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: खंडवा में सर्व समाज का आक्रोश—हरदा लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग राजपूत, ब्राह्मण, पटेल, गुर्जर समाज व कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग

Barkat Qureshi / Sat, Jul 19, 2025 / Post views : 250

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खंडवा में सर्व समाज का आक्रोश—हरदा लाठीचार्ज के विरोध में सड़कों पर उतरे सैकड़ों लोग राजपूत, ब्राह्मण, पटेल, गुर्जर समाज व कांग्रेस ने किया प्रदर्शन, दोषी अधिकारियों के निलंबन की मांग

 संवाददाता – इस्हाक गौरी मूंदी

  हरदा में करणी सेना के शांतिपूर्ण आंदोलन पर पुलिस द्वारा की गई कथित बर्बर कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को खंडवा में सर्व समाज ने एकजुट होकर विरोध प्रदर्शन किया। राजपूत समाज, कुनबी पटेल समाज, सर्व ब्राह्मण समाज, गुर्जर समाज सहित कांग्रेस पार्टी के नेताओं व कार्यकर्ताओं ने करणी सेना के समर्थन में मोर्चा संभालते हुए इस घटना को लोकतंत्र पर सीधा हमला करार दिया। खंडवा के स्टेडियम मैदान में जिलेभर से बड़ी संख्या में समाजजन एकत्रित हुए। इसके पश्चात सभी ने रैली की शक्ल में "हरदा प्रशासन मुर्दाबाद", "लोकतंत्र बचाओ" जैसे नारों के साथ कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकाला और वहां पहुंचकर मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में दोषी अधिकारियों की न्यायिक जांच व तत्काल निलंबन की मांग की गई। 🔹 प्रमुख प्रतिनिधियों की भागीदारी प्रदर्शन में शामिल प्रमुख समाजजनों में थे: पंकज राज पूरनी, गजेन्द्र सिंह सोलंकी, महेंद्र सिंह, ठाकुर राजनारायण सिंह, कुवर उत्तमपाल सिह, जितेंद्र सिंह चौहान, रामपाल सिंह, वीरेंद्र सिंह तोमर, सुरजीत सिंह, प्रवीण सिंह, शिवा दादा, राधेश्याम सिंह, बबलू रजनी, मुल्लू राठौर, सुनील आर्य, नारायण सिंह, आलोक रावत समेत अन्य बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि एवं समाजजन मौजूद रहे।   🔹 “यह लोकतंत्र नहीं, तानाशाही है” ठाकुर राजनारायण सिंह, नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर, कुंवर उत्तमपाल सिंह, कांग्रेस नेता नारायण सिंह तोमर और सुनील आर्य ने अपने संबोधन में घटना की तीखी निंदा करते हुए कहा कि — "क्या देश के संविधान में यह लिखा है कि जनता अपनी बात नहीं रख सकती? हरदा में जो हुआ वह लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या है। शांतिपूर्ण आंदोलनकारियों पर लाठियां बरसाई गईं, आंसू गैस छोड़ी गई, महिलाओं-बुजुर्गों को भी नहीं बख्शा गया। ओर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ का नारा देने वाली सरकार ने छात्रावासों में घुसकर छात्राओं को जबरन बाहर निकाला और समाज की धर्मशाला में तोड़फोड़ करवाई। आखिर ऐसी अमानवीय कार्रवाई का आदेश किसने दिया?"   ओर कहा कि हरदा की घटना ने अंग्रेजी हुकूमत के जलियांवाला बाग हत्याकांड की याद दिला दी है। जब सत्ता की लाठी जनता की आवाज़ को दबाने लगे, तब वह लोकतंत्र नहीं रह जाता।"   🔹 चेतावनी: कार्रवाई नहीं हुई तो उग्र होगा आंदोलन प्रदर्शनकारियों ने एक स्वर में चेतावनी दी कि यदि दोषियों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो यह आंदोलन और व्यापक एवं उग्र रूप ले सकता है। हर समाज इस दमन के खिलाफ एकजुट है और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष का संकल्प ले चुका है।

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