: बाल विवाह, कुपोषण और बालिका शिक्षा पर ग्रामीणों को किया गया जागरूक
Barkat Qureshi / Wed, Mar 26, 2025 / Post views : 212
बाल विवाह, कुपोषण और बालिका शिक्षा पर ग्रामीणों को किया गया जागरूक
रहटगाँव - सिनर्जी संस्थान व T.D.H. के सहयोग से चलाए जा रहे कार्यक्रम किशोर-किशोरी संसाधन केंद्र द्वारा ग्राम बौथी में सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में गाँव के सरपंच, शिक्षक, गांव पटेल व ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक के दौरान बाल विवाह, बालिका शिक्षा, कुपोषण और जेंडर भेदभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने बालिका शिक्षा को लेकर अपनी राय व्यक्त की और शिक्षा के महत्व को बेहतर तरीके से समझा। विशेष रूप से यह बात सामने आई कि कई बच्चे आवश्यक दस्तावेज़ न होने के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों को दस्तावेज़ निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया और शिक्षा से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। बैठक में कुपोषण को रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रोटीन युक्त आहार, घरेलू और खेतों में उगाई जाने वाली पोषक खाद्य सामग्री के सेवन पर जोर दिया गया। साथ ही, स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया, जिससे वे बीमारियों से बच सकें। बैठक में बताया गया कि पहले की तुलना में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है। हालाँकि, कुछ मामलों में अभी भी ऐसे हालात बन जाते हैं, जहाँ लड़के-लड़कियाँ भागकर शादी कर लेते हैं या परिस्थितिवश विवाह करवाना पड़ता है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे लोग इसके दुष्प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकें।: बैठक में शिक्षकों और अभिभावकों ने ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने का आश्वासन दिया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण पर भी विचार-विमर्श हुआ। ग्रामीणों को अपने घरों और आस-पास के इलाकों को स्वच्छ रखने, कचरे के सही निपटान और वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में सिनर्जी संस्थान से श्रीचन्द्र पवार.पिरथी काजले,सरोज परते,रक्षा हिरवा शामिल रही।
रहटगाँव - सिनर्जी संस्थान व T.D.H. के सहयोग से चलाए जा रहे कार्यक्रम किशोर-किशोरी संसाधन केंद्र द्वारा ग्राम बौथी में सामुदायिक बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में गाँव के सरपंच, शिक्षक, गांव पटेल व ग्रामीणों ने भाग लिया। बैठक के दौरान बाल विवाह, बालिका शिक्षा, कुपोषण और जेंडर भेदभाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। ग्रामीणों ने बालिका शिक्षा को लेकर अपनी राय व्यक्त की और शिक्षा के महत्व को बेहतर तरीके से समझा। विशेष रूप से यह बात सामने आई कि कई बच्चे आवश्यक दस्तावेज़ न होने के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। इस पर चर्चा करते हुए ग्रामीणों को दस्तावेज़ निर्माण की प्रक्रिया से अवगत कराया गया और शिक्षा से अधिक से अधिक बच्चों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया गया। बैठक में कुपोषण को रोकने के उपायों पर भी चर्चा हुई, जिसमें प्रोटीन युक्त आहार, घरेलू और खेतों में उगाई जाने वाली पोषक खाद्य सामग्री के सेवन पर जोर दिया गया। साथ ही, स्वच्छता और स्वास्थ्य को लेकर भी ग्रामीणों को जागरूक किया गया, जिससे वे बीमारियों से बच सकें। बैठक में बताया गया कि पहले की तुलना में बाल विवाह के मामलों में कमी आई है। हालाँकि, कुछ मामलों में अभी भी ऐसे हालात बन जाते हैं, जहाँ लड़के-लड़कियाँ भागकर शादी कर लेते हैं या परिस्थितिवश विवाह करवाना पड़ता है। इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए, बाल विवाह के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिससे लोग इसके दुष्प्रभावों को बेहतर ढंग से समझ सकें।: बैठक में शिक्षकों और अभिभावकों ने ड्रॉपआउट बच्चों को फिर से शिक्षा से जोड़ने का आश्वासन दिया। इसके अलावा, पर्यावरण संरक्षण पर भी विचार-विमर्श हुआ। ग्रामीणों को अपने घरों और आस-पास के इलाकों को स्वच्छ रखने, कचरे के सही निपटान और वृक्षारोपण के महत्व के बारे में जागरूक किया गया। इस कार्यक्रम में सिनर्जी संस्थान से श्रीचन्द्र पवार.पिरथी काजले,सरोज परते,रक्षा हिरवा शामिल रही।विज्ञापन
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