: बेघर हुए लोगों की दास्तां.... अपने घरों के मलबे में दबा सामान खोज रहे पीड़ित परिवार
Barkat Qureshi / Sun, Jun 15, 2025 / Post views : 146
बेघर हुए लोगों की दास्तां....
अपने घरों के मलबे में दबा सामान खोज रहे पीड़ित परिवार
बेघर हुए लोगों पर क्या बीत रही है न तो प्रशासन को चिंता न ही समाज के ठेकेदारों को, जिला बैतूल माल और वक्फ बोर्ड की भूमि पर हो सकता है विस्थापन
शकर तालाब क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के नाम पर न केवल मकानों को तोड़ा गया बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी बेरहमी से कुचला गया। अतिक्रमण की भूमि पर बरसों से जमे लोगों को बेदखल करने से पहले उनके पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई गई। पढ़िए बेघर हुए लोगों की कहानी उन्हीं की जुबानी
खंडवा शकर तालाब क्षेत्र में सरकार के बुल्डोजर की तबाही से सैकड़ों मकान जमींदोज हो गए। लोगों के मकान टूटने के साथ ही कई परिवार भी टूट गए। जो भाई कल तक साथ रहते थे अब वे दर-दर भटकर कर मकान तलाश रहे है, बेघर हुए लोगों पर क्या बीत रही है न तो प्रशासन को इसकी चिंता है न ही समाज के ठेकेदारों को, समाज के कुछ युवक अपने पैसों से सुबह से भोजन बनाकर करीब 100 लोगों को खिला रहे हैं। दूसरी ओर जिन लोगों ने हाई कोर्ट से स्टे लाने के नाम पर चंदा किया था वह अब नजर नहीं आ रहे। चंदा कितना हुआ? चंदे का पैसों का इस्तेमाल कहां पर किया? वकील की फीस वगैरह कई सवाल है मलबे में ही दबकर रह गए। पीड़ित लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि अब जाने दो हमारा तो मकान चला गया घर का सामान बेचकर चंदा टीम को पैसा दिया था। अब कहने से कुछ नहीं होगा उन लोगों का अगर नाम बताएंगे तो वो लोग हमसे लड़ने आ जाएंगे हमारी तो यह स्थिति है कि सिर छिपाने और खाने के ठिकाने नहीं है।
बेघर हुए लोगों की कहानी उन्हीं की जुबानी…
10 साल के पोते को ऐसा डंडा मारा कि हाथ में लगे 8 टांके
मेरा नाम नसीम बी पति मुस्तकीम इसी जगह पर मैं और मेरे तीन लड़के रहते थे मकान टूटने के बाद से यहीं मलबे के ढेर पर बैठी हूं। खाना बांटने वाले सुबह-शाम लाकर देते है वही खाना खाते और यही पर सो जाते है।
मकान तोड़ने वाले अधिकारियों ने सुबह छह बजे घर से बाहर कर दिया। पानी भी नहीं पीने दिया मेरे 10 साल के पोते मेहफूज के हाथ पर पुलिस वाले ने ऐसा लट्ठ मारा कि हाथ से खून बह निकला। उसे पुलिस वाले ही एंबुलेंस से अस्पताल लेकर गए थे उसके हाथ में 8 टांके लगे।मेरे तीन लड़के मुजफ्फर मुश्ताक और मेहबूब मेरे तीनों लड़के मजदूरी करते है वो सामने ही अलग-अलग रहते है मैं जहां बैठी हूं यहां मेरा ही मकान था। मलबे में हमारे घर की छत पर लगे टीन के पतरे और छत का पंखा दबा हुआ है। मकान का जरूरी सामान बाहर निकालने का समय भी नहीं दिया गया। कार्रवाई वाले दिन यहां से निकालकर रामेश्वर रोड तक पुलिस वाले पैदल छोड़कर आए फिर हम परदेशीपुरा से पैदल इमलीपुरा तक आए तब तक मकान मलबा बन चुका था। सिर छिपाने की जगह नहीं है ये देखों आपके सामने ही खुले में बैठे हुए है ये पॉलिथीन की थैली में खाना आया है। बच्चों को कॉलोनी में किसी ने कुछ दिन के लिए आसरा दिया है। बीसी डाल डालकर मेहनत से मकान बनाया था।स्टे लेने के लिए हमने पैसे दिए थे ये सामने घर वालों ने हमसे साइन करवाई थी। 500 रुपए एक बाद दिए 3000 रुपए पार्षद ने लिया।
अम्मा खैरियत चाहती है तो मीडिया के सामने कुछ मत बोल
नसीम जब हकीकत बयां कर रही थी तभी उसका मुजफ्फर वहां आ जाता है वह कहता है कि अम्मा, अगर अपनी जान की खैरियत चाहती है तो कुछ भी मत बोल ये लोग मीडिया वाले है भैया तुम लोग तो छाप दोगे लेकिन फिर वह लोग हमारे साथ मारपीट करेंगे। वह बहुत खतरनाक लोग है अब हम कुछ नहीं बताएंगे भैया ये मेरी मां तो ना समझ है इसे कुछ पता नहीं है लेकिन मेरे छोटे बच्चे है वो लोग मेरे पैर तोड़ देंगे। भैया मेरा निवेदन है कि ये सब कुछ जो भी आपने मोबाइल में रिकार्ड किया है इसे छापना मत न ही मोबाइल पर चलाना। नसीम बाई बोली भैया जाने दो वो लोग मेरे बच्चे को मार देंगे। इसी के लड़के के हाथ में आठ टांके आए।
स्टे के लिए दो बार फार्म भरा नहीं बचा पाई मकान
मेरा नाम अफसाना बेगम पति शकील है, पति बीमार रहता है पहले मजदूरी करते थे अब उनसे काम नहीं बनता तो मैं ही काम करने जाती हूं हम यहां पर 35 साल से रह रहे थे। इसी बस्ती में ब्याहकर आई थी।
यहां गुड्डू मामा के साथ एक वकील आया था उसको हमने एक बार 450 रुपए दिए और फिर 150 रुपए टिकट के लिए दिए थे। पैसे देने के बाद कुछ लोगों के स्टे आए तो हमने भी हमारे स्टे के बारे में पता कि तो चला कि हमारा स्टे निरस्त हो गया, फिर हमने दूसरी बार कोशिश की फिर इसी बीच नगर निगम वालों न मकान तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया। हम महीना भर पहले दोबारा स्टे के लिए फार्म भरा था। अब तक सुनवाई नहीं हुई और इसी बीच मकानों को तोड़ दिया गया। अब किराये का मकान नहीं मिल रहा है वो देखों सामने पर्दा डला है वह मेरा ही है।
निगम अधिकारी बोले यह स्टे नकली है
शनिवार दोपहर मुख्य सड़क पर खड़े मलबे में अपना मकान एक दोस्त को बता रहे मोहम्मद सिराज ने कहा कि
शकर तालाब क्षेत्र में मैंने स्टे के लिए एक हजार रुपए दिए थे स्टे की कॉपी हाथ में मिली तो बहुत खुश था। जब नगर निगम के अधिकारी आए मेरे मकान पर आए तो मैंने उन्हें स्टे की कॉपी बताई तो देखने के बाद उन्होंने कहा कि यह कॉपी तो नकली है यह नकली आर्डर है मैंने भी मुहल्ले वालों के साथ स्टे के लिए चंदा दिया था।
बेघर हुए लोगों को भोजन-पानी की मदद कर रहे युवक
बेघर हुए लोगों सिर छिपाने की जगह है न ही खाने पीने की कोई व्यवस्था ऐसे में इमलीपुरा सहित आसपास के लोग सुबह और शाम भोजन पानी पीड़ित लोगों तक पहुंचा रहे है। कुछ लोगों ने अपना मकान भी लोगों के लिए खोल दिया है।
वक्फ बोर्ड की खाली जमीन पर हो विस्थापन
कांग्रेस पार्षद शब्बीर कादरी व कहारवाड़ी वार्ड के निर्दलीय पार्षद अशफाक सीगड़ ने कहा कि बेघर हुए लोगों के लिए वक्फ बैतूल माल की जगहों पर विस्थापन होना चाहिए। जब तक पीड़ित परिवारों का इंतजाम नहीं होता उन्हें खानशाह वार्ड व लाल चौकी के पास स्कूल के पीछे खाली पड़ी जमीन पर विस्थापित करना चाहिए। जिला बैतूल माल कमेटी और वक्फ बोर्ड कमेटी को इस नेक काम के लिए आगे आकर काम करना चाहिए।
शकर तालाब क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के नाम पर न केवल मकानों को तोड़ा गया बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी बेरहमी से कुचला गया। अतिक्रमण की भूमि पर बरसों से जमे लोगों को बेदखल करने से पहले उनके पुनर्वास की कोई योजना नहीं बनाई गई। पढ़िए बेघर हुए लोगों की कहानी उन्हीं की जुबानी
खंडवा शकर तालाब क्षेत्र में सरकार के बुल्डोजर की तबाही से सैकड़ों मकान जमींदोज हो गए। लोगों के मकान टूटने के साथ ही कई परिवार भी टूट गए। जो भाई कल तक साथ रहते थे अब वे दर-दर भटकर कर मकान तलाश रहे है, बेघर हुए लोगों पर क्या बीत रही है न तो प्रशासन को इसकी चिंता है न ही समाज के ठेकेदारों को, समाज के कुछ युवक अपने पैसों से सुबह से भोजन बनाकर करीब 100 लोगों को खिला रहे हैं। दूसरी ओर जिन लोगों ने हाई कोर्ट से स्टे लाने के नाम पर चंदा किया था वह अब नजर नहीं आ रहे। चंदा कितना हुआ? चंदे का पैसों का इस्तेमाल कहां पर किया? वकील की फीस वगैरह कई सवाल है मलबे में ही दबकर रह गए। पीड़ित लोगों से जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि अब जाने दो हमारा तो मकान चला गया घर का सामान बेचकर चंदा टीम को पैसा दिया था। अब कहने से कुछ नहीं होगा उन लोगों का अगर नाम बताएंगे तो वो लोग हमसे लड़ने आ जाएंगे हमारी तो यह स्थिति है कि सिर छिपाने और खाने के ठिकाने नहीं है।
बेघर हुए लोगों की कहानी उन्हीं की जुबानी…
10 साल के पोते को ऐसा डंडा मारा कि हाथ में लगे 8 टांके
मेरा नाम नसीम बी पति मुस्तकीम इसी जगह पर मैं और मेरे तीन लड़के रहते थे मकान टूटने के बाद से यहीं मलबे के ढेर पर बैठी हूं। खाना बांटने वाले सुबह-शाम लाकर देते है वही खाना खाते और यही पर सो जाते है।
मकान तोड़ने वाले अधिकारियों ने सुबह छह बजे घर से बाहर कर दिया। पानी भी नहीं पीने दिया मेरे 10 साल के पोते मेहफूज के हाथ पर पुलिस वाले ने ऐसा लट्ठ मारा कि हाथ से खून बह निकला। उसे पुलिस वाले ही एंबुलेंस से अस्पताल लेकर गए थे उसके हाथ में 8 टांके लगे।मेरे तीन लड़के मुजफ्फर मुश्ताक और मेहबूब मेरे तीनों लड़के मजदूरी करते है वो सामने ही अलग-अलग रहते है मैं जहां बैठी हूं यहां मेरा ही मकान था। मलबे में हमारे घर की छत पर लगे टीन के पतरे और छत का पंखा दबा हुआ है। मकान का जरूरी सामान बाहर निकालने का समय भी नहीं दिया गया। कार्रवाई वाले दिन यहां से निकालकर रामेश्वर रोड तक पुलिस वाले पैदल छोड़कर आए फिर हम परदेशीपुरा से पैदल इमलीपुरा तक आए तब तक मकान मलबा बन चुका था। सिर छिपाने की जगह नहीं है ये देखों आपके सामने ही खुले में बैठे हुए है ये पॉलिथीन की थैली में खाना आया है। बच्चों को कॉलोनी में किसी ने कुछ दिन के लिए आसरा दिया है। बीसी डाल डालकर मेहनत से मकान बनाया था।स्टे लेने के लिए हमने पैसे दिए थे ये सामने घर वालों ने हमसे साइन करवाई थी। 500 रुपए एक बाद दिए 3000 रुपए पार्षद ने लिया।
अम्मा खैरियत चाहती है तो मीडिया के सामने कुछ मत बोल
नसीम जब हकीकत बयां कर रही थी तभी उसका मुजफ्फर वहां आ जाता है वह कहता है कि अम्मा, अगर अपनी जान की खैरियत चाहती है तो कुछ भी मत बोल ये लोग मीडिया वाले है भैया तुम लोग तो छाप दोगे लेकिन फिर वह लोग हमारे साथ मारपीट करेंगे। वह बहुत खतरनाक लोग है अब हम कुछ नहीं बताएंगे भैया ये मेरी मां तो ना समझ है इसे कुछ पता नहीं है लेकिन मेरे छोटे बच्चे है वो लोग मेरे पैर तोड़ देंगे। भैया मेरा निवेदन है कि ये सब कुछ जो भी आपने मोबाइल में रिकार्ड किया है इसे छापना मत न ही मोबाइल पर चलाना। नसीम बाई बोली भैया जाने दो वो लोग मेरे बच्चे को मार देंगे। इसी के लड़के के हाथ में आठ टांके आए।
स्टे के लिए दो बार फार्म भरा नहीं बचा पाई मकान
मेरा नाम अफसाना बेगम पति शकील है, पति बीमार रहता है पहले मजदूरी करते थे अब उनसे काम नहीं बनता तो मैं ही काम करने जाती हूं हम यहां पर 35 साल से रह रहे थे। इसी बस्ती में ब्याहकर आई थी।
यहां गुड्डू मामा के साथ एक वकील आया था उसको हमने एक बार 450 रुपए दिए और फिर 150 रुपए टिकट के लिए दिए थे। पैसे देने के बाद कुछ लोगों के स्टे आए तो हमने भी हमारे स्टे के बारे में पता कि तो चला कि हमारा स्टे निरस्त हो गया, फिर हमने दूसरी बार कोशिश की फिर इसी बीच नगर निगम वालों न मकान तोड़ने का नोटिस जारी कर दिया। हम महीना भर पहले दोबारा स्टे के लिए फार्म भरा था। अब तक सुनवाई नहीं हुई और इसी बीच मकानों को तोड़ दिया गया। अब किराये का मकान नहीं मिल रहा है वो देखों सामने पर्दा डला है वह मेरा ही है।
निगम अधिकारी बोले यह स्टे नकली है
शनिवार दोपहर मुख्य सड़क पर खड़े मलबे में अपना मकान एक दोस्त को बता रहे मोहम्मद सिराज ने कहा कि
शकर तालाब क्षेत्र में मैंने स्टे के लिए एक हजार रुपए दिए थे स्टे की कॉपी हाथ में मिली तो बहुत खुश था। जब नगर निगम के अधिकारी आए मेरे मकान पर आए तो मैंने उन्हें स्टे की कॉपी बताई तो देखने के बाद उन्होंने कहा कि यह कॉपी तो नकली है यह नकली आर्डर है मैंने भी मुहल्ले वालों के साथ स्टे के लिए चंदा दिया था।
बेघर हुए लोगों को भोजन-पानी की मदद कर रहे युवक
बेघर हुए लोगों सिर छिपाने की जगह है न ही खाने पीने की कोई व्यवस्था ऐसे में इमलीपुरा सहित आसपास के लोग सुबह और शाम भोजन पानी पीड़ित लोगों तक पहुंचा रहे है। कुछ लोगों ने अपना मकान भी लोगों के लिए खोल दिया है।
वक्फ बोर्ड की खाली जमीन पर हो विस्थापन
कांग्रेस पार्षद शब्बीर कादरी व कहारवाड़ी वार्ड के निर्दलीय पार्षद अशफाक सीगड़ ने कहा कि बेघर हुए लोगों के लिए वक्फ बैतूल माल की जगहों पर विस्थापन होना चाहिए। जब तक पीड़ित परिवारों का इंतजाम नहीं होता उन्हें खानशाह वार्ड व लाल चौकी के पास स्कूल के पीछे खाली पड़ी जमीन पर विस्थापित करना चाहिए। जिला बैतूल माल कमेटी और वक्फ बोर्ड कमेटी को इस नेक काम के लिए आगे आकर काम करना चाहिए।विज्ञापन
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