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: मनुष्य कि संगति उसे अच्छा और बुरा बनाती हैं, इसलिए अच्छी संगति होना जरुरी हैं-धीरज कृष्ण शास्त्री

Barkat Qureshi / Sat, Jan 4, 2025 / Post views : 147

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मनुष्य कि संगति उसे अच्छा और बुरा बनाती हैं, इसलिए अच्छी संगति होना जरुरी हैं-धीरज कृष्ण शास्त्री खंडवा(लोकेंद्र तिरोले)मनुष्य कि संगति ही उसे अपराधी और नेक व्यक्ति बनाती हैं। आप एक अच्छे व्यक्ति के पास बैठेंगे तो अच्छे बनोगे वहीं वकील, इंजीनियर के संगत में रहोंगे तो उनकी संगत आएँगी वैसे ही संत के पास रहोंगे तो संत बन जाओंगे। इसलिए यह विचार करना हैं कि आपको किसकी संगति करना हैं. यह बात वृंदावन धाम के श्री धीरज कृष्ण शास्त्री जी ने जिला जेल में आयोजित भागवत चर्चा के दौरान कही। कार्यक्रम प्रभारी आशीष जायसवाल ने बताया शास्त्रीजी मयूर विहार में आयोजित श्रीमद भागवत कथा के दौरान खंडवा आये हैं. समिति हर वर्ष जिला जेल में आये हुए कथा वाचक कि भागवत चर्चा कराते आ रहे हैं. शास्त्री जी कैदियों को सम्बोधित करते हुए कहा रावण सोने कि लंका में इतना वैभव होने के बाद भी सो नहीं पाते थे लेकिन श्रीराम 14 वर्ष झोपड़ी में रहकर आराम कि नींद सो पाते थे। इसलिए आप किसी भी कारणों से जेल में आये हो कोई झूठे अपराध के कारण आये हो कोई अपने कर्मो के कारण यहां सजा भुगत रहे होंगे. आपको खुद चिंतन करने कि जरुरत हैं और खुद को कैसे सुधार सकते हैं उस पर विचार करना चाहिए। जब भी त्योहार आते होंगे चाहे होली, रखी या दीपावली हो परिवार के लोगो याद करते रहते हैं लेकिन आपको याद करने के कारण त्योहार नहीं मना पाते हैं। यह सब कर्मो के कारण आप यहां बैठे हैं यह विचार करने कि बात हैं. आप एक कैदी जेल और प्रशासन कि निगाह में होंगे लेकिन मैं आपके अंदर बैठे परमात्मा के दर्शन कर रहा हूं. आपमें परमात्मा जाग्रत हो जाये तो आप मेरी जगह बैठे होंगे। गलती करके आये हो क्रोध और प्रतिशोध कि भावना कभी उन्नति नहीं कराती। आप गलत काम करके सजा काट रहे हो लेकिन बच्चे आपके अपराध को झेलते होंगे। बच्चे भी माँ-बाप के होते हुए भी अनाथ घूम रहे हैं. यदि आपने सुधरने का जिस दिन सोच लिए उस दिन सजा माप नहीं हो लेकिन सजा हाफ हो जायेंगी. जेल परिवार भी चाहता हैं कि आप लोग सुधरे और अच्छा जेववान व्यापन करें. जैसे रत्नाकर डाकू मरा मरा कहते हुए राम राम कि धुन का गुणगान करते हुए ठाकुरजी के समीप आकर अच्छा इंसान बन गया. आप भी जेल से बाहर निकलो तो कंश बनके नहीं बल्कि कृष्ण बनकर निकलो। प्राश्चित करो कि अच्छा बनके यहां से बाहर आएंगे. स्वर्ग और नरक सब यही हैं। जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी ने आभार वक़्त करते हुए कहा यह सतनाम भाई और उनकी समिति का आभार जिनके कारण यहां संत का समागम हो पाता हैं. हम भी चाहते हैं कि यहां आप जैसे संत आकर कैदियों के उत्थान के लिए भागवत चर्चा करें. यदि एक भी कैदी के जीवन में भी परिवर्तन आ जाये तो हम सब का यह प्रयास सार्थक हो जाएगा. जेल अधीक्षक अदिति चतुर्वेदी और वरिष्ठ जेलर ने धीरज कृष्ण शास्त्री जी का पुष्प माला से पहनाकर स्वागत किया. वहीं जेल परिवार ने शास्त्री जी का स्वागत किया. इस अवसर पर वरिष्ठ जेलर ललित दीक्षित, सहायक जेल अधीक्षक सोनम मंडोरे, अभिषेक त्रिपाठी, ईशा बल्हेरे, रामबाबू तिवारी, आयोजक सतनामसिंह होरा, रमाकांत पाराशर, रुपसिंह सोलंकी मौजूद थे।

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