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: भीलवाड़ा की सरज़मीन पर मोहब्बतों का इज्तेमाई जश्न:26 जोड़ों के निकाह से महकी खुशियों की बस्ती

Barkat Qureshi / Wed, Apr 30, 2025 / Post views : 533

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भीलवाड़ा की सरज़मीन पर मोहब्बतों का इज्तेमाई जश्न:26 जोड़ों के निकाह से महकी खुशियों की बस्ती "माल-ओ-ज़र से नहीं, खिदमतों से नसीब बनते हैं;दौलत नहीं, दिलों से मिलती हैं आज़मतें।"
विशेष रिपोर्ट | संवाददाता: इस्हाक़ गौरी मुंदी आज भीलवाड़ा की आबोहवा में एक ही रंग घुला था — मोहब्बत, बरकत और खुशियों का।टोस के चांदेड परिवार — हाजी अहमद हुसैन मंसूरी (अल्फिया कन्फेक्शनरी), अली चांदेड, हाजी आरिफ चांदेड और रेहान चांदेड — की जानिब से आयोजित दूसरी मुफ्त इज्तेमाई शादी ने 26 ज़िंदगियों को नई राह, नई दुआ और एक नई पहचान बख्शी।जहाँ-जहाँ नज़र गई, वहाँ चेहरों पर रौनक, आँखों में चमक और दिलों से उठती दुआओं की मिठास थी।चांदेड परिवार की ओर से आए मेहमानों का इस्तकबाल साफा बांधकर और गुलपोशी कर किया गया। बिरादरी के तमाम हजरात ने इस नेक पहल की सराहना करते हुए नेक दुआओं से नवाज़ा। रौनक-ए-निकाह: इस ऐतिहासिक आयोजन में 7 जोड़े मुस्लिम तेली बिरादरी से और 19 जोड़े अन्य मुस्लिम समाज से थे। हर जोड़े को चांदेड परिवार की ओर से घर-गृहस्थी का मुकम्मल सामान बतौर तोहफा अता किया गया, ताकि नई जिंदगी की शुरुआत किसी भी कमी के बिना हो सके। शहर काज़ी साहब ने कुरआनी आयतों और खुतबे की बरकतों के साथ निकाह की रस्म अदा करवाई। विभिन्न इमाम साहिबानों ने इस पाक बंधन को दुआओं से सींचा जब 26 दूल्हों ने सेहरे पहनकर, और दुल्हनों ने सादगी और शान के साथ सजकर, तीन बार "कुबूल है, कुबूल है, कुबूल है" कहा — तो पूरा माहौल जैसे खुशियों की सदाओं से गूंज उठा।  
"हर 'कुबूल है' के साथ दिलों में उमंग जागी और आसमान पर दुआओं के फूल बरसते महसूस हुए।"
  खुशियों की बारिश: निकाह के बाद जब गले मिलने का सिलसिला शुरू हुआ, तो हर शख्स जैसे दुआओं का गुलदस्ता बन गया। लबों पर मुबारकबाद, दिलों में मोहब्बत और आँखों में कशिश — यह मंजर हर दिल को छू गया।   "कुछ सोचकर खुदा ने भेजा है तुझे मेरी जिंदगी में, मुझसे तेरा यूं मिलना इत्तेफाक नहीं हो सकता..." यह अहसास महफ़िल के हर कोने में महसूस होता रहा। --- चांदेड परिवार: खिदमत की मिसाल   टोस के चांदेड परिवार ने बिना किसी दिखावे के, सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए यह नेक काम अंजाम देकर इंसानियत और मोहब्बत की मिसाल पेश की। हज़ारों की भीड़ — जिसमें हर उम्र और तबके के लोग शामिल थे — इस इज्तेमाई महफ़िल की गवाह बनी।   > "जहाँ इखलास होता है, वहाँ रहमतें बरसती हैं; जहाँ दिल जोड़ते हैं, वहाँ खुदा भी मुस्कुराता है।" --- मुख्य संदेश:   "दौलत से नहीं, दुआओं से बनते हैं घर; खिदमत से रोशन होती हैं ज़िंदगियाँ।" --- सम्मान और सराहना:   कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने पहुंचे कांग्रेस पार्टी के ज़िला अध्यक्ष श्री अक्षय त्रिपाठी जी ने इस प्रयास को सराहते हुए कहा — "यह आयोजन न सिर्फ एक निकाह, बल्कि सामाजिक एकता और सेवा का प्रतीक है। भीलवाड़ा की मिट्टी में मोहब्बत की नई इबारत लिखी जा रही है।" उन्होंने सभी नवयुगलों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रार्थना की। --- समाज की भागीदारी:   इस आयोजन को सफल बनाने में भीलवाड़ा बिरादरी और मुस्लिम समाज के लोगों ने दिल से सहयोग किया। चांदेड परिवार ने सभी का शुक्रिया अदा करते हुए आयोजन की सफलता का श्रेय पूरी बिरादरी को दिया और अल्लाह का शुक्र बजा लाया। --- अख़्तिताम:   भीलवाड़ा की गलियों में आज मोहब्बत, इखलास और इंसानियत का नया इतिहास लिखा गया — जहाँ 26 घरों में नई जिंदगी की रोशनी फैली, जहाँ हर दिल तक दुआओं की गूंज पहुँची, और जहाँ खुदा की रहमत हर लम्हे में महसूस हुई।

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