: भामगढ़ राज परिवार की निशान यात्रा संत श्री सिंगाजी महाराज समाधि स्थल पहुंची
Barkat Qureshi / Mon, Oct 6, 2025 / Post views : 235
भामगढ़ राज परिवार की निशान यात्रा संत श्री सिंगाजी महाराज समाधि स्थल पहुंची
भामगढ़ में राजपरिवार द्वारा 'निशान परंपरा' की हुई शुरुआत
विशेष संवाददाता लोकेंद्र तिरोले
खंडवा – निमाड़ की महान संत परंपरा और भक्ति परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, भामगढ़ राज परिवार द्वारा संत श्री सिंगाजी महाराज की समाधि स्थल तक भव्य 'निशान यात्रा' निकाली गई। इस यात्रा के माध्यम से राजपरिवार ने 'निशान परंपरा' की नई शुरुआत की है। इस पावन यात्रा की अगुवाई भामगढ़ राजपरिवार की सदस्य डॉ. दीपमाला रावत और कुंवर वीरेन्द्र सिंह रावत ने की। यह यात्रा भामगढ़ राजगादी से आरंभ होकर संत ब्रह्मगिरी महाराज समाधि स्थल, संत बुखारसास बाबा आश्रम तथा संत गुलाबदास बाबा आश्रम होते हुए संत श्री सिंगाजी महाराज समाधि स्थल तक पहुंची। बड़ी संख्या में ग्रामवासियों और श्रद्धालुओं ने इसमें भाग लिया। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर संत सिंगाजी समाधि स्थल पर निशान अर्पित किए गए। संत श्री सिंगाजी महाराज को निमाड़ के निर्गुण भक्ति मार्ग के अग्रणी संतों में माना जाता है। वे अपने समय में भामगढ़ राज परिवार से विशेष रूप से जुड़े रहे। बताया जाता है कि राजा राव लखमें सिंह जी के शासनकाल में संत सिंगाजी ने भामगढ़ में 15 वर्षों तक डाकिया के रूप में सेवा की और राज परिवार पर अपनी कृपा बरसाई थी।
वर्तमान में, जहां संत सिंगाजी का बैठक स्थान था, वहीं डॉ. दीपमाला रावत द्वारा एक सुंदर मंदिर का निर्माण भी करवाया गया है, जो श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है।
राजगादी के निशान की पूजा और यात्रा का स्वागत संत गुलाबदास बाबा आश्रम के महंत श्री विजेन्द्र राव पंवार द्वारा विधिवत रूप से किया गया। इस अवसर पर कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे, जिनमें मदन तिरोले (उपाध्यक्ष, जनपद पंचायत अमलपुरा), अंकुश मोरे, विनोद पटेल, किरन पचोले, दीपसिंह मौर्य, जसवंत पंवार सहित अनेक ग्रामीण शामिल थे।
यह यात्रा भामगढ़ के गौरवपूर्ण इतिहास और संत परंपरा को जनमानस से जोड़ने का एक प्रेरणादायक प्रयास रही, जिससे आने वाली पीढ़ियां अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी रहेंगी।विज्ञापन
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