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Barkat Qureshi / Thu, Oct 24, 2024 / Post views : 634

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खंडवा संसदीय क्षेत्र का भविष्य किस राह पर ? भाजपा सांसद को लेकर दायर याचिका पर हाई कोर्ट का कड़ा रुख चर्चाओं मे जिला ब्यूरो चीफ सरिता राजेश जाधव बुरहानपुर :- नामांकन हलफनामे मे सिटीजन कॉ. बैंक लोन को लेकर लगाई गई याचिका को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट ने खंडवा बीजेपी सांसद ज्ञानेश्वर पाटील के खिलाफ दायर एक चुनावी याचिका पर कड़ा रुख अपनाया है! हाई कोर्ट के जस्टिस विवेक जैन की एकलपीठ ने दोनो पक्षों की दलील सुनने के बाद सिटीजन कॉ. बैंक के महा प्रबंधक अथवा सीईओ को इस मामले के दस्तावेजो के साथ साथ आगामी 8 नवंबर को कोर्ट के समक्ष पेश होने का आदेश दिया है। इस मसले पर बैंक अधिकारी की उपस्तिथि संबंधी खर्च से लेकर कागजी दस्तावेजो का खर्च भी सांसद को ही वहन करने के आदेश मिले है! इस पुरे मामले पर सोशल मिडिया का शाब्दिक मायाजाल समझकर शहर का मतदाता -आम नागरिक -और सत्ताधारी दल के साथ विपक्षी नेताओ का समूह पूरे मामले से दूरी बनाने के बजाय पूरी सच्चाई की जड़ कुरेदने के मूड मे खडा नजर आ रहा है। क्या वास्तव मे 2024 के लोकसभा चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के हलफनामे मे बुरहानपुर सिटीजन कॉ. ऑपरेटिव बैंक से लिए गए लोन और डिफॉल्ट होने की बात छिपाई गई है ? लगाई याचिका के जवाब मे ज्ञानेश्वर पाटील के पक्ष से जवाब मे कहा गया था नामांकन दाखिल करते समय उन पर कोई लोन डिफॉल्ट नही था! अब मजे की बात यह है भारतीय जनता पार्टी का छोटे से लेकर बड़ा नेता हो या कार्यकर्ता भाजपा सदस्यता अभियान मे लगा हुआ दिखाई दे रहा है सभी का मत है भाजपा सदस्यो की संख्या मे रिकार्ड इजाफा होकर रिकार्ड कायम हो इसी कड़ी में बुरहानपुर जिला करोड़पति की गिनती मे खडा हो गया है। दुसरी तरफ इसी जिले के सांसद पर आफत आन पड़ी है ! जिले के आलावा इसी राज्य मध्यप्रदेश के उन्नतीस मे से उन्नतीस सांसद जीत का वरण कर (संसद भवन) दिल्ली पहुचे है। कांग्रेस के दृष्टिकोण से 2024 का लोकसभा चुनाव काले अध्याय से कम नही रहा है। इस चुनाव मे देश की सबसे वृद्ध पार्टी कांग्रेस का कोई उम्मीदवार जीत दहलीज को पार नही कर सका था। अब उसके पास हाई कोर्ट की सख्ती के बाद कोसो दूर खड़ी एक आस की धुंधलका दिखाई दे रहा है! अगर समय रहते यह धुंधलका छंटता है और तश्वीर साफ दिखाई देती है तब।2024 के लोकसभा चुनाव मे प्रत्याशी नही कांग्रेस की हार हुई थी यह सिद्ध हो जायेगा। क्योंकि अब तक के चुनावी इतिहास मे कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में इस तरह के हार की कल्पना नही की होगी! पुरे मसले पर गहराई से चिंतन करें तब बुरहानपुर शहर के सांसद के खिलाफ बुरहानपुर शहर के वकील (अधिवक्ता) मनोज अग्रवाल की और से हाईकोर्ट मे याचिका दायर कर सांसदी रद्द करने की मांग की गई थीं ,साथ ही इसी याचिका मे रिटर्निग ऑफिसर पर कार्यवाही करने का आग्रह भी किया गया है। इस पूरे मामले की पैरवी याचिकाकर्ता अधिवक्ता के साथ साथ इसी लोकसभा चुनाव मे निर्दलीय प्रत्याशी रहे मनोज अग्रवाल ख़ुद ही अपने मामले की पैरवी कर रहे थे किन्ही कारणों से अग्रवाल की याचिका खारिज हो गईं है। किन्तु अन्य याचिकाकर्ता नरेंद्र पटेल के वकील अभिषेक अरजरिया की अपील और तर्क के आधार पुरे मामले की अगली सुनवाई 4 सितंबर को होना है। पूरे मामला का रोमांचक पहलू निर्वाचक दंडिका मे कॉलम अनुसार जवाब देना है या इन कॉलम के इतर जाकर भी फार्म भरना होता है नए मोड़ पर आकर खडा हो गया है। पुरे मामले मे त्रुटि कहा रह गई है चिंतन का समय है ।पुरे मामले मे प्रश्न फिर वही क्या फैंसला इसी दिन आएगा ? और अगर फैंसला इसी दिन याचिकाकर्ता के पक्ष मे आता है तब भाजपा सांसद की सांसद सदस्यता समाप्त भी हो सकती है! निमाड़ की नियति बन चुके लोकसभा क्षेत्र मे पुनः उप चुनाव होंगे! कुल मिलाकर प्रदेश मे 29 सांसदो वाले मध्यप्रदेश से आने वाले समय मे कांग्रेस की रिक्क्तता भरी जाती है या संख्या यथावत रहती है अभी गर्त मे ही है।

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