: किसान त्रस्त, सरकार मस्त! मूंग खरीदी में भारी अव्यवस्था, पंजीयन के नाम पर हो रहा किसान का अपमान
Barkat Qureshi / Mon, Jun 23, 2025 / Post views : 156
📰 किसान त्रस्त, सरकार मस्त!
मूंग खरीदी में भारी अव्यवस्था, पंजीयन के नाम पर हो रहा किसान का अपमान
संवाददाता ईस्हाक गौरी मूंदी
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव गजेन्द्र सिह सोलकी ने प्रदेश सरकार पर मूंग की फसल खरीदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बड़े दावे के साथ मूंग खरीदी की घोषणा की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान पंजीयन केंद्रों पर भटक रहे हैं और सिस्टम "तकनीकी गड़बड़ी" की ढाल में छिपा बैठा है। बारिश शुरू हो चुकी है और खेतों में कटकर तैयार पड़ी मूंग की फसल को बेचने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। बेचारा किसान परेशान हाल, बेहाल, लाचार है — और सरकार खामोश है।
🔍 गिरदावरी में दर्ज, सिस्टम में गायब — कौन देगा जवाब?
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के महामंत्री गजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि ये कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता है। किसानों की मूंग फसल गिरदावरी में साफ दर्ज है, लेकिन जब पंजीयन की बात आती है, तो सिस्टम उन्हें पहचानने से इंकार कर देता है।
“किसान अपने हक के लिए पटवारी और पंजीयन केंद्रों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर दरवाज़े पर सिर्फ बहाना मिलता है। क्या यही है किसान हितैषी शासन?” – गजेंद्र सिंह सोलंकी
📣 किसान कांग्रेस की खुली चेतावनी
किसान कांग्रेस ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि :
तकनीकी खामियों को जल्द ही दूर किया जाए।
हर किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो।
खरीदी केंद्रों पर फसल की तुलाई, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दी जाए।
यदि प्रशासन ने लापरवाही जारी रखी, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
🌧️ बारिश की मार + खरीदी में देर = फसल बर्बादी तय
बारिश के चलते खेतों में पड़ी मूंग भीगने लगी है। यदि तुरंत खरीदी शुरू नहीं हुई, तो फसल सड़ जाएगी और किसान को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
🚨 खाद की किल्लत से अन्नदाता बेहाल
गजेंद्र सिंह ने खाद संकट को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि:
“किसान को ना खाद मिल रही, ना दाम, ना सम्मान। हर बार किसान को ही बलि का बकरा बना दिया जाता है।”
किसान कांग्रेस ने माँग की है कि:
प्रदेशभर में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
वितरण के स्पष्ट और पारदर्शी मापदंड तय हों।
बिचौलियों और कालाबाजारी पर सख़्त कार्रवाई हो।
📌 यह सिर्फ मूंग की लड़ाई नहीं है, यह किसान के सम्मान की लड़ाई है।
सरकार को अब जवाब देना होगा — सिर्फ घोषणाओं से पेट नहीं भरता।
संवाददाता ईस्हाक गौरी मूंदी
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव गजेन्द्र सिह सोलकी ने प्रदेश सरकार पर मूंग की फसल खरीदी पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने बड़े दावे के साथ मूंग खरीदी की घोषणा की थी, लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि किसान पंजीयन केंद्रों पर भटक रहे हैं और सिस्टम "तकनीकी गड़बड़ी" की ढाल में छिपा बैठा है। बारिश शुरू हो चुकी है और खेतों में कटकर तैयार पड़ी मूंग की फसल को बेचने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा। बेचारा किसान परेशान हाल, बेहाल, लाचार है — और सरकार खामोश है।
🔍 गिरदावरी में दर्ज, सिस्टम में गायब — कौन देगा जवाब?
किसान कांग्रेस के प्रदेश महासचिव एवं जिला कांग्रेस कमेटी (ग्रामीण) के महामंत्री गजेंद्र सिंह सोलंकी ने कहा कि ये कोई साधारण गड़बड़ी नहीं, बल्कि व्यवस्था की असफलता है। किसानों की मूंग फसल गिरदावरी में साफ दर्ज है, लेकिन जब पंजीयन की बात आती है, तो सिस्टम उन्हें पहचानने से इंकार कर देता है।
“किसान अपने हक के लिए पटवारी और पंजीयन केंद्रों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर दरवाज़े पर सिर्फ बहाना मिलता है। क्या यही है किसान हितैषी शासन?” – गजेंद्र सिंह सोलंकी
📣 किसान कांग्रेस की खुली चेतावनी
किसान कांग्रेस ने प्रशासन को कड़ी चेतावनी दी है कि :
तकनीकी खामियों को जल्द ही दूर किया जाए।
हर किसान का पंजीयन सुनिश्चित हो।
खरीदी केंद्रों पर फसल की तुलाई, सुरक्षा और सम्मान की गारंटी दी जाए।
यदि प्रशासन ने लापरवाही जारी रखी, तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे।
🌧️ बारिश की मार + खरीदी में देर = फसल बर्बादी तय
बारिश के चलते खेतों में पड़ी मूंग भीगने लगी है। यदि तुरंत खरीदी शुरू नहीं हुई, तो फसल सड़ जाएगी और किसान को भारी आर्थिक नुकसान होगा।
🚨 खाद की किल्लत से अन्नदाता बेहाल
गजेंद्र सिंह ने खाद संकट को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि:
“किसान को ना खाद मिल रही, ना दाम, ना सम्मान। हर बार किसान को ही बलि का बकरा बना दिया जाता है।”
किसान कांग्रेस ने माँग की है कि:
प्रदेशभर में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
वितरण के स्पष्ट और पारदर्शी मापदंड तय हों।
बिचौलियों और कालाबाजारी पर सख़्त कार्रवाई हो।
📌 यह सिर्फ मूंग की लड़ाई नहीं है, यह किसान के सम्मान की लड़ाई है।
सरकार को अब जवाब देना होगा — सिर्फ घोषणाओं से पेट नहीं भरता।विज्ञापन
विज्ञापन