: दोस्त
Barkat Qureshi / Sun, Aug 3, 2025 / Post views : 832
दोस्त
तुम दोस्त कहते हो तो भरोसा रखो मैं जानता हूं तुम्हारे लिए अनुकूल अच्छा या बुरा... मैं सुन सकता हूं तुम्हारी हर सिसकी चाहे तुम कुछ न बताओ मैं समझता हूं तुम्हारी अदृश्य परेशानियां हर कुछ तो बताया नहीं जाता सिर्फ महसूस किया जा सकता है... तुम्हारी हर तकलीफ मैं मुझे भी दर्द होता है और मिलती है खुशी तुम्हारी मुस्कुराहट से तुम जो भी मुझको समझो पर पाओगे हर समय मुझे अपने साथ जब भी तुम पर आएगी कोई भी परेशानी...
स्वरचित
नीरज पाराशरविज्ञापन
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