: आस्था वेलफेयर सोसायटी ने मनाया मानवाधिकार दिवस
Barkat Qureshi / Tue, Dec 10, 2024 / Post views : 185
"हमारे अधिकार,हमारा भविष्य, अभी है"
आस्था वेलफेयर सोसायटी ने मनाया मानवाधिकार दिवस
खण्डवा(लोकेंद्र तिरोले/6265720067)10 दिसम्बर को आस्था वेलफेयर सोसायटी द्वारा बचपन स्कूल में मानव अधिकार दिवस मनाया गया। कार्यक्रम संयोजक सुश्री मोना दफ़्तरी ने बताया कि *"हमारे अधिकार,हमारा भविष्य, अभी है" यह थीम है राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की जिस पर यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मानव अधिकार आयोग के पूर्व जिला संयोजक नारायण बाहेती ने बताया कि 10 दिसम्बर 2024 की थीम "हमारे अधिकार,हमारा भविष्य, अभी है" इससे यह बात ध्यान में आती है कि मानवाधिकार हमारे रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं। यह वह दिन है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकारो की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) को अपनाया था। हमारी राष्ट्रीयता,लिंग,राष्ट्रीय या जातीय मूल,रंग,धर्म,भाषा या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो। ये सबसे बुनियादी अधिकार-जीवन के अधिकार से लेकर उन अधिकारों तक है जो जीवन को जीने लायक बनाते हैं, जैसे भोजन, शिक्षा, काम, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के अधिकार।
*संयोजक मोना दफ़्तरी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए घर के सभी सदस्यों का ध्यान रखने,विशेष कर बुजुर्गो की देखभाल और सम्मान किए जाने के विषय पर जोर दिया, हमारी संस्कृति हमारी धरोहर को संजोकर रखा जाने के विषय पर आपसी समझ साझा की गई।
इस कार्यक्रम में म प्र मानव अधिकार आयोग के पूर्व जिला संयोजक नारायण बाहेती, किशोर न्याय बोर्ड के पूर्व सदस्य अनिल बाहेती व मुकीत खान, यूनिसेफ स्टेट कंसलटेंट राहुल राठवे, रश्मि रूप नारायण डोंगरे, पुष्पा कनोजिया एवम समस्त स्कूल स्टाफ सम्मिलित हुए।
खण्डवा(लोकेंद्र तिरोले/6265720067)10 दिसम्बर को आस्था वेलफेयर सोसायटी द्वारा बचपन स्कूल में मानव अधिकार दिवस मनाया गया। कार्यक्रम संयोजक सुश्री मोना दफ़्तरी ने बताया कि *"हमारे अधिकार,हमारा भविष्य, अभी है" यह थीम है राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग की जिस पर यह कार्यक्रम संपन्न हुआ।
मानव अधिकार आयोग के पूर्व जिला संयोजक नारायण बाहेती ने बताया कि 10 दिसम्बर 2024 की थीम "हमारे अधिकार,हमारा भविष्य, अभी है" इससे यह बात ध्यान में आती है कि मानवाधिकार हमारे रोजमर्रा के जीवन को कैसे प्रभावित करते हैं। यह वह दिन है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1948 में मानवाधिकारो की सार्वभौमिक घोषणा (यूडीएचआर) को अपनाया था। हमारी राष्ट्रीयता,लिंग,राष्ट्रीय या जातीय मूल,रंग,धर्म,भाषा या कोई अन्य स्थिति कुछ भी हो। ये सबसे बुनियादी अधिकार-जीवन के अधिकार से लेकर उन अधिकारों तक है जो जीवन को जीने लायक बनाते हैं, जैसे भोजन, शिक्षा, काम, स्वास्थ्य और स्वतंत्रता के अधिकार।
*संयोजक मोना दफ़्तरी ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए घर के सभी सदस्यों का ध्यान रखने,विशेष कर बुजुर्गो की देखभाल और सम्मान किए जाने के विषय पर जोर दिया, हमारी संस्कृति हमारी धरोहर को संजोकर रखा जाने के विषय पर आपसी समझ साझा की गई।
इस कार्यक्रम में म प्र मानव अधिकार आयोग के पूर्व जिला संयोजक नारायण बाहेती, किशोर न्याय बोर्ड के पूर्व सदस्य अनिल बाहेती व मुकीत खान, यूनिसेफ स्टेट कंसलटेंट राहुल राठवे, रश्मि रूप नारायण डोंगरे, पुष्पा कनोजिया एवम समस्त स्कूल स्टाफ सम्मिलित हुए।विज्ञापन
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