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: ममता की मूरत और मानवता की मिसाल: श्री दादाजी वृद्ध आश्रम की एक भावस्पर्शी कहानी

Barkat Qureshi / Sat, Jul 12, 2025 / Post views : 227

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ममता की मूरत और मानवता की मिसाल: श्री दादाजी वृद्ध आश्रम की एक भावस्पर्शी कहानी

संवाददाता लोकेंद्र तिरोले

खंडवा/ इस भागदौड़ भरी दुनिया में जहां रिश्ते अक्सर औपचारिकता में खो जाते हैं, वहीं श्री दादाजी वृद्ध आश्रम, रामनगर में घटित एक घटना ने यह साबित कर दिया कि प्रेम, सेवा और करुणा आज भी जीवित हैं। यह सिर्फ एक वृद्ध महिला को उसके परिवार से मिलाने की कहानी नहीं है, यह संवेदनशीलता, धैर्य और मानवता की जीत की कहानी है।  
अज्ञात महिला, अनकही पीड़ा
जानकारी के अनुसार मोघट थाना पुलिस को सड़क पर अकेली और असहाय स्थिति में एक वृद्ध महिला मिली। मानसिक रूप से अस्थिर लग रही यह महिला टूटी-फूटी हिंदी और मराठी में बात कर रही थी और अपना नाम-पता ठीक से नहीं बता पा रही थी। पुलिस ने उसे रात में ठहरने और देखभाल के लिए श्री दादाजी वृद्ध आश्रम, रामनगर में भर्ती कराया।  
आश्रम की करुणामयी सेवा
आश्रम की संचालिका श्रीमती अनीता सिंह चौहान और उनकी समर्पित टीम — नर्स श्रीमती भारती नलावडे, मुकेश मैथिल और नीलम मैथल — ने महिला की देखभाल को केवल कर्तव्य नहीं, बल्कि सेवा का माध्यम माना। उन्होंने महिला की पहचान जानने के लिए उसके आधार कार्ड की मदद ली, जलगांव में फोन कर संपर्क किया, और आश्रम के पुराने परिचितों से भी सहायता ली।  
सच्चाई का खुलासा
जब वृद्धा के संभावित पते पर व्यक्ति भेजा गया, तो चौंकाने वाली बात सामने आई —बुजुर्ग महिला को उसके अपने बेटे ने आपसी मतभेद के चलते घर से निकाल दिया था। पीड़ा और अकेलेपन में वह निकल पड़ी थी, अनजानी राहों पर। यह घटना रिश्तों की सच्चाई पर प्रश्नचिन्ह तो लगाती है, लेकिन साथ ही आश्रम के लोगों के कार्यों को और अधिक महान बनाती है।  
मदद बनी सेतु: एक बेटी की तलाश पूरी हुई
आश्रम के परिचित और मत्स्य विभाग के अधिकारी अविनाश गायकवाड़ ने इस मानवीय अभियान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने किशनपुरा गांव (खंडवा जिले के बूंदी क्षेत्र) में रहने वाली छाया यादव नामक युवती से संपर्क किया। फोन पर जब छाया को पता चला कि उसकी मां सुरक्षित है, तो वह भावुक हो गई। उसने बताया कि उसकी मां उससे मिलने आ रही थी, लेकिन रास्ता भटक गई थी। छाया तुरंत आश्रम पहुंची और मां को गले लगाकर फूट-फूट कर रो पड़ी। यह दृश्य हर उस आंख को नम कर गया, जो वहां मौजूद थी।  
आभार और प्रेरणा
छाया यादव ने वृद्धाश्रम की संचालिका अनीता सिंह चौहान और पूरे स्टाफ का हृदय से आभार जताया। उसने कहा, "अगर मां को आश्रम में इतनी आत्मीयता और सम्मान न मिला होता, तो उनका क्या होता? आपने जो किया, वह भगवान जैसा काम है।"  
स्थानीय स्तर पर एक आदर्श उदाहरण
यह घटना केवल एक वृद्धा की सहायता नहीं है, यह समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत करती है — कि कैसे स्थानीय संस्थाएं, प्रशासन और संवेदनशील नागरिक मिलकर एक जीवन को नई आशा दे सकते हैं। श्री दादाजी वृद्ध आश्रम ने यह सिद्ध कर दिया है कि अगर नीयत नेक हो और हृदय में प्रेम हो, तो हर भटकी आत्मा को उसके घर तक पहुंचाया जा सकता है।  
समापन में....
आज जब समाज में परिवार विघटन और संवेदना की कमी की खबरें आम होती जा रही हैं, ऐसे में श्री दादाजी वृद्ध आश्रम के इस प्रयास ने एक नयी उम्मीद की किरण दिखाई है। यह घटना एक संदेश है — कि हर व्यक्ति चाहे किसी भी परिस्थिति में हो, अगर उसके लिए कोई सच्चे मन से आगे आए, तो वह फिर से अपनेपन की छांव पा सकता है।

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