं कांग्रेस नेता गजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि 1975 के आपातकाल को "संविधान की हत्या" कहना ऐतिहासिक तथ्यों से भटकाव है। उन्होंने कहा कि उस समय भारत विरोधी ताकतें देश में अस्थिरता फैलाना चाहती थीं, जिनके चलते तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल की सिफारिश की थी, जिसे राष्ट्रपति ने अनुमोदित किया।
🔹 कानून का दुरुपयोग या जरूरत?
सोलंकी ने स्पष्ट किया कि मीसा (MISA) और भारत रक्षा कानून (DIR) भारत-पाक युद्ध के समय लागू हुए थे, और जांच आयोगों—विशेषकर शाह आयोग—की रिपोर्टों में संविधान की हत्या जैसी कोई बात प्रमाणित नहीं हुई। केवल कुछ स्थानों पर कानून के दुरुपयोग की आशंका ज़रूर जताई गई थी, लेकिन वह भी निवारक निरोध अधिनियम 1948 के अंतर्गत की गई कार्रवाई थी।
🔹 संविधान बदलने की आशंका
सोलंकी ने आरोप लगाया कि संविधान हत्या दिवस घोषित कर सरकार नया संविधान लागू करने की भूमिका बना रही है। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के बीच यह आशंका फैल रही है कि डॉ. अंबेडकर के स्थान पर अब कोई दूसरा नाम संविधान निर्माता के रूप में स्थापित करने की तैयारी हो रही है।
🔹 "हिंदू राष्ट्र संविधान" की आशंका
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि यह फैसला 25 धर्माचार्यों द्वारा तैयार 501 पृष्ठीय तथाकथित "हिंदू राष्ट्र संविधान" को लागू करने की योजना का एक हिस्सा हो सकता है।
🛑 सोलंकी ने सरकार को चेताया कि यदि इस निर्णय को शीघ्र वापस नहीं लिया गया, तो देशभर में जनआंदोलन शुरू किया जाएगा।विज्ञापन
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